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    मर्दानी 3 में विलेन बनीं अम्मा बोलीं:रानी मुखर्जी नहीं, शिवानी रॉय सामने थीं, एक्ट्रेस की एक बात दिल में रह गई

    4 days ago

    फिल्म मर्दानी 3 में ‘अम्मा’ के किरदार ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया है। इस किरदार को निभाने वाली अभिनेत्री मल्लिका प्रसाद सिन्हा ने अपनी दमदार अदाकारी से एक ऐसी विलेन रची, जिससे नफरत भी होती है और सोचने पर मजबूर भी होना पड़ता है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में मल्लिका ने अपने किरदार की तैयारी, मानसिक प्रक्रिया, रानी मुखर्जी के साथ अनुभव और अपने अभिनय सफर पर खुलकर बात की। मर्दानी 3 में आपका किरदार बेहद डार्क और लार्जर दैन लाइफ है। जब पहली बार स्क्रिप्ट आपके पास आई, तो क्या प्रतिक्रिया थी? असल में जब कोई एक्टर स्क्रिप्ट पढ़ता है, तो सबसे पहले वह उस किरदार का ग्राफ देखता है। उसकी अंदरूनी दुनिया, उसका आर्क और उसकी सोच। मुझे हमेशा ऐसे किरदार आकर्षित करते हैं जो बिल्कुल सही या बिल्कुल गलत नहीं होते, बल्कि राइट और रॉन्ग की सीमा पर खड़े होते हैं। ‘अम्मा’ एक मेगा विलेन है, लेकिन उसके अपने विश्वास हैं, उसकी अपनी स्पिरिट है। ऐसे कॉम्प्लेक्स किरदार को निभाना एक बेहद रोमांचक प्रक्रिया होती है। मल्लिका से ‘अम्मा’ बनने के इस ट्रांजिशन में कितना वक्त लगा और क्या चुनौतियां रहीं? यह प्रक्रिया कभी भी अकेले नहीं होती। यह हमेशा कोलैबोरेशन में होती है डायरेक्टर, कॉस्ट्यूम, हेयर, मेकअप टीम सब मिलकर किरदार को आकार देते हैं। हमने बहुत समय लुक टेस्ट में लगाया ज्वेलरी से लेकर हाथ पैर तक हर चीज पर बारीकी से काम हुआ। यह सब बहुत प्रेम और संवेदनशीलता के साथ बनाया गया किरदार है। मेरा काम किरदार का बिहेवियर और उसकी ह्यूमैनिटी लाना है, लेकिन जो कुछ भी आप स्क्रीन पर देखते हैं, वह सबकी मेहनत का नतीजा है। दर्शकों को आपके किरदार से नफरत हो गई है। जब आपने खुद को बड़े पर्दे पर देखा, तो कैसा महसूस हुआ? एक्टर के तौर पर हम किसी किरदार से नफरत नहीं कर पाते, क्योंकि हमें उसकी ह्यूमैनिटी दिख जाती है। हां, काम पूरा होने के बाद हम थोड़ा अलग हो जाते हैं और दर्शकों की प्रतिक्रिया देखने में मजा आता है। तब यह जानना दिलचस्प होता है कि लोगों ने उसे कैसे लिया। कुछ सीन इतने डरावने हैं कि कोई उस माहौल में रहना नहीं चाहेगा। क्या उस किरदार से बाहर निकलना मुश्किल था? नहीं, ऐसा होना भी नहीं चाहिए। यह हमारा प्रोफेशन है। हमारा काम ऐसा माहौल रचना है कि दर्शक उसे महसूस करें, लेकिन अगर हम खुद उसमें डूब जाएं तो वह खतरनाक हो सकता है। दुनिया में वैसे ही बहुत दर्द और तनाव है युद्ध, भूख, बच्चों की पीड़ा। वही असली तनाव की वजह है। किरदार को निभाना एक क्राफ्ट है, और उसी तरह उससे बाहर निकलना भी। मर्दानी फ्रेंचाइजी के विलेन में आपका फेवरेट कौन है पहले पार्ट के ताहिर या दूसरे के विशाल जेठवा? यह बहुत अनफेयर सवाल है। दोनों ही शानदार अभिनेता हैं। हर एक्टर अपने किरदार में अपनी यूनिकनेस लाता है। मैं खुद एक्टर्स को पढ़ाती हूं और उनसे बहुत मोहब्बत करती हूं। रानी मुखर्जी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? हमारे आमने-सामने के सीन बहुत कम थे, इसलिए ज्यादातर काम अलग-अलग ही हुआ। मेरे जहन में हमेशा शिवानी रॉय का किरदार ही सामने रहता था, इसलिए ऑन-स्क्रीन कई रिएक्शन मेरे लिए भी सरप्राइज रहे, जो फिल्म में बेहद खूबसूरती से काम कर गए। शूट की शुरुआत में रानी जी ने मुझे बहुत वॉर्म वेलकम किया और मुस्कुराते हुए कहा, ‘एवरीबडी लव्स यू ऑलरेडी।’ इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि ‘हमारी आंखों का रंग भी एक जैसा है।’ वह पल मेरे लिए वाकई बहुत खास था। क्या आपको डर है कि कहीं यह विलेन वाला रोल आपको टाइपकास्ट न कर दे? नहीं। एक्टर के पास हमेशा चॉइस होती है। मैं अलग-अलग भाषाओं में काम करती हूं और विविध किरदार निभा चुकी हूं। हां, यह खुशी जरूर है कि इस किरदार को इतना ऑर्गेनिक एक्सेप्टेंस और प्यार मिला है। अपने अब तक के सफर को कैसे देखती हैं? मजा आया है… और अभी भी मजा आ रहा है। मेरा परिवार हमेशा बहुत सपोर्टिव रहा है। मेरे पिता ने मुझे एनएसडी के फॉर्म के बारे में बताया, मेरे जीजाजी इंटरव्यू के दिनों में बाहर इंतजार करते रहे। यह जर्नी वाकई बेहद खूबसूरत रही है और मैं कुछ भी बदलना नहीं चाहूंगी। आगे आने वाले समय और अपने भविष्य के सपनों को आप किस तरह देखती हैं? सपने तो रोज देखती हूं। सपने देखने के पैसे नहीं लगते। हर कोई क्रिएटिवली ग्रो करना चाहता है, चैलेंज चाहता है और एक सम्मानजनक माहौल चाहता है। बस वही चाह है। सिनेमा को लेकर आप कौन-सा ऐसा बदलाव देखना चाहेंगी, जो आपको सबसे ज्यादा जरूरी लगता है? सबसे पहले यह पूछना बंद होना चाहिए कि ‘औरतें कहां हैं?’ यह सवाल ही गलत है। हम हर जगह हैं। नए और युवा स्टोरीटेलर्स को सपोर्ट करना चाहिए, भले ही उनकी कहानियां थोड़ी अनकम्फर्टेबल क्यों न हों। रिस्क लेने से ही सिनेमा का इकोसिस्टम आगे बढ़ता है। दर्शकों के लिए मर्दानी 3 को लेकर आप क्या संदेश देना चाहेंगी? यह फिल्म कुछ बहुत जरूरी सवाल उठाती है। इसे सिर्फ एंटरटेनमेंट की तरह नहीं, बल्कि आत्ममंथन की तरह देखें। सोचिए कि समाज के तौर पर हमने कहां चूक की है। फिल्म भारी जरूर है, लेकिन मैं वादा करती हूं आपको मजा भी आएगा और सोचने पर भी मजबूर करेगी।
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