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    डिजिटल फ्रॉड होने पर सबसे पहले क्या करें, 25000 तक मुआवजा देने की तैयारी में सरकार

    1 week ago

    Digital Fraud Compensation: आज के दौर में डिजिटल बैंकिंग तेजी से आम होती जा रही है. लोग मोबाइल ऐप, यूपीआई और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए मिनटों में पैसे ट्रांसफर कर रहे हैं. इससे लेनदेन आसान हुआ है. लेकिन इसके साथ डिजिटल फ्रॉड के मामले भी बढ़े हैं. कई बार लोगों के अकाउंट से बिना जानकारी के पैसे निकल जाते हैं या फर्जी कॉल और लिंक के जरिए ठगी हो जाती है. 

    ऐसे मामलों में सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि पीड़ित व्यक्ति क्या करे और क्या उसे पैसा वापस मिल सकता है. इसी बीच रिजर्व बैंक ने डिजिटल फ्रॉड से जुड़े मामलों में लोगों को राहत देने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है. इसके तहत छोटे अमाउंट के डिजिटल फ्रॉड में पीड़ित लोगों को मुआवजा देने की व्यवस्था की तैयारी की जा रही है. जान लीजिए कैसे मिलेगा मुआवजा.

    सबसे पहले जरूरी यह काम

    अगर किसी व्यक्ति के साथ डिजिटल फ्रॉड होता है तो सबसे जरूरी कदम है तुरंत शिकायत दर्ज करना. प्रस्तावित नियमों के अनुसार पीड़ित व्यक्ति को घटना के पांच दिनों के भीतर अपने बैंक और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल या साइबर हेल्पलाइन पर जानकारी देनी होगी. समय पर शिकायत करने पर ही मुआवजे की प्रोसेस शुरू हो सकेगी. आवेदन मिलने के बाद बैंक को पांच कैलेंडर दिनों के भीतर मुआवजे का भुगतान करना होगा. इसके बाद में बैंक इस राशि के लिए आरबीआई से रिइम्बर्समेंट का दावा कर सकता है. 

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    कितनी बार मिल सकता है मुआवजा?

    नए प्रस्ताव के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शन में फ्रॉड की वजह से नुकसान होता है. तो उसे नुकसान की राशि का 85 प्रतिशत तक मुआवजा मिल सकता है. हालांकि इसके लिए अधिकतम सीमा 25000 रुपये तय की गई है. यानी अगर नुकसान ज्यादा भी हो तब भी मुआवजा 25000 रुपये से ज्यादा नहीं होगा. यह सुविधा एक व्यक्ति को केवल एक बार ही दी जाएगी. अगर कोई व्यक्ति भविष्य में फिर से किसी डिजिटल फ्रॉड का शिकार होता है. तो उसे दोबारा इस स्कीम के तहत मुआवजा नहीं मिलेगा. 

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    आरबीआई ने जारी किया ड्राफ्ट प्रस्ताव

    डिजिटल फ्रॉड से जुड़े इस मुआवजा सिस्टम को लेकर आरबीआई ने 6 मार्च को एक ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी किया है. यह प्रस्ताव इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शन में ग्राहकों की जिम्मेदारी और सेफ्टी से जुड़े नियमों की रिव्यू का हिस्सा है. इससे पहले आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फरवरी में मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान इस दिशा में कदम उठाने की बात कही थी. 

    प्रस्ताव के मुताबिक यह नया फ्रेमवर्क 1 जुलाई 2026 या उसके बाद होने वाले डिजिटल ट्रांजेक्शंस पर लागू किया जा सकता है. फिलहाल इस ड्राफ्ट पर लोगों से सुझाव भी मांगे गए हैं. इच्छुक लोग 6 अप्रैल 2026 तक अपनी राय दे सकते हैं. जिसके बाद अंतिम नियम तय किए जाएंगे.

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