Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    dailyadda
    dailyadda

    स्टार की थाली विशाल जेठवा के साथ:एक्टर बोले- हर ट्रिप पर थेपला लेकर जाता हूं, देसी खाