Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    dailyadda
    dailyadda

    'ये आदेश धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ', वंदे मातरम को लेकर गृह मंत्रालय के सर्कुलर पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद का रिएक्शन

    2 days ago

    जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से वंदे मातरम को लेकर जारी सर्कुलर को चिंताजनक बताया है. साथ ही यह भी कहा कि यह कदम भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत मिली धार्मिक स्वतंत्रता को खत्म करने वाला है.

    उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने, उसका प्रचार करने और अपनी मान्यताओं के अनुसार जीवन बिताने का जरूरी अधिकार दिया गया है. इसलिए, किसी को उसकी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ कोई खास कविता या छंद का पाठ करने के लिए मजबूर करना संविधान के खिलाफ है.

    उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ के मूलपाठ में, विशेष रूप से चौथे और पांचवें छंद में, मूर्ति वंदना और कुछ हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र है. चूंकि इस्लामी आस्था, तौहीद (एकेश्वरवाद) के मद्देनजर मुसलमान अल्लाह के अलावा किसी और की पूजा या इबादत नहीं कर सकता, न ही वह उसकी इबादत व्यक्त कर सकता है.

    उलेमा-ए-हिंद इस कविता के लायक नहीं: मौलाना कासमी

    हालांकि मौलाना कासमी ने आगे कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद इस कविता के खिलाफ नहीं है. अगर बहुसंख्यक धर्म के लोग इसका पाठ करना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसा करने का अधिकार है. हम उनके रास्ते में नहीं आते, लेकिन इसे सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य बना देना या स्कूलों में बच्चों को इसे पढ़ने के लिए बाध्य करना या मजबूर करना, धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक लगाने जैसा होगा. भारत एक बहुलतावादी और विभिन्न धर्मों वाला देश है जहां संविधान की सर्वोच्चता और ‘अनेकता में एकता’ का सिद्धांत ही राष्ट्रीय एकता का आधार है. इस नींव को कमजोर करने वाला कोई भी प्रयास देशहित में नहीं हो सकता है.

    मौलाना कासमी ने आगे कहा कि भारत के मुसलमानों की यह एकमत है कि धार्मिक आजादी के खिलाफ किसी भी फैसले को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा. हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि वह संवैधानिक जरूरतों, न्यायिक मिसालों और देश के अलग-अलग सामाजिक ढांचे को ध्यान में रखते हुए, इस सर्कुलर की तत्काल समीक्षा करे, ताकि देश में धार्मिक स्वतंत्रता, संवैधानिक गरिमा और सामाजिक सौहार्द बना रहे. जहां तक देश-प्रेम की बात है, तो यह हमारी धार्मिक आवश्यकता है, हम देश से हमेशा प्यार करते हैं और करते रहेंगे, लेकिन कोई ऐसा शब्द स्वीकार्य नहीं है जो पूजा की कैटेगरी में आता है, जिसका अधिकार हमें हमारे देश के संविधान ने दिया है और जिसके आधार पर यह देश शीशा पिलाई दीवार की तरह एकजुट है.

    Click here to Read More
    Previous Article
    114 राफेल, 400 SCALP मिसाइलें और छह P-8I एयरक्राफ्ट... भारत की डिफेंस डील देख हिल जाएंगे चीन-पाकिस्तान
    Next Article
    सोना खरीदने में टॉप पर ये देश, लिस्ट में ही नहीं पाकिस्तान, जानिए भारत कहां?

    Related इंडिया Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment