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    US, इजरायल- ईरान युद्ध से बंदर अब्बास पोर्ट ठप, भारत के बासमती चावल निर्यात पर गहराया संकट

    5 days ago

    मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तेज होता युद्ध अब समुद्री व्यापार की धमनियों को काट रहा है. ईरान का सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त बंदरगाह बंदर अब्बास अब लगभग पूरी तरह बंद हो चुका है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरा मंडरा रहा है, जहाजों पर बीमा कवर रद्द हो रहा है और फ्रेट रेट्स दोगुने से ज्यादा हो गए हैं. इसका सबसे बड़ा झटका भारत के बासमती चावल निर्यात को लगा है, जहां ईरान दूसरा सबसे बड़ा बाजार है और बंदर अब्बास पोर्ट से ही अफगानिस्तान, तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान जैसे लैंडलॉक देशों तक सप्लाई होती थी.

    बंदर अब्बास पर फंसे हजारों कंटेनर

    ABP News से बातचीत में प्रमुख निर्यातकों ने बताया कि बंदर अब्बास पर हजारों कंटेनर फंसे पड़े हैं. बासमती निर्यातक शोभित ने कहा, 'ईरान दुनिया का सबसे बड़ा बासमती आयातक है. बंदर अब्बास से हमारे चावल न सिर्फ ईरान पहुंचते थे, बल्कि मध्य एशिया के कई देशों तक ट्रांजिट होते थे. हम इस साल अफगानिस्तान को पाकिस्तान के बजाय सीधे भारत से भेज रहे थे. सब बढ़िया चल रहा था, लेकिन युद्ध ने सब उलट-पुलट कर दिया. अब 4 से 5 हजार कंटेनर वहां अटके हैं. कुछ पेमेंट आ चुकी है, लेकिन ज्यादातर माल और पैसा दोनों फंसे हुए हैं. 

    उन्होंने बताया,  'कुल 10-11 लाख क्विंटल बंदर अब्बास पर और भारत के पोर्ट्स पर 7-8 लाख क्विंटल – मतलब 18-20 लाख क्विंटल स्टॉक जोखिम में है. पहले एक कंटेनर का चार्ज 500 डॉलर था, अब 'वार सरचार्ज' के साथ 2500 डॉलर तक पहुंच गया. चावल में सिर्फ 2-3 फीसदी मार्जिन होता है. इतना महंगा कोई नहीं उठा सकता. नई डील रुक गई, पुराने माल फंसे हैं.'

    दूसरे निर्यातक मोहम्मद मिनाज ने अपनी मुश्किल बताई, 'हमारे 30-40 कंटेनर बंदर अब्बास के लिए निकले थे. कुछ अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान जाना था. लेकिन अब शिप UAE के किसी और पोर्ट पर ट्रांजिट में रोक दी गई है. शिपिंग लाइंस कह रही हैं – खुद संभालो. हमारे 1000-2000 मीट्रिक टन माल अटका है, कीमत करोड़ों में. सबसे बड़ी दिक्कत ईरान में इंटरनेट बंद होना है. बायर से बात नहीं हो पा रही. शिप पर क्रू फंसे हैं, लेकिन हमारी उनसे कोई संपर्क नहीं.'

     4 लाख मीट्रिक टन चावल फंसा

    ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल करीब 4 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल पोर्ट्स पर या ट्रांजिट में फंसा हुआ है, जिसमें बंदर अब्बास सबसे बड़ा केंद्र है. राइस एक्सपोर्टर शोभित जैन ने आगे बताया कि फ्रेट रेट्स दोगुने हो गए, बीमा कंपनियां कवर रद्द कर रही हैं और अगर किसी जहाज पर हमला हुआ तो 'नल एंड अवॉइड' क्लॉज से पूरा नुकसान निर्यातकों पर.

    निर्यातकों ने दी ये चेतावनी

    निर्यातक चेतावनी दे रहे हैं कि अगर बंदर अब्बास से निर्यात नहीं हुआ तो पूरी इंडस्ट्री कोलैप्स हो सकती है. शोभित ने कहा, “सऊदी अरब, ईरान, इराक में सप्लाई रुकी तो भारत में स्टॉक बढ़ेगा, दाम गिरेंगे. उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब जैसे राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. किसानों को पानी का दाम भी नहीं मिलेगा.”

    सरकार से की ये अपील

    सरकार से अपील है कि बंदर अब्बास फंसे माल पर डेमुरेज, अतिरिक्त चार्ज माफ हों और राहत पैकेज आए. अगर युद्ध लंबा खिंचा तो डॉलर की कमाई रुकेगी, तेल महंगा होगा और महंगाई बढ़ेगी. निर्यातक उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द कूटनीतिक कोशिश से यह बड़ा बाजार बच सके. वरना बासमती का यह महत्वपूर्ण रास्ता लंबे समय के लिए बंद हो सकता है. जिसका सीधा-सीधा असर भारत में महंगाई के रूप में देखने को मिलेगा.

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