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    US-Venezuela Tensions: मादुरो की गिरफ्तारी से किन देशों को सता रहा डर! ट्रंप की हिटलिस्ट में अब किसका नंबर?

    6 days ago

    अमेरिका ने वेनेजुएला में घुसकर एक बड़े सैन्य अभियान के तहत राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया. इस ऑपरेशन को ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व नाम दिया गया. अमेरिकी सेना ने मादुरो को उनके ही बेडरूम से गिरफ्तार कर हथकड़ी पहनाई और सीधे न्यूयॉर्क ले जाया गया.

    इस कार्रवाई के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है. कई देशों के सत्ता प्रमुख अब आशंकित हैं कि कहीं अमेरिका उनके खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई न कर दे. मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका-विरोधी रुख रखने वाले कई देश सतर्क हो गए हैं. इनमें से कुछ देशों के नेता अपनी सुरक्षा को लेकर रूस और चीन जैसे शक्तिशाली देशों से संपर्क बढ़ा रहे हैं, ताकि किसी संभावित अमेरिकी कार्रवाई से बचा जा सके.

    ईरान खामेनेई पर बढ़ता दबाव

    ईरान लंबे समय से अमेरिका का खुला विरोध करता रहा है. 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ही वहां 'डेथ टू अमेरिका' जैसे नारे आम हैं. हाल के महीनों में ईरान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है, जिससे देशभर में बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं. इन प्रदर्शनों में अब डेथ टू डिक्टेटर के नारे भी सुनाई दे रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन प्रदर्शनों का समर्थन किया है, जिसे ईरान ने बाहरी साजिश करार दिया है. सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने सख्ती दिखाते हुए आंदोलन को दबाने के आदेश दिए हैं.

    कोलंबिया: गुस्तावो पेट्रो की तीखी बयानबाज़ी

    कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो, जो 2022 में सत्ता में आए और देश के पहले वामपंथी राष्ट्रपति हैं. वो भी अमेरिका के निशाने पर बताए जा रहे हैं. पेट्रो ने डोनाल्ड ट्रंप को युद्ध अपराधी तक कह दिया था और अमेरिकी सैनिकों से ट्रंप के आदेश न मानने की अपील की थी. माना जा रहा है कि अमेरिका फिलहाल कोलंबिया में कोई बड़ा कदम उठाने से पहले 2026 के अमेरिकी चुनावों का इंतजार करेगा.

    नॉर्थ कोरिया किम जोंग उन की कड़ी चेतावनी

    वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई को लेकर सबसे तीखी प्रतिक्रिया उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की ओर से आई है. हालांकि उत्तर कोरिया तक सीधे पहुंचना अमेरिका के लिए आसान नहीं है, क्योंकि इसके रास्ते में रूस और चीन की सीमाएं आती हैं. इसके अलावा किम के पास परमाणु हथियार होने की वजह से किसी भी अमेरिकी कदम का जवाब बेहद खतरनाक हो सकता है.

    क्यूबा अमेरिका के खिलाफ पुराना मोर्चा

    क्यूबा अमेरिका-विरोधी देशों में सबसे पुराना नाम है. राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनल ने वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई को राज्य प्रायोजित आतंकवाद बताया. इस विरोध में क्यूबा की सड़कों पर बड़े प्रदर्शन हुए और अमेरिकी दूतावास के सामने हजारों लोग जुटे. क्यूबा अब रूस, चीन और ईरान के साथ अपने रिश्ते और मजबूत कर रहा है.

    बेलारूस लुकाशेंको की सत्ता और रूस का साया

    बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर लुकाशेंको 1994 से सत्ता में हैं और यूरोप के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेता हैं. 2025 के चुनाव में उनकी जीत पर भी धांधली के आरोप लगे थे, ठीक वैसे ही जैसे मादुरो पर लगे थे, लेकिन बेलारूस पर किसी भी हमले को रूस पर हमला माना जाएगा. इसी वजह से अमेरिका के सीधे कदम उठाने की संभावना यहां कम मानी जा रही है.

    मादुरो की गिरफ्तारी बना चेतावनी संकेत

    निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका अब सिर्फ दबाव की राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहता. इस घटना ने उन सभी देशों और नेताओं को सतर्क कर दिया है, जो अमेरिका की नीतियों का खुलकर विरोध करते हैं. आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और ज्यादा तनावपूर्ण हो सकती है.

    ये भी पढ़ें: वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में 32 अधिकारियों की मौत, क्यूबा की सरकार ने जारी किया बयान, दो दिन का राष्ट्रीय शोक

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