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    'वे हमारे लिए कुछ नहीं...' NATO देशों की 'ना' से भड़के डोनाल्ड ट्रंप, ईरान से जंग के बीच किया बड़ा दावा

    3 days ago

    अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग को 17 दिन हो चुके हैं. युद्ध में समर्थन न करने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाटो देशों पर भड़के हैं. मंगलवार (17 मार्च) को उन्होंने नाटो देशों की कड़ी आलोचना की. ट्रंप ने कहा, जरूरत के समय वे हमारे लिए कुछ नहीं करते जबकि हम उनकी सुरक्षा के लिए अरबों डॉलर खर्च करते हैं. उन्होंने फिर दोहराया कि वह ईरान के साथ जारी युद्ध में पीछे नहीं हटेंगे.

    कई देशों ने युद्ध में शामिल होने से किया मना

    दरअसल, ट्रंप ने नाटो देशों से ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका का साथ देने की अपील की थी, लेकिन नाटो के सहयोगी देश इसके लिए तैयार नहीं दिखे. ब्रिटेन के बाद फ्रांस और कनाडा ने भी युद्ध में अमेरिका का साथ देने से मना कर दिया.  फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि वर्तमान हालात में वह किसी सैन्य अभियान में हिस्सा नहीं लेंगे. वहीं,  जर्मनी की ओर से कहा गया कि यह इस युद्ध का NATO देशों से कोई लेना देना नहीं है. रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मांगों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, 'यह हमारा युद्ध नहीं है, हमने इसे शुरू नहीं किया है.'

    'US को किसी की मदद की जरूरत नहीं'

    ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को किसी की मदद की जरूरत नहीं है, वह अपने दम पर चीजों को हैंडल कर सकता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत बेहद कमजोर हो चुकी है, और उनकी वायु सेना, नौसेना और सैन्य नेतृत्व को पूरी तरह नष्ट कर दिया है.

    ट्रुथ पर किया पोस्ट

    ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर पोस्ट कर लिखा,  'हमारे ज़्यादातर NATO सहयोगियों ने यूनाइटेड स्टेट्स को बताया है कि वे मिडिल ईस्ट में ईरान के टेररिस्ट राज के खिलाफ हमारे मिलिट्री ऑपरेशन में शामिल नहीं होना चाहते, जबकि लगभग हर देश इस बात से पूरी तरह सहमत है कि हम क्या कर रहे हैं और ईरान को किसी भी तरह से न्यूक्लियर वेपन रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती.'

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा, 'हालांकि मैं उनके एक्शन से हैरान नहीं हूं, क्योंकि मैंने हमेशा NATO को, जहां हम इन्हीं देशों की सुरक्षा पर हर साल सैकड़ों बिलियन डॉलर खर्च करते हैं, एकतरफ़ा रास्ता माना है. हम उनकी सुरक्षा करेंगे, लेकिन वे हमारे लिए, खासकर ज़रूरत के समय में, कुछ नहीं करेंगे.'

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