Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    dailyadda
    dailyadda

    रेबीज को महामारी की लिस्ट में क्यों लाना चाहती है दिल्ली सरकार, इससे क्या होगा फायदा?

    1 week ago

    दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राजधानी में संक्रमित जानवरों से होने वाली रेबीज बीमारी को महामारी रोग अधिनियम के तहत नोटिफाएबल डिजीज घोषित करने का निर्णय लिया है. इसके तहत अब राजधानी में रेबीज के हर एक मामले की जानकारी स्वास्थ्य अधिकारियों तक देना अनिवार्य होगा.
    रेबीज को नोटिफाएबल डिजीज घोषित करने का मुख्य उद्देश्य रेबीज के मामलों की निगरानी, समय पर रिपोर्टिंग और तेजी से इलाज व रोकथाम के कदम उठाना है. इस आदेश के लागू होने के बाद सभी सरकारी और निजी अस्पतालों और क्लीनिकों को रेबीज से जुड़े मामलों की जानकारी तुरंत स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी, जो राजधानी में रेबीज की रोकथाम के लिए जरूरी है.

    सभी अस्पतालों और डॉक्टरों पर नई जिम्मेदारी

    दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में यह बड़ा निर्णय लिया है, जिसके तहत राजधानी दिल्ली में रेबीज से जुड़े प्रत्येक मामले की पूरी जानकारी स्वास्थ्य अधिकारियों तक पहुंचाना अनिवार्य होगा. इसके अंतर्गत सभी अस्पतालों, क्लिनिक, स्वास्थ्य केंद्रों और डॉक्टरों को रेबीज के मामलों की जानकारी देना जरूरी होगा, चाहे मामला संदिग्ध हो या कन्फर्म. सभी को संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को तुरंत सूचना देनी होगी. सरकार ने इस बीमारी को महामारी रोग अधिनियम (Epidemic Diseases Act) के तहत नोटिफाएबल डिजीज घोषित करने का निर्णय लिया है, जिसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी गई है.

    स्वास्थ्य मंत्री का बयान

    दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि सरकार रेबीज की बीमारी को रोकना चाहती है और इस बीमारी से होने वाली एक भी मौत स्वीकार नहीं है. उन्होंने कहा कि रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, जिसे समय रहते रोका जा सकता है. इसी वजह से यह फैसला तुरंत लागू किया गया है.

    नोटिफाएबल डिजीज घोषित होने से क्या बदलेगा?

    रेबीज को नोटिफाएबल डिजीज घोषित होने से कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे, जिससे इस बीमारी की रोकथाम आसान हो सकेगी. इस फैसले के लागू होने के बाद सभी अस्पतालों, क्लिनिकों और स्वास्थ्य केंद्रों को रेबीज के मामलों या कुत्ते के काटने की घटनाओं की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देना कानूनी रूप से जरूरी होगा. इससे कोई भी मामला छुप नहीं पाएगा और समय पर इलाज और रोकथाम संभव हो सकेगी.

    रोकथाम और टीकाकरण पर सरकार का फोकस

    सरकार इस बीमारी के नियंत्रण और रोकथाम के लिए और अधिक काम करेगी, जिसमें ज्यादा फंड और संसाधन उपलब्ध कराना भी शामिल है. रेबीज के मरीजों की सही संख्या और जानकारी मिलने से रेबीज रोधी दवाइयों को अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों तक बेहतर तरीके से पहुंचाया जा सकेगा. इस फैसले से उच्च जोखिम वाले इलाकों में टीकाकरण अभियान भी प्रभावी रूप से चलाए जा सकेंगे, जिनमें कुत्तों और अन्य जानवरों का टीकाकरण शामिल होगा. यह कदम राजधानी में रेबीज को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा और मजबूत प्रयास माना जा रहा है.

    यह भी पढ़ें: Parle Owner: बिस्किट बनाने वाली कंपनी पारले का कौन है मालिक, उसका किस धर्म से वास्ता?

    Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

    Click here to Read More
    Previous Article
    VIDEO: बिहार पहुंचा दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग क्यों है खास, 17 जनवरी को यहां होगी स्थापना
    Next Article
    नॉनवेज खाते नहीं हैं और नैचुरली बढ़ाना चाहते हैं विटामिन बी12 का लेवल, ये 5 वेजिटेरियन फूड करेंगे आपकी मदद

    Related लाइफस्टाइल Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment