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    वित्त मंत्री निर्मला ने पेश किया आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26, GDP 6.8% से 7.2% रहने का अनुमान

    3 days ago

    Economic Survey 2025-26: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से गुरुवार को संसद के पटल पर पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में अनुमान जताया गया है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है. यह देश की मजबूत आर्थिक नींव और स्थिर विकास की ओर संकेत करता है. आर्थिक सर्वेक्षण में हाल के वर्षों में किए गए नीतिगत सुधारों के प्रभाव को भी शामिल किया गया है.

    इसके अनुसार, इन सुधारों के कारण देश की अर्थव्यवस्था की मध्यम अवधि की वृद्धि क्षमता लगभग 7 प्रतिशत तक पहुंच गई है. सर्वेक्षण में कहा गया है कि घरेलू कारकों की अहम भूमिका और मजबूत होती वृहद आर्थिक स्थिरता के चलते आर्थिक वृद्धि से जुड़े जोखिम फिलहाल संतुलित बने हुए हैं.

    1 फरवरी को पेश होने वाले बजट 2026-27 से कुछ दिन पहले संसद में आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया गया. संसद में रखे गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में पिछले एक वर्ष के दौरान सरकार के कामकाज, देश की आर्थिक स्थिति, विकास की गति और सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों का विस्तृत आकलन किया गया है.

    बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण का महत्व

    यह आर्थिक सर्वेक्षण ऐसे समय पेश किया गया है, जब केंद्र सरकार जल्द ही केंद्रीय बजट प्रस्तुत करने वाली है. इसमें अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं की झलक मिलती है. वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह सर्वे न केवल मौजूदा आर्थिक हालात का आकलन करता है, बल्कि भविष्य की नीतियों और सूक्ष्म आर्थिक प्रबंधन की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

    सर्वेक्षण में कहा गया है कि सप्लाई की स्थिति में सुधार और जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने के प्रभाव के कारण आने वाले समय में महंगाई के नियंत्रण में रहने की संभावना है. सरकार का मानना है कि इससे कीमतों पर दबाव सीमित रहेगा और उपभोक्ताओं को राहत मिलती रहेगी.

    आर्थिक सर्वेक्षण में इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर जोर

    आर्थिक सर्वेक्षण में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की तेज़ प्रगति को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है. वित्त वर्ष 2022 में यह भारत की सातवीं सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी थी, लेकिन वित्त वर्ष 2025 तक यह तीसरी सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ने वाली निर्यात श्रेणी बन गई है. वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात बढ़कर 22.2 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया है, जिससे यह सेक्टर जल्द ही भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बन सकता है.

    रिपोर्ट के अनुसार, इस वृद्धि की मुख्य वजह घरेलू उत्पादन और निर्यात में तेज़ इजाफा है, जिसमें मोबाइल फोन निर्माण की अहम भूमिका रही है. वित्त वर्ष 2015 में मोबाइल फोन का उत्पादन मूल्य लगभग 18,000 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025 तक बढ़कर 5.45 लाख करोड़ रुपये हो गया है. यह लगभग 30 गुना वृद्धि भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और ‘मेक इन इंडिया’ पहल की सफलता को दर्शाती है.

    ये भी पढ़ें: आर्थिक सर्वेक्षण से पहले रुपया टूटकर अब तक के सबसे निचले स्तर 92 पर पहुंचा रुपया, इस साल 2% की गिरावट

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