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    US Iran War: बिना 1 गोली चलाए अमेरिकी F-35 को जाम कर देगा चीन, सुपरपावर बनने का ड्रैगन का सीक्रेट प्लान लीक

    6 days ago

    अमेरिका गलत युद्ध में उलझा हुआ है, क्योंकि वॉशिंगटन ईरान से लड़ने में अरबों डॉलर खर्च कर रहा है और वैश्विक सुर्खियां तेल की कीमतों और मिसाइलों को लेकर बन रही हैं. ये खुलासा चीन के एक गुपचुप जारी किए गए दस्तावेज से पता चला है.  

    बीजिंग द्वारा जारी दस्तावेज के मुताबिक आने वाले दशकों में शक्ति संतुलन बदल सकता है. 5 मार्च को राष्ट्रीय जन कांग्रेस में चीन की 141 पेजों वाली 15वीं पंचवर्षीय योजना का अनावरण किया गया, जिसमें अगली पीढ़ी की आर्थिक और सैन्य शक्ति को परिभाषित करने वाली टेक्नोलॉजी और उद्योगों पर प्रभुत्व स्थापित करने की एक महत्वाकांक्षी रणनीति बताई गई है. 

    शनाका एंसलम परेरा ने क्या बताया
    इन्वेस्टमेंट एनालिस्ट और लेखक शनाका एंसलम परेरा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कोई ध्यान नहीं दे रहा है यही तो असली मुद्दा है. यह योजना किसी सामान्य आर्थिक नीति दस्तावेज से कम और राष्ट्रीय तकनीकी लामबंदी की तरह ज्यादा लगती है. AI इस दस्तावेज में प्रमुखता से शामिल है और बीजिंग ने अगले दशक में अपनी अर्थव्यवस्था के अधिकांश हिस्सों में AI को शामिल करने का संकेत दिया है.

    क्या-क्या करने जा रहा है चीन
    उन्होंने बताया कि चीन ने ह्यूमनोइड रोबोटिक्स को एक प्रमुख उद्योग घोषित किया है, जिसके उत्पादन में अगले 5 सालों में दोगुना वृद्धि की उम्मीद है. इस योजना के तहत चीन Earth Quantum Communication Network, Nuclear-Fusion Research और Advancing Brain-Computer Interface Technologies को तेजी से बढ़ाने के किए कमिटेड है. इसके अलावा सिर्फ AI से जुड़े उद्योगों की कीमत योजना अवधि में 10 ट्रिलियन युआन से अधिक होने की उम्मीद है, जो मौजूदा एक्सचेंज सेट के अनुसार लगभग 1.4 ट्रिलियन डॉलर के बराबर है.

    पेरेरा का तर्क है कि रणनीति की व्यापकता ही इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है. उन्होंने कहा कि यह कोई आर्थिक योजना नहीं है बल्कि यह एक ऐसे युद्ध की योजना है जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका नहीं लड़ रहा है. उन्होंने आगे बताया कि चीन की रणनीति कहीं अधिक व्यापक है. AI को भारी उद्योग से लेकर सेवाओं तक पूरी इकॉनमी में फैलाने का टारगेट है. रोबोटिक्स का मकसद औद्योगिक उत्पादन को आधार प्रदान करना है. 

    चीन के कंट्रोल में क्या है
    चीन वर्तमान में विश्व के अधिकांश दुर्लभ खनिजों की प्रोसेसिंग करता है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर अत्याधुनिक रडार तक हर चीज के लिए बहुत जरूरी है. हर एफ-35 फाइटर जेट के इंजन, सेंसर और हथियार प्रणालियों में सैंकड़ों पाउंड दुर्लभ धातुओं की आवश्यकता होती है. मिसाइल रक्षा बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण और सटीक गोला-बारूद भी इन पर निर्भर करते हैं. 

    शी जिनपिंग के 141 पेजों के रोडमैप का मकसद ये सुनिश्चित करना है कि भीषण युद्ध क्षमता को हासिल करने के लिए आवश्यक मटेरियल अगले 15 सालों तक चीनी कंट्रोल में रहें. विश्लेषकों का कहना है कि अगर चीन ये मटेरियल, रोबोटिक्स और AI को एक ही राज्य-नियंत्रित प्रणाली में शामिल करने में सफल हो जाता है, तो अगली वैश्विक महाशक्ति बनने की दौड़ में बीजिंग सबसे आगे होगा.

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