Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    dailyadda
    dailyadda

    करनाल के नायब सूबेदार ने पेरिस ओलिंपिक में जीता गोल्ड:7 मिनट 12 सेकेंड में क्लियर की रोइंग रेस, 18 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया

    5 days ago

    इंडियन आर्मी में नायब सूबेदार और पेरिस ओलिंपिक में डेब्यू करने वाले कैमला गांव के बलराज पंवार ने एक बार फिर प्रदेश का नाम नेशनल लेवल पर रोशन किया है। बलराज ने सीनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। इस चैंपियनशिप में बलराज ने 7 मिनट 12 सेकेंड में 2000 मीटर की रेस क्लियर की। बलराज ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी इस उपलब्धि की जानकारी सांझा की। बीती 27 जनवरी से 1 फरवरी तक पुणे में सीनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप हुई। इस चैंपियनशिप में बलराज ने भी अपना दमखम दिखाया और गोल्ड मेडल पर कब्जा किया। गोल्ड मेडलिस्ट बलराज पंवार ने दैनिक भास्कर ऐप से बातचीत में बताया कि पुणे में आयोजित रोइंग चैंपियनशिप में 18 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। जिसमें मेरी टाइमिंग 7 मिनट 12 सेकेंड की रही है। आर्मी की तरफ से लिया भाग उसने आर्मी सर्विसेज की तरफ से हिस्सा लिया था। दूसरे स्थान पर इंडियन आर्मी ही रही और तीसरे स्थान पर हरियाणा रहा और चौथे पर झारखंड रहा था। बलराज ने बताया कि रोइंग में हवा और पानी की धार भी जीत और हार को प्रभावित करती है। जिसके कारण समय ज्यादा लग जाता है। बलराज का कहना है कि उसने पेरिस ओलिंपिक में डेब्यू किया था, लेकिन वह मेडल नहीं जीत पाया, लेकिन अब उसका पूरा फोकस एशियन गेम्स और ओलिंपिक पर है। जानिए कौन है बलराज पंवार बलराज पंवार करनाल जिला के गांव कैमला के रहने वाले हैं। 10 साल की उम्र में पिता रणधीर पंवार का निधन हो गया। मां कमला पंवार ने सब्जी और दूध बेचकर, निर्माण कार्य और कपड़े फैक्ट्री में काम करके बलराज और उनके चार भाई-बहनों का पालन-पोषण किया। बलराज शादीशुदा हैं और उनका एक बच्चा है। 2018 में भारतीय सेना में सिपाही के रूप में भर्ती हुए। वर्तमान में नायब सूबेदार हैं। अक्टूबर 2021 से पुणे के आर्मी रोइंग नोड में है और ट्रेनिंग ले रहे है। खेल करियर और उपलब्धियां बलराज ने सेना में अपनी 6 फुट ऊंचाई की वजह से रोइंग शुरू की और पहले ही प्रयास में बटालियन रेगाटा जीत लिया। उनकी प्रगति बहुत तेज रही-मात्र 4-5 साल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गए। वे भारतीय रोइंग के एमएस धोनी कहलाते हैं, क्योंकि वे शांत और आत्मविश्वास से भरे रहते हैं। वे नेशनल और इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर देश का मान बढ़ा चुके हैं। मुख्य उपलब्धियां:
    Click here to Read More
    Previous Article
    अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्डकप मैच में चमका झज्जर का कनिष्क:पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी बार मैन ऑफ द मैच, मां बोलीं- कहा था बेटा धुम्मे ठावेगा
    Next Article
    रणजी ट्रॉफी: उत्तराखंड ने रचा इतिहास:असम को पारी से रौंदकर चौथी बार क्वार्टर फाइनल में, कप्तान चंदेला का दोहरा शतक

    Related खेल Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment