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    यूनियन बजट 2026 से पहले रियल एस्टेट सेक्टर की मांग? टैक्स छूट और जीएसटी में राहत की उम्मीद, जानें डिटेल

    1 week ago

    Real Estate Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 से पहले देश का रियल एस्टेट सेक्टर नीति में निरंतरता के साथ कुछ अहम सुधारों की उम्मीद कर रहा है. जिससे आवासीय मांग को मजबूती मिल सके और शहरी विकास को गति मिले.

    बीते कुछ समय में एंड-यूजर डिमांड, बेहतर अफोर्डेबिलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के चलते सेक्टर में स्थिर ग्रोथ देखने को मिली है. ऐसे में डेवलपर्स का मानना है कि आने वाला बजट रियल एस्टेट के अगले ग्रोथ फेज के लिए अहम साबित हो सकता है.

    विशेषज्ञों की राय

    इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार का आवास को आर्थिक विकास के प्रमुख इंजन के रूप में देखना जारी रहना चाहिए. खासतौर पर ऐसे समय में जब ब्याज दरें स्थिर हैं और होमबायर्स का भरोसा बना हुआ है. सेक्टर की प्रमुख मांगों में होमबायर्स के लिए टैक्स बेनिफिट्स बढ़ाना, अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर जीएसटी को तर्कसंगत बनाना और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर व किफायती आवास के लिए बजट आवंटन बढ़ाना शामिल है.

    रियल एस्टेट सेक्टर की एक बड़ी अपेक्षा होम लोन पर ब्याज छूट धारा 24(b) की सीमा बढ़ाने को लेकर है. बीते कुछ वर्षों में प्रॉपर्टी की कीमतों और निर्माण लागत में वृद्धि को देखते हुए डेवलपर्स का मानना है कि टैक्स डिडक्शन बढ़ाने से एंड-यूजर्स को सीधा लाभ मिलेगा और फर्स्ट-टाइम होमबायर्स को घर खरीदने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा. इसके अलावा जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर स्पष्टता और अंडर-कंस्ट्रक्शन घरों पर जीएसटी दरों में संभावित कमी से हाउसिंग डिमांड को बढ़ावा मिल सकता है.

    प्रिंसिपल भुगतान पर टैक्स छूट की उम्मीद

    बजट से जुड़ी उम्मीदों पर बात करते हुए गंगा रियल्टी के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर विकास गर्ग ने कहा, आगामी केंद्रीय बजट हाउसिंग सेक्टर में एंड-यूजर डिमांड को और मजबूत करने का अवसर है. हमें उम्मीद है कि सरकार होम लोन पर ब्याज और प्रिंसिपल भुगतान पर टैक्स छूट बढ़ाने पर विचार करेगी, जो लंबे समय से अपरिवर्तित है. बायर-सेंट्रिक नीतियां और नीति में स्थिरता, खासकर गुरुग्राम जैसे हाई-ग्रोथ मार्केट्स में, मौजूदा सकारात्मक रुझान को बनाए रखने में मदद करेंगी, जहां मांग मुख्य रूप से वास्तविक खरीदारों से आ रही है.

    इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश भी रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक अहम फोकस एरिया बना हुआ है. हाईवे, मेट्रो नेटवर्क, एक्सप्रेसवे और रीजनल कनेक्टिविटी में लगातार हो रहे निवेश से उभरते इलाकों में रियल एस्टेट की संभावनाएं काफी बेहतर हुई हैं. डेवलपर्स का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता कैपेक्स न केवल हाउसिंग डिमांड बढ़ाएगा, बल्कि कमर्शियल और मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट को भी सपोर्ट करेगा.

    गर्ग ने आगे कहा कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से कनेक्टिविटी बेहतर होती है, जिससे शहरों की लिवेबिलिटी और निवेश आकर्षण बढ़ता है. जो डेवलपर्स और खरीदारों दोनों के लिए दीर्घकालिक लाभ लेकर आता है.

    त्रेहान ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर की उम्मीदें 

    रियल एस्टेट देश की आर्थिक वृद्धि का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है और बजट के जरिए हाउसिंग डिमांड और इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित विकास को और तेज किया जा सकता है. हमें किफायती और मिड-इनकम हाउसिंग के लिए प्रोत्साहनों के जारी रहने और ऐसी नीतियों की उम्मीद है, जो प्रोजेक्ट्स की व्यवहार्यता को बेहतर बनाएं. कंप्लायंस प्रक्रिया को सरल बनाना और संस्थागत फाइनेंसिंग तक बेहतर पहुंच डेवलपर्स को क्वालिटी प्रोजेक्ट्स समय पर डिलीवर करने में मदद करेगी, साथ ही खरीदारों के लिए कीमतें भी प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी.

    सरांश त्रेहान  ने यह भी कहा कि स्थिर नीतिगत माहौल और दीर्घकालिक विजन निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है. उन्होंने जोर दिया कि स्पष्ट टैक्स नीतियां और निरंतर शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के निवेशकों को भारतीय रियल एस्टेट की ओर आकर्षित किया जा सकेगा.

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