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     आप हमसे खरीदे सामान और रूबल में चुकाए कीमत... जानें भारत ने रूस से क्यों की ये डिमांड?

    2 weeks ago

    India and Russia: भारत ने रूस से अपील की है कि वह भारतीय सामानों जैसे कि इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स, इंजीनियरिंग गुड्स, खाने-पीने की चीजों और मछली उत्पादों पर ट्रेड बैरियर्स या व्यापारिक अड़चनों को दूर करें. इन सेक्टरों में भारत काफी मजबूत है और रूस में इनकी डिमांड भी काफी ज्यादा है. ऐसे में निर्यात बढ़ाना ही एकमात्र जरिया है. 

    भारत और रूस के बीच कारोबार तो बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन यह बैलेंस्ड नहीं है. भारतीय की तेल कंपनियों ने रूस से अधिक मात्रा में कच्चे तेल की खरीदारी की और इसकी कीमतें रूबल में अदा की गई. ऐसे में रूस के बैंक अकाउंट्स में 50-55 अरब डॉलर के रूबल जमा हो गए हैं. इनका इस्तेमाल पूरी तरीके से नहीं हो रहा है. भारत चाहता है कि रूस भारत से आयात बढ़ाए और सामानों के लिए कीमत रूबल में चुकाए. इससे दोनों के बीच कारोबार संतुलित रूप से होगा. 

    कहां आ रही परेशानी?

    टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय एक्सपोटर्स को रूसी बाजार तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में रूस के बनाए गए अपने सख्त नियमों के चलते एक्सपोटर्स को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें सॉफ्टवेयर का अनिवार्य रूप से लोकलाइजेशन और रूसी साइबर सुरक्षा नियमों का पालन शामिल है.

    रूस के अपने सख्त प्रोडक्ट स्टैंडर्ड और सर्टिफिकेशन प्रोसेस के चलते इंजीनियरिंग सामानों की शिपमेंट में भी देरी हो रही है. इसके अलावा, खाने के सामान, मछली पालन और कुछ मशीनरी कैटेगरी के लिए रूसी भाषा में डॉक्यूमेंटेशन का पालन करने से निर्यात और धीमा हो गया है.

    दोनों के बीच बढ़ता व्यापार घाटा

    यही वजह है कि रूस के साथ संतुलित रूप से व्यापार हो, रूसी बाजारों में भारतीय सामानों की पहुंच में आसानी हो, भारत ने रूस के सामने इस मुद्दे को उठाया है. भारत का रूस के साथ बड़ा ट्रेड डेफिसिट बना हुआ है. यानी कि जिस पैमाने पर आयात हुआ है, निर्यात उतना ज्यादा नहीं हो पाया है.

    चालू वित्त वर्ष के शुरुआती सात महीनों में ही भारत का व्यापार घाटा लगभग 25 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो ज्यादातर कच्चे तेल के इम्पोर्ट की वजह से है. इस बीच अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते कुछ भारतीय रिफाइनरों ने रूस से कच्चे तेल की खरीद कम कर दी है. इस बीच, कुछ सप्लायर भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए आगे आए, जिससे यह व्यापार घाटा कुछ कम हुआ है.

     

     

     

     

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