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    एक बटन दबा और देश हुआ ऑफलाइन! सरकारें कैसे मिनटों में रोक देती हैं पूरी इंटरनेट कनेक्टिविटी?

    1 week ago

    Internet Connectivity: आज के दौर में इंटरनेट सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं, बल्कि बैंकिंग, संचार, शिक्षा और सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुका है. ऐसे में जब अचानक पूरा देश या कोई बड़ा इलाका ऑफलाइन हो जाए तो यह सवाल उठता है कि आखिर सरकारें इतनी आसानी से इंटरनेट कनेक्टिविटी कैसे रोक देती हैं. हकीकत यह है कि इसके पीछे तकनीकी और कानूनी दोनों तरह के तरीके काम करते हैं.

    इंटरनेट शटडाउन का सबसे आम तरीका

    सरकारें आमतौर पर टेलीकॉम कंपनियों को आदेश देकर इंटरनेट सेवाएं बंद करवाती हैं. देश में जितने भी मोबाइल नेटवर्क और ब्रॉडबैंड सर्विस प्रोवाइडर होते हैं, वे सरकारी निर्देशों के तहत काम करते हैं. जैसे ही आदेश मिलता है, कंपनियां मोबाइल डेटा, ब्रॉडबैंड या दोनों को कुछ ही मिनटों में रोक देती हैं. इसी वजह से बड़े पैमाने पर इंटरनेट अचानक गायब हो जाता है.

    DNS और IP ब्लॉकिंग से कैसे रुकता है इंटरनेट

    कई बार पूरा इंटरनेट बंद करने की बजाय सरकारें खास वेबसाइट्स या प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करती हैं. इसके लिए DNS ब्लॉकिंग या IP ब्लॉकिंग का इस्तेमाल किया जाता है. जब कोई यूजर वेबसाइट खोलने की कोशिश करता है तो उसका रिक्वेस्ट ही सर्वर तक नहीं पहुंच पाता. सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स या न्यूज वेबसाइट्स को इसी तरीके से रोका जाता है.

    मोबाइल नेटवर्क बंद, लेकिन कॉल चालू क्यों रहती है?

    अक्सर देखा जाता है कि इंटरनेट तो बंद हो जाता है लेकिन कॉलिंग और SMS सेवाएं चालू रहती हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि मोबाइल नेटवर्क में वॉइस और डेटा अलग-अलग सिस्टम पर चलते हैं. सरकार जरूरत के हिसाब से सिर्फ डेटा सर्विस को बंद करने का निर्देश देती है ताकि अफवाहें और ऑनलाइन गतिविधियां रोकी जा सकें लेकिन जरूरी कॉलिंग बनी रहे.

    अंडरसी केबल और गेटवे कंट्रोल का रोल

    कुछ देशों में सरकारें अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट गेटवे को भी कंट्रोल करती हैं. अंडरसी इंटरनेट केबल्स और इंटरनेशनल गेटवे के जरिए ही देश को ग्लोबल इंटरनेट मिलता है. इन गेटवे पर कंट्रोल होने की वजह से सरकार चाहें तो बाहरी इंटरनेट एक्सेस पूरी तरह काट सकती हैं जिससे देश लगभग पूरी तरह ऑफलाइन हो जाता है.

    कानून और सुरक्षा के नाम पर इंटरनेट शटडाउन

    अधिकतर इंटरनेट बंदी कानून-व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा या आपात स्थिति के नाम पर की जाती है. दंगे, विरोध प्रदर्शन या संवेदनशील हालात में सरकारें मानती हैं कि इंटरनेट अफवाहों को फैलाने का बड़ा जरिया बन सकता है. इसलिए एहतियात के तौर पर कनेक्टिविटी रोक दी जाती है.

    आम लोगों पर क्या असर पड़ता है?

    इंटरनेट बंद होने से ऑनलाइन पेमेंट, ऑफिस वर्क, पढ़ाई और बिजनेस पर सीधा असर पड़ता है. डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों के दौर में इंटरनेट शटडाउन आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को ठप कर देता है.

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