आखिरकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला पर पूरा कब्जा कर ही लिया. वेनेजुएला के राष्ट्रपति रहे निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को अमेरिकी सेना ने उनके घर से उठा लिया और अब वह अमेरिका के न्यूयॉर्क की ब्रकूलिन की उस जेल में बंद हैं, जिसे धरती का नर्क कहा जाता है. वेनेजुएला की सत्ता अब अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के हाथ में है, जिन्हें ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर डेल्सी ट्रंप की बात नहीं मानती हैं तो उनका हश्र और भी बुरा होगा,लेकिन सवाल है कि आगे क्या.
वेनेजुएला पर कब्जे के बाद ट्रंप के निशाने पर अगला देश कौन है. क्या मेक अमेरिका ग्रेट अगेन बनाने में जुटे ट्रंप और भी किसी देश पर ऐसा ही हमला करने वाले हैं. आखिर ट्रंप की हिट लिस्ट में वो कौन-कौन से देश हैं, जहां वो अपना कब्जा चाहते हैं और आखिर कैसे ट्रंप की ये पूरी प्लानिंग अमेरिका को उस दौर में लेकर जाना चाहती है, जहां दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अमेरिकी सत्ता को चुनौती देने वाला कोई बचा नहीं था, आज बात करेंगे विस्तार से.
अभी तक अमेरिका हर उस देश में दखल देने की कोशिश करता रहा है, जहां या तो उसका खुद का फायदा हो या फिर उसके सहयोगी देशों का. और कभी-कभी तो अमेरिका अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए भी दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में दखल देता रहा है, जिसके लिए कभी वो मानवता का बहाना बनाता आया है तो कभी विचारधारा का और कभी राष्ट्रीय सुरक्षा का. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद कोरिया से लेकर क्यूबा तक, वियतनाम से लेकर ग्वाटेमाला, डोमिनिकन रिपब्लिक, अफगानिस्तान, ईरान, इराक, सोमालिया, लिबिया, सीरिया, यमन और अब वेनेजुएला तक में अमेरिकी सेनाएं घुसी हैं और अपने राष्ट्रपति की जिद को पूरा किया है. लेकिन अब अमेरिका बदल रहा है, दुनिया को लेकर उसकी नजर बदल रही है और अब वो दुनिया भर में फैले अपने रायते समेटकर सिर्फ अमेरिका पर ही फोकस करना चाहता है. और लौटना चाहता है उस सिद्धांत पर, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति जेम्स मुनरो ने 2 दिसंबर 1823 को पेश किया था.
तब जेम्स मुनरो ने अपने भाषण में कहा था कि यूरोपीय शक्तियों को Western Hemisphere यानी उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में नया हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. अगर कोई भी यूरोपीय देश अमेरिका महाद्वीप के स्वतंत्र देशों के मामलों में दखल देता है या उनपर कब्जा करने की कोशिश करता है तो ये अमेरिका के खिलाफ होगा. इस दौरान जेम्स मुनरो ने ये भी कहा कि अमेरिका यूरोप के अंदरूनी मामलों और जंगों में दखल नहीं देगा. अमेरिकी राष्ट्रपति के इस भाषण को कहा गया मुनरो सिद्धांत या मुनरो डॉक्टरीन. लेकिन बाद के अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने इस सिद्धांत को नजरंदाज करते हुए दुनिया के कई अलग-अलग देशों से जंग की. कभी जीते तो कभी भयंकर नुकसान भी उठाया. लेकिन अब ट्रंप फिर से मुनरो डॉक्टरीन पर लौटने की बात कर रहे हैं और अमेरिकी दखल को दुनिया से समेटकर वेस्टर्न हेम्पशायर तक ही रखने की बात कर रहे हैं.
इसके लिए नवंबर 2025 में अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सिग्नेचर वाली 33 पन्नों की अपनी नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटजी जारी की है, जिसमें अमेरिका के भविष्य की पूरी प्लानिंग को विस्तार से बताया गया है. इसमें सबसे बड़ा बदलाव अमेरिका की विदेश नीति को लेकर है. ट्रंप लिखते हैं-
'दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अमेरिकी विदेश नीति के विशेषज्ञ चाहते थे कि पूरी दुनिया पर सिर्फ अमेरिका का ही प्रभुत्व हो, लेकिन अब हम दूसरे देशों में तभी दखल देंगे, जब उन देशों की वजह से अमेरिका पर सीधे प्रभाव पड़ रहा हो और वो देश सीधे तौर पर अमेरिका के लिए खतरा हों.'
अपनी बदली हुई विदेश नीति के बाद ट्रंप का पूरा का पूरा फोकस सिर्फ और सिर्फ अमेरिका पर ही है. लेकिन जब पूरी दुनिया में अशांति है, रूस और यूक्रेन के बीच जंग चल रही है, मध्य-पूर्व एशिया में हमेशा तनाव का माहौल है और चीन एक नई ताकत के तौर पर लगातार बड़ा होता जा रहा है, ऐसे में क्या ट्रंप सिर्फ अमेरिका पर फोकस करके, अमेरिका की संप्रभुता की सुरक्षा करके और अमेरिका को आर्थिक तौर पर और समृद्ध करके दुनिया में शांति स्थापित कर सकते हैं. ट्रंप ने अपने दस्तावेज में इसका भी सिलसिलेवार ढंग से जवाब दिया है. लेकिन उससे पहले आपको ये बता देते हैं कि ट्रंप अमेरिका के लिए अब चाहते क्या हैं. तो ट्रंप चाहते हैं-
- अमेरिका की संप्रभुता, उसकी सीमाएं, उसकी अर्थव्यवस्था और उसकी सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा हो सके.
