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    Middle East Tensions: ईरान वॉर के बीच क्यों इतना महत्वपूर्ण है स्ट्रैट ऑफ हॉर्मूज? रोजाना डेढ़ करोड़ बैरल तेल का होता है oil एक्सपोर्ट

    1 week ago

    Middle East Tensions: वेस्ट एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल मचा दी है. Israel और United States की कार्रवाई तथा Iran के जवाबी हमलों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा Strait of Hormuz की हो रही है. यह दुनिया के सबसे अहम तेल ट्रांजिट रूट्स में से एक है, जहां से प्रतिदिन लगभग 1.5 से 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है.

    Strait of Hormuz दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल ट्रांजिट मार्ग माना जाता है, जो ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है. यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. अपने सबसे संकरे बिंदु पर यह लगभग 33 किलोमीटर चौड़ा है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से इसकी रणनीतिक अहमियत बेहद बड़ी है. भारत अपनी जरूरत का 88% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. इसमें से लगभग 50% (करीब 25–27 लाख बैरल प्रतिदिन) तेल इसी मार्ग से होकर आता है. यानी भारत की ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक इस समुद्री रास्ते की निर्बाध आवाजाही पर निर्भर करती है.

    कौन कितना करता है एक्सपोर्ट?

    स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ के जरिए प्रमुख निर्यातक देशों का अनुमानित हिस्सा:

    सऊदी अरब – 38%

    इराक – 22%

    यूएई – 15%

    ईरान – 11%

    कुवैत – 9%

    कतर – 5%

    यदि इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट आती है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ सकता है.

    ये भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट में तनाव से तेल पर बड़ा संकट, भारत ने बचने के लिए खेल दिया ’तुरूप का पत्ता’

    कौन देश कितना करता है आयात?

    इस समुद्री मार्ग पर कई एशियाई अर्थव्यवस्थाएं काफी हद तक निर्भर हैं:

    चीन – 33%

    भारत – 13%

    दक्षिण कोरिया – 12%

    जापान – 11%

    अन्य एशियाई देश – 14%

    अन्य देश – 17%

    चीन और भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देशों के लिए यह मार्ग ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है.

    तनाव के बाद कितना महंगा हुआ तेल?

    ईरान पर हमलों के बाद पिछले छह दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 12% तक की तेजी देखी गई.

    25 फरवरी:

    71.06 डॉलर प्रति बैरल (लगभग 6,500 रुपये)

    2 मार्च:

    77.75 डॉलर प्रति बैरल (लगभग 7,115 रुपये)

    3 मार्च:

    79.60 डॉलर प्रति बैरल (लगभग 7,278 रुपये)

    तेल की कीमतों में यह तेजी संकेत देती है कि बाजार संभावित सप्लाई बाधा को लेकर चिंतित है.

    क्यों अहम है यह रूट?

    स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. यह मार्ग संकरा होने के बावजूद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धुरी माना जाता है. यदि संघर्ष और बढ़ता है या शिपिंग गतिविधियां प्रभावित होती हैं, तो तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है. आयातक देशों की महंगाई बढ़ सकती है. वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की लाइफलाइन है. मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच इसकी सुरक्षा और निर्बाध संचालन पूरी दुनिया के लिए अहम मुद्दा बना हुआ है.

    ये भी पढ़ें: ईरान पर इजरायल के हमलों के बीच लगातार तीसरे दिन तेल में लगी आग, बढ़ा महंगाई का खतरा

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