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    मेटाबॉलिज्म के लिए बेस्ट दवा हैं मसल्स, डॉक्टर से समझें क्यों जरूरी होती है स्ट्रेंथ ट्रेनिंग

    1 week ago

    बहुत से लोग समझते हैं कि मसल्स बनाना सिर्फ बॉडीबिल्डर्स या जिम जाने वालों के लिए जरूरी है, लेकिन सच्चाई यह है कि मजबूत मांसपेशियां हर उम्र के व्यक्ति के लिए सेहत की बुनियाद होती हैं. मसल्स सिर्फ शरीर को आकर्षक नहीं बनातीं, बल्कि यह हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म, ब्लड शुगर कंट्रोल, हड्डियों की मजबूती और बढ़ती उम्र में सक्रिय रहने की क्षमता से भी सीधे जुड़ी होती हैं.

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप लंबे समय तक स्वस्थ, एक्टिव और आत्मनिर्भर रहना चाहते हैं, तो स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है. AIIMS, Harvard University और Stanford University से प्रशिक्षित गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट Dr. Saurabh Sethi के अनुसार, मांसपेशियां मेटाबॉलिज्म के लिए दवा की तरह काम करती हैं, लेकिन लोग इसकी असली ताकत को समझ नहीं पाते, तो आइए डॉक्टर से समझें क्यों स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जरूरी होती है.  

    क्यों स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जरूरी होती है

    1. बेहतर इंसुलिन सेंसिटिविटी और ब्लड शुगर कंट्रोल -  हम जो भी खाना खाते हैं, वह शरीर में जाकर ग्लूकोज (शुगर) में बदलता है. इस ग्लूकोज को एनर्जी में बदलने के लिए इंसुलिन हार्मोन काम करता है. मांसपेशियां शरीर में ग्लूकोज को स्टोर करने का सबसे बड़ा स्थान होती हैं. जब शरीर में पर्याप्त मसल्स होती हैं, तो वे अतिरिक्त शुगर को अपने अंदर जमा कर लेती हैं. इससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा कम होता है. ज्यादा मसल्स का मतलब बेहतर इंसुलिन संवेदनशीलता और स्वस्थ मेटाबॉलिज्म है. 

    2. ग्लूकोज स्टोर करने की क्षमता - अनुमान के अनुसार, शरीर की मांसपेशियां लगभग 400 ग्राम तक ग्लूकोज स्टोर कर सकती हैं. अगर मसल्स कम हों, तो यह अतिरिक्त शुगर शरीर में जमा होकर समस्या पैदा कर सकती है. इसलिए जिन लोगों की मसल्स अच्छी होती हैं, उनका ब्लड शुगर ज्यादा स्थिर रहता है. 

    3. बढ़ती उम्र में सहारा - उम्र बढ़ने के साथ शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं. इसे सामान्य उम्र बढ़ने की प्रक्रिया माना जाता है. लेकिन अगर समय रहते स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की जाए, तो इस गिरावट को रोका जा सकता है. मजबूत मांसपेशियां चलने-फिरने में मदद करती हैं, संतुलन बनाए रखती हैं, गिरने और चोट लगने का खतरा कम करती हैं, जोड़ों पर दबाव कम करती हैं, इससे व्यक्ति ज्यादा समय तक आत्मनिर्भर और सक्रिय रह सकता है. 

    4. हड्डियों को बनाती हैं मजबूत - जब आप वेट उठाते हैं या रेजिस्टेंस एक्सरसाइज करते हैं, तो मांसपेशियां हड्डियों पर खिंचाव डालती हैं. यह खिंचाव हड्डियों को मजबूत बनने का संकेत देता है. नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग हड्डियों का डेंसिटी बढ़ाती है, ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कम करती है और फ्रैक्चर की संभावना घटाती है. 

    5.  ज्यादा कैलोरी बर्न - फैट शरीर में एनर्जी जमा करती है, जबकि मांसपेशियां एनर्जी का यूज करती हैं. मसल्स आराम की स्थिति में भी कैलोरी जलाती रहती हैं यानी अगर आपके शरीर में मसल्स ज्यादा हैं, तो आप बिना कुछ किए भी ज्यादा कैलोरी बर्न करते हैं.  इससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है, वजन कंट्रोल में रहता है और फैट बढ़ने की संभावना कम होती है. 

    मांसपेशियां बढ़ाने के आसान तरीके

    1. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को बनाएं आदत - स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का मतलब सिर्फ भारी वजन उठाना नहीं है. आप डंबल, मशीन, रेजिस्टेंस बैंड या अपने शरीर के वजन से भी एक्सरसाइज कर सकते हैं. जब आप वेट ट्रेनिंग करते हैं, तो मांसपेशियों में हल्की सूक्ष्म टूट-फूट होती है. शरीर इनको रिपेयर करता है और उन्हें पहले से ज्यादा मजबूत बनाता है. इसी प्रक्रिया से मसल्स का आकार बढ़ता है. सप्ताह में कम से कम 3–4 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना फायदेमंद है. 

    2. सही मात्रा में प्रोटीन लें - मांसपेशियों की मरम्मत और वृद्धि के लिए प्रोटीन जरूरी है. आमतौर पर सलाह दी जाती है कि हर व्यक्ति अपने वजन के प्रति किलोग्राम पर 1.6 से 2.2 ग्राम प्रोटीन ले. अच्छे प्रोटीन स्रोत अंडे, दालें, पनीर और दूध, चिकन और मछली, सोया उत्पाद हैं.

    3. कैलोरी थोड़ा ज्यादा लें - अगर आप मसल्स बढ़ाना चाहते हैं, तो आपको जितनी कैलोरी खर्च होती है उससे थोड़ी ज्यादा कैलोरी लेनी होगी. लेकिन ध्यान रखें जंक फूड नहीं, बल्कि पोषक तत्वों से भरपूर डाइट चुनें. 

    4. पर्याप्त नींद और आराम - मांसपेशियां जिम में नहीं, बल्कि आराम के समय बढ़ती हैं. रोज 7–9 घंटे की नींद लें और एक ही मांसपेशी समूह को दोबारा ट्रेन करने से पहले 48–72 घंटे का आराम दें. 

    ये भी पढ़ें -  2050 तक चार में से एक शख्स के कान में होंगी दिक्कतें, डरा देगी WHO की यह रिपोर्ट

    Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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