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    Budget Session 2026: प्रियंका चतुर्वेदी ने संसद में जल संकट को लेकर सरकार से पूछा सवाल, जानें सरकार ने क्या दिया जवाब

    2 days ago

    संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोमवार (9 फरवरी, 2026) को भारत के जल संकट को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया. उन्होंने पूछा कि क्या सरकार इस तथ्य को स्वीकार करती है कि सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता के मामले में भारत 122 देशों में 120वें स्थान पर है, जबकि सरकारी एजेंसियों की ओर से भू-जल में यूरेनियम प्रदूषण, सीवेज की मिलावट और विषैली वर्षा (टॉक्सिक रेन) की ओर भी संकेत किया गया है.

    इसके साथ ही, उन्होंने सवाल किया कि नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की उस ऑडिट रिपोर्ट का विवरण क्या है, जिसमें दिल्ली में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर अनुमन्य सीमा से अधिक प्रदूषण के जोखिम की बात कही गई है? क्या यह संकट जल की वास्तविक कमी का परिणाम है अथवा कुप्रबंधन का, जबकि भारत को प्रतिवर्ष लगभग 4,000 अरब घन मीटर वर्षा प्राप्त होती है, फिर भी जल की कमी बनी रहती है.

    इसके अलावा, शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने सदन में पूछा कि यूरेनियम प्रदूषण, सीवेज के पृथक्करण, पाइपलाइनों के प्रतिस्थापन और विषैले अपशिष्ट के निस्तारण से निपटने के लिए क्या ठोस उपाय किए जा रहे हैं? और सुरक्षित पाइपयुक्त पेयजल उपलब्ध कराने की समय-सीमा क्या है अथवा क्या नागरिकों को स्थायी रूप से महंगे जल शोधन उपायों पर निर्भर रहना पड़ेगा?

    प्रियंका चतुर्वेदी के सवाल का केंद्र सरकार ने दिया जवाब

    शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी के सदन में पूछे गए सवाल का केंद्र सरकार की ओर से जल शक्ति मंत्रालय के राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने जवाब दिया. उन्होंने कहा कि देशों की जल गुणवत्ता को लेकर कोई सर्वमान्य वैश्विक रैंकिंग उपलब्ध नहीं है. जल जीवन मिशन (JJM) – हर घर जल, अगस्त 2019 में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के सहयोग से प्रारंभ किया गया था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को पर्याप्त मात्रा में, निर्धारित गुणवत्ता का, नियमित और दीर्घकालिक आधार पर नल से पेयजल उपलब्ध कराना है.

    उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत, वर्तमान दिशा-निर्देशों के अनुसार, पाइप्ड जलापूर्ति योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS): 10500 को मानक के रूप में अपनाया गया है. चूंकि पेयजल एक राज्य विषय है, इसलिए जलापूर्ति योजनाओं की योजना, अभिकल्पना, स्वीकृति, क्रियान्वयन, संचालन और अनुरक्षण की जिम्मेदारी संबंधित राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों की है. भारत सरकार राज्यों के प्रयासों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान कर सहयोग करती है.

    अब तक देश के 15.79 करोड़ से ज्यादा घरों में लग चुके नल जल कनेक्शन

    JJM-IMIS की रिपोर्ट के मुताबिक, जल जीवन मिशन के शुभारंभ (अगस्त 2019) के समय सिर्फ 3.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों के पास नल जल का कनेक्शन था. अब तक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 12.56 करोड़ से अधिक अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को जल जीवन मिशन के तहत नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है. इस प्रकार, 5 फरवरी, 2026 तक देश के कुल 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 15.79 करोड़ से अधिक परिवारों के घरों में नल जल कनेक्शन उपलब्ध होने की सूचना है.

    बजट भाषण में वित्त मंत्री ने जल जीवन मिशन के लिए की है घोषणा

    केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री ने कहा कि मिशन के निरंतर क्रियान्वयन के माध्यम से 100 प्रतिशत कवरेज प्राप्त करने, अवसंरचना की गुणवत्ता और ग्रामीण पाइप्ड जलापूर्ति योजनाओं के संचालन और अनुरक्षण पर विशेष ध्यान देते हुए दीर्घकालिक स्थिरता और नागरिक-केंद्रित जल सेवा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वित्त मंत्री ने बजट भाषण 2025-26 में जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक विस्तारित करने और इसके लिए कुल परिव्यय बढ़ाने की घोषणा की है.

    उन्होंने कहा कि भूजल गुणवत्ता के आकलन के लिए केंद्रीय भू-जल बोर्ड (CGWB) की ओर से स्वीकृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार, भूजल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम और वैज्ञानिक अध्ययनों के माध्यम से देशभर में क्षेत्रीय स्तर पर आंकड़े संकलित किए जाते हैं. हाल ही में वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट-2025 CGWB की ओर से जारी की गई है.

    CPCB देश के 4,922 स्थानों पर जल गुणवत्ता की करता है निगरानी- सोमन्ना

    केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने 13 अक्टूबर, 2017 को अधिसूचना G.S.R. 1265(E) के माध्यम से सीवेज उपचार संयंत्रों (STPs) से नदियों में छोड़े जाने वाले अपशिष्ट के लिए मानक निर्धारित किए हैं, जिन्हें राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की ओर से लागू किया जाता है. वर्तमान में CPCB, राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम (NWMP) के अंतर्गत, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों/प्रदूषण नियंत्रण समितियों के सहयोग से देशभर में 4,922 स्थानों पर जल गुणवत्ता की निगरानी करता है, जिनमें नदियां, झीलें, तालाब, टैंक, भू-जल और अन्य जल निकाय शामिल हैं.

    उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को स्रोत पुनर्भरण के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है, जैसे समर्पित बोरवेल रिचार्ज संरचनाएं, वर्षा जल संचयन, मौजूदा जल निकायों का पुनर्जीवन, ग्रे-वॉटर का पुनः उपयोग आदि. यह कार्य एकीकृत जलग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम (IWMP), 15वें वित्त आयोग के अनुदान, राज्य योजनाओं, CSR निधि और ग्रामीण विकास मंत्रालय की अन्य योजनाओं के साथ अभिसरण में किया जा रहा है. इसके अलावा, जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (JSA: CTR) को 2021 में पूरे देश में विस्तारित किया गया, जिसका उद्देश्य जहां गिरे, जब गिरे, वहीं वर्षा जल का संचयन है. इस अभियान के अंतर्गत पांच प्रमुख हस्तक्षेप किए गए हैं, इनमें-

    • जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन
    • सभी जल निकायों की गणना, जियो-टैगिंग एवं वैज्ञानिक योजनाओं का निर्माण
    • सभी जिलों में जल शक्ति केंद्रों की स्थापना
    • व्यापक वृक्षारोपण
    • जन-जागरूकता का प्रसार शामिल हैं.

    उन्होंने कहा कि इस अभियान का छठा संस्करण 22 मार्च, 2025 को जल संचय, जन भागीदारी: जन जागरूकता की ओर विषय के साथ प्रारंभ किया गया.

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