- अमेरिकी सीमाओं पर अमेरिकी सेना का पूरी तरह से नियंत्रण हो और विस्थापन को रोका जा सके.
- अमेरिकी सेना को दुनिया की सबसे ताकतवर सेना बनाया जाए, क्योंकि एक शक्तिशाली सेना और अर्थव्यवस्था ही युद्धों को रोकने और शांति बनाए रखने का सबसे अच्छा तरीका है. इसके लिए अमेरिका अपनी सेना को आधुनिक बनाने के लिए 1 ट्रिलियन डॉलर का निवेश करेगा.
- परमाणु शक्ति से संपन्न अमेरिका को कोई भी न्यूक्लियर हथियारों के बल पर धमका न पाए. अमेरिका का लक्ष्य दुनिया की सबसे उन्नत परमाणु निवारक शक्ति विकसित करना है.
- अमेरिका के उद्योग धंधों और उसके एनर्जी बेस को पुनर्स्थापित किया जाए.
- अपने आर्थिक प्रभुत्व और इनोवेशन को बरकरार रखने में अमेरिका आत्मनिर्भर बने.
- अमेरिका का सांस्कृतिक पुनरुद्धार हो, जिससे अमेरिकी अपनी महान विरासत पर गर्व करें और उसे बढ़ावा दें.
अब ये सब तो ट्रंप अपने मुल्क के लिए चाहते हैं. लेकिन विदेश में दखल दिए बिना न तो अमेरिका का मन मानता है और न ही ट्रंप का. तो ट्रंप के पास इसका भी प्लान है. ट्रंप चाहते हैं.
- पश्चिमी गोलार्द्ध में अमेरिका के अलावा कोई दूसरी विदेशी ताकत सर न उठा पाए.
- हिंद और प्रशांत महासागर के इलाके में निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित हो और चीन को इलाके में प्रभुत्व स्थापित करने से रोका जाए.
- यूरोप की स्वतंत्रता का समर्थन
- मध्य पूर्व एशिया में बिना जंग किए शांति स्थापित हो, जिसके लिए बातचीत पर जोर दिया जाए.
- नए जमाने की आधुनिक तकनीक जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग में अमेरिका की बादशाहत
और ये सब होगा कैसे, ट्रंप ने उसको भी बताया है.
- ट्रंप का अभी का मकसद दोनों अमेरिका यानी कि उत्तरी अमेरिका, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको जैसे देश हैं और दक्षिणी अमेरिका यानी कि जिसमें ब्राजील, अर्जेंटिना, कोलंबिया और वेनेजुएला जैसे देश हैं, अपनी बादशाहत को इतना ताकतवर बनाना कि यहां पर उसे कोई चुनौती न दे सके. ट्रंप लैटिन अमेरिकी देशों में चीन के बढ़ रहे प्रभुत्व को रोकने के लिए प्रतिबद्धता जता रहे हैं. इसके लिए वो आर्थिक समझौते, रक्षा सौदे और औद्योगिक सहयोग के जरिए अपनी ताकत को बढ़ा रहे हैं.
- एशिया में चीन को रोकने के लिए ट्रंप जापान, दक्षिण कोरिया, भारत और आस्ट्रेलिया के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं. इसके अलावा जिस ताइवान को चीन अपना बताता है, उसके लिए भी ट्रंप अलग से प्लान बना चुके हैं जिसमें कारोबार और रक्षा सौदे शामिल हैं.
- यूरोप की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए ट्रंप का प्लान है कि नाटो देश अमेरिका पर अपनी निर्भरता खत्म करें और खुद से वो अपने पैरों पर खड़े हों. इसके लिए ट्रंप का प्लान ये है कि नाटो देश अपनी सेना पर अपनी जीडीपी का कम से कम 5 फीसदी खर्च करें. इसके अलावा मिडिल ईस्ट और ईस्ट अफ्रीका में भी अमेरिका ने जो अपने पांव फैला रखे हैं, वो अब ट्रंप समेटना चाहते हैं और चाहते हैं कि अमेरिका का दखल तभी हो, जब खतरा सीधे अमेरिका पर हो.
यानी कि अब ट्रंप पूरी तरह से बदले-बदले नजर आ रहे हैं. अब ट्रंप का मेन फोकस सिर्फ और सिर्फ अमेरिका है, जिसमें दोनों अमेरिका यानी कि उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका शामिल है. ऐसे में अगर ट्रंप अपनी ही बात पर कायम रहें तो भविष्य में उम्मीद की जा सकती है कि अमेरिका अब किसी भी दूसरे देश के मामले में दखल नहीं देगा और अब अगर कहीं दुनिया में जंग होती भी है तो अमेरिका खुद को उससे दूर रखेगा. उम्मीद है. उम्मीद पर दुनिया कायम है. लेकिन ट्रंप कब किसकी उम्मीद तोड़ दें, ये भी तो नहीं कहा जा सकता. क्योंकि अभी ही तो वेनेजुएला की उम्मीदों पर ट्रंप ने बम बरसाए हैं और सेना भेजकर उसके राष्ट्रपति को पकड़कर अपनी जेल में बंद कर दिया है. और ये भी ट्रंप के उसी प्लान का हिस्सा है, जिसमें वो पश्चिमी गोलार्ध यानी कि उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका में यूएसए के खिलाफ उठ रहे हर खतरे को नेस्तनाबूद करने पर आमादा हैं.
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