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    सोशल मीडिया को हथियार बनाकर कट्टरपंथ फैला रहे पाकिस्तान के आतंकी संगठन, ये रिपोर्ट चौंका देगी

    3 days ago

    इंटरनेट की दुनिया ने लोगों को जानकारी से दूर नहीं रखा है, बल्कि इसकी पहुंच को आसान बना दिया है. डिजिटल युग में सोशल मीडिया की जानकारी और खबरें बहुत तेजी से वायरल होती है. इसी को लेकर यूरेशिया रिव्यू की चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आतंकी संगठन तेजी से कट्टरपंथ फैलाने और हमलों की साजिश रचने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं. वह न सिर्फ लॉजिस्टिक नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं, बल्कि एडवांस डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. वह इन्हें हथियारों की तरह उपयोग कर रहे हैं. इस रिपोर्ट का टाइटल कट्टरपंथ फैलाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का हथियारीकरण, भारतीय उपमहाद्वीप पर मंडराता बड़ा खतरा है.

    रिपोर्ट में लाल किले के पास हुए आतंकी हमले का जिक्र 

    इस रिपोर्ट के मुताबिक, 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकी हमले और 14 दिसंबर 2025 को ऑस्ट्रेलिया के बोंडी बीच पर हालिया हमले यह दिखाते हैं कि चरमपंथी नेटवर्क किस तरह सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर हिंसा भड़काने का काम कर रहे हैं.

    रिपोर्ट में दावा- कमजोर और संवेदनशील लोगों को आतंकवाद में धकेला जा रहा

    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि डिजिटल प्रोपेगेंडा, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन साइकोलॉजिकल हेरफेर के जरिए कमजोर और संवेदनशील लोगों को टेरिरिस्ट एक्टिविटी की ओर धकेलने की कोशिश की जा रही है. इन घटनाओं को लोन वुल्फ हमले के रूप में दिखाने की कोशिश की जाती है. ऐसे हमले संगठित और पूरी प्लानिंग के तहत अंजाम दिए जाते हैं. रिपोर्ट में बताया गया कि आतंकी संगठन लोगों को प्रभावित करने के लिए फेक न्यूज, प्रोपेगेंडा और नैरेटिव वॉरफेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं. इन तरीकों से आर्थिक रूप से कमजोर और समाज से कटे हुए लोगों को धर्म, राज्य या किसी काल्पनिक एजेंडे के नाम पर उकसाया जाता है.

    इसकी वजह सोशल मीडिया का उपयोग कम लागत में होता है. इससे सेंट्रलाइज स्ट्रक्चर, तेज स्पीड और वैश्विक स्तर पर पहुंच जैसे विशेषताएं इसे चरमपंथी संगठनों के लिए कैंपेन चलाने, सपोटर्स को भर्ती करने और हमलों के लिए लोगों को संगठित करने का प्रभावी माध्यम बना देती है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सोशल मीडिया आतंकवाद का मुख्य कारण न हो, लेकिन आधुनिक आतंकवाद को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

    रिपोर्ट में इस्लामिक स्टेट और सहयोगी संगठन का जिक्र 

    इस रिपोर्ट में इस्लामिक स्टेट और उसके सहयोगी संगठनों की भूमिका भी जिक्र किया गया है. इराक और सीरिया में क्षेत्रीय नुकसान के बावजूद आइएस ने अपने डिजिटल ऑपरेशन मजबूत किए हैं. ऑनलाइन प्रोपेगेंडा नेटवर्क के जरिए वैचारिक प्रभाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है. रिपोर्ट की मानें तो दक्षिण एशिया में भी चरमपंथी नेटवर्क तेजी से सक्रिय हो रहे हैं. 2024 तक आईएस के ऑनलाइन नेटवर्क भारत और बांग्लादेश जैसे देशों तक फैल गए हैं.

    पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों का भी जिक्र 

    इस रिपोर्ट में पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों 'द रजिस्टेंस फ्रंट और पीपुल्स एंटी फासटिस्ट फ्रंट' का भी उल्लेख किया है. इन पर सोशल मीडिया के जरिए प्रोपेगेंडा फैलाने का आरोप लगाया है. इसके अलावा जमात ए इस्लामी के बांग्लादेश में गहरे प्रभाव और पाकिस्तान खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े कथित समर्थन नेटवर्क का जिक्र भी किया गया है. रिपोर्ट की मानें तो रेड फोर्ट हमले से जुड़े हमलावर ऑनलाइन कंट्टरपंथ का शिकार हुए थे. जांचकर्ताओं ने इसे व्हाइट कॉलर टेररिज्म बताया है. इसमें कई लोग पढ़े लिखे भी थे.

    साइबर आधारित आतंकवाद का बढ़ता खतरा 

    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कैसे साइबर आधारित आतंकवाद के बढ़ते खतरे का भी जिक्र किया गया है. यहां ऑनलाइन भर्ती अभियान और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को चरमपंथी नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है. कई देशों ने ऑनलाइन चरमपंथ से निपटने के लिए कड़े कानून और नियम लागू करना शुरू कर दिया है. ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, सिंगापुर और इंडोनेशिया जैसे देशों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं, जबकि भारत ने 2025 में ही कट्टरपंथ और आतंकी प्रोपेगेंडा फैलाने वाले 9,845 यूआरएल ब्लॉक किए.रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सहयोग जरूरी होगा. इसके लिए मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचे और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई गई है.

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