Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    dailyadda
    dailyadda

    Sick Leave ली हो या हो ऑफिशियल हॉलीडे, 85% कर्मचारियों के पास ऑफिस से आ ही जाता है फोन

    1 week ago

    आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम और पर्सनल लाइफ के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. मोबाइल फोन, ईमेल और मैसेजिंग ऐप्स ने काम को जितना आसान बनाया है, उतना ही यह हमारी पर्सनल लाइफ में भी दखल देने लगा है. हालत यह है कि ऑफिस का काम अब सिर्फ ऑफिस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि घर, छुट्टियों और यहां तक कि बीमारी के दिनों तक भी पहुंच गया है. 

    दुनिया के कई देशों में अब काम से अलग होने के अधिकार यानी Right to Disconnect की मांग जोर पकड़ रही है. इसका सीधा मतलब है कि काम के तय समय के बाद कर्मचारी को ऑफिस के फोन, मेल या मैसेज का जवाब देने के लिए मजबूर न किया जाए. लेकिन भारत में हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. 

    Sick Leave ली हो या हो ऑफिशियल हॉलीडे

    जॉब सर्च प्लेटफॉर्म Indeed पर किए गए एक हालिया सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. सर्वे के मुताबिक, भारत में भले ही एम्प्लायर यह मानते हों कि काम और  पर्सनल लाइफ के बीच साफ सीमाएं होनी चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है. 

    रिपोर्ट बताती है कि हर 10 में से 9 कर्मचारियों को ऑफिस टाइम खत्म होने के बाद भी कॉल, मैसेज या ईमेल आते हैं. इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि 85 प्रतिशत कर्मचारियों से उनके मैनेजर Sick Leave या Official Holiday के दौरान भी संपर्क करते हैं यानी बीमार होने या छुट्टी पर होने का भी कोई मतलब नहीं रह गया है. 

    सर्वे का जवाब

    सर्वे में यह भी सामने आया कि 88 प्रतिशत भारतीय कर्मचारी काम के घंटों के बाहर भी नियमित रूप से ऑफिस से जुड़े रहते हैं. इसकी बड़ी वजह डर है. करीब 79 प्रतिशत कर्मचारियों को यह चिंता रहती है कि अगर उन्होंने फोन या मैसेज का जवाब नहीं दिया, तो उनकी पदोन्नति रुक सकती है या ऑफिस में उनकी छवि खराब हो सकती है. इस लगातार उपलब्ध रहने की संस्कृति ने कर्मचारियों को मानसिक और शारीरिक रूप से थका दिया है. लोग अपने स्वास्थ्य, परिवार और पर्सनल समय की कीमत पर भी काम से जुड़े रहने को मजबूर महसूस कर रहे हैं. 

    संसद में भी उठ चुका है मुद्दा

    दिलचस्प बात यह है कि इस गंभीर समस्या को लेकर अब कानून बनाने की मांग भी उठने लगी है. संसद के शीतकालीन सत्र 2025 के दौरान लोकसभा में एक  पर्सनल सदस्य विधेयक पेश किया गया था, जिसमें कर्मचारियों के लिए काम से अलग होने के अधिकार को कानूनी रूप देने की बात कही गई थी. इसका मकसद तनाव कम करना और बेहतर Work-Life Balance को बढ़ावा देना था. 

    Gen Z का Baby Boomers

    सर्वे में पीढ़ियों के बीच सोच का बड़ा फर्क भी सामने आया है. बेबी बूमर्स (1946 से 1964 के बीच जन्मे लोग) में से लगभग 88 प्रतिशत का मानना है कि अगर उन्हें ऑफिस टाइम के बाद भी कॉल आता है, तो इससे उन्हें खुद को जरूरी महसूस होता है. उनके लिए लगातार उपलब्ध रहना समर्पण और जिम्मेदारी की निशानी है. वहीं दूसरी ओर, Gen Z (1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा) की सोच बिल्कुल अलग है. इनमें से सिर्फ 50 प्रतिशत ही ऑफिस टाइम के बाद संपर्क किए जाने को सकारात्मक मानते हैं. इतना ही नहीं, 63 प्रतिशत Gen Z कर्मचारी कहते हैं कि अगर उनके काम से अलग होने के अधिकार का सम्मान नहीं हुआ, तो वे नौकरी छोड़ने तक का फैसला कर सकते हैं. यह साफ दिखाता है कि नई पीढ़ी मानसिक स्वास्थ्य, निजी समय और संतुलित जीवन को ज्यादा महत्व दे रही है

    एम्प्लायर भी परेशानी में

    एम्प्लायरस की स्थिति भी आसान नहीं है.  सर्वे के मुताबिक 79 प्रतिशत एम्प्लायर मानते हैं कि Right to Disconnect जैसी नीति लागू करना एक अच्छा कदम होगा. लेकिन 66 प्रतिशत को डर है कि इससे उत्पादकता कम हो सकती है. वहीं 81 प्रतिशत एम्प्लायर इस बात से भी चिंतित हैं कि अगर Work-Life Balance का सम्मान नहीं किया गया, तो वे अच्छे और प्रतिभाशाली कर्मचारियों को खो सकते हैं. हालांकि एक सकारात्मक संकेत यह है कि 81 प्रतिशत एम्प्लायर नियमित काम के घंटों के बाद किए गए काम के लिए अतिरिक्त भुगतान देने को भी तैयार हैं. 

    दूसरे देशों से तुलना

    रिपोर्ट में भारत की तुलना ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर से भी की गई है. ऑस्ट्रेलिया में 90 प्रतिशत कर्मचारी ऑफिस टाइम के बाद भी काम करते हैं, लेकिन सिर्फ 47 प्रतिशत एम्प्लायर ही मानते हैं कि सख्त सीमाएं लगाने से उत्पादकता घटेगी. सिंगापुर में 93 प्रतिशत कर्मचारी ऑफिस के बाद भी काम करते हैं और यहां 78 प्रतिशत एम्प्लायर उत्पादकता को लेकर चिंतित हैं. इससे साफ है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में यह समस्या लगभग हर देश में मौजूद है. 

    यह भी पढ़ें: कंप्यूटर ऑपरेटर सहित कई पदों पर निकली वैकेंसी, जानें कैसे और कब तक कर सकते हैं अप्लाई?

    Click here to Read More
    Previous Article
    iOS 27 अपडेट: 1-2 नहीं, 9 नई इमोजी लेकर आ रही है ऐप्पल, देखते ही आ जाएंगी पसंद
    Next Article
    HAL कानपुर में अप्रेंटिस की ढेर सारी नौकरियां, जानें कौन कर सकता है अप्लाई?

    Related नौकरी Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment