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    वेनेजुएला पर कार्रवाई के बाद भारत ने क्यों नहीं की अमेरिका की निंदा? जानें इसके पीछे क्या है कारण

    1 week ago

    वेनेजुएला पर अमेरिका के हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से जहां पूरी दुनिया हैरान है और दुनिया के कई देशों ने अमेरिका के इस कदम को आलोचना की है, वहीं, भारत ने एक बेहद संयमित और सतर्क बयान दिया है. भारत का यह रुख दुनिया के अन्य देशों की तुलना में बिल्कुल विपरीत नजर आ रहा है. 

    दरअसल, भारत ने महज पांच वाक्यों में इस मामले को लेकर एक संक्षिप्त बयान दिया, हालांकि, इस बयान में भी न तो अमेरिका का नाम लिया गया और न ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का. यहां तक कि भारत ने अमेरिका के इस सैन्य कार्रवाई की निंदा भी नहीं की. इसके बावजूद, इस प्रतिक्रिया ने अमेरिका के एक अप्रत्याशित राष्ट्रपति से निपटते समय भारत की कूटनीतिक मजबूरियों को साफ उजागर कर दिया है.

    भारत ने मामले पर क्या दी प्रतिक्रिया?

    अमेरिका के गुप्त ऑपरेशन पूरा होने के 24 घंटे से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भारत ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें भारत की ओर से गहरी चिंता जताई गई. भारत ने अपनी प्रतिक्रिया देते ने न तो संप्रभुता और न ही क्षेत्रीय अखंडता का जिक्र किया, जिनका भारत पारंपरिक रूप से समर्थन करता रहा है और जिसका जिक्र भारत अपने सीमा विवादों में भी अक्सर करता है.

    भारत के विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर बयान जारी कर कहा, ‘वेनेजुएला में हाल ही में हुई घटना बेहद चिंता का विषय है. हम बदलती स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए हैं. भारत वेनेजुएला की जनता की सुरक्षा और कल्याण के समर्थन की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है.’

    भारत ने वेनेजुएला पर क्यों दी इतनी संयमित प्रतिक्रिया?

    वेनेजुएल को लेकर भारत का रुख काफी हद तक वैसा ही रहा जैसा 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान था. जिसमें किसी एक पक्ष के समर्थन या विरोध से बचते हुए संतुलन बनाए रखा गया था. दरअसल, वेनेज़ुएला मामले पर भारत की इस प्रतिक्रिया को ऐसे समय में अमेरिका को नाराज न करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जब भारत-अमेरिका संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं. भारत पहले ही 50% टैरिफ का सामना कर रहा है और बीते महीनों की बातचीत के बावजूद दोनों देशों के बीच अब तक कोई द्विपक्षीय व्यापार समझौता नहीं हो पाया है.

    न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए वेनेज़ुएला में भारत के पूर्व राजदूत वाईके सिन्हा ने कहा, ‘भारत की प्रतिक्रिया बेहद संतुलित है और इस स्तर पर वह किसी पर दोषारोपण नहीं करना चाहता. हमें अमेरिका और अन्य देशों के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को भी ध्यान में रखना होता है. यूरोपीय देशों ने भी लगभग यही रुख अपनाया है.’

    यह भी पढ़ेंः भारत से पानी की भीख मांगेगा पाकिस्तान! चिनाब नदी पर 4 बड़े प्रोजेक्ट्स तेज किए, क्या है नया दांव?

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