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    तालिबान से जंग के बीच मिडिल ईस्ट में कूदना चाहता PAK! इशाक डार ने अमेरिका-ईरान को लेकर दिया चौंकाने वाला बयान

    8 hours ago

    पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, जिसे कई लोग विरोधाभासी मान रहे हैं. एक तरफ देश खुद कई मोर्चों पर तनाव झेल रहा है, वहीं दूसरी ओर वह अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश कर रहा है. मंगलवार (3 मार्च 2026) को पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने संसद के उच्च सदन में कहा कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने के लिए तैयार है. उन्होंने प्रस्ताव दिया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच वार्ता इस्लामाबाद में कराई जा सकती है.

    ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति जताई थी

    डार ने बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक और रक्षा स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति जताई थी, लेकिन अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना पूरा परमाणु कार्यक्रम खत्म करे. डार ने दावा किया कि शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही थी. उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ऑस्ट्रिया यात्रा का जिक्र किया, जहां उनकी मुलाकात अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख से हुई थी. डार के अनुसार, एजेंसी प्रमुख को भी उम्मीद थी कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है.

    पाकिस्तान की ओमान के विदेश मंत्री से बातचीत

    डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, डार ने यह भी बताया कि उनकी ओमान के विदेश मंत्री से बातचीत हुई थी. उन्हें जानकारी दी गई कि अमेरिका और ईरान के बीच आखिरी दौर की बातचीत सकारात्मक माहौल में समाप्त हुई थी. डार ने कहा कि ओमान के विदेश मंत्री बाद में वॉशिंगटन गए और वहां अमेरिकी उपराष्ट्रपति से मुलाकात कर बातचीत की प्रगति के बारे में चर्चा की. हालांकि, इन सकारात्मक संकेतों के बाद अचानक हुए हमलों पर डार ने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि यह स्थिति उन्हें पिछले साल जून की घटनाओं की याद दिलाती है, जब इजरायल और ईरान के बीच 12 दिनों तक संघर्ष चला था.

    अफगानिस्तान के साथ गंभीर तनाव

    पाकिस्तान की यह मध्यस्थता की पेशकश ऐसे समय में आई है जब वह खुद अफगानिस्तान के साथ गंभीर तनाव, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों और सीमावर्ती हमलों का सामना कर रहा है. ऐसे में इस पहल को लेकर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.

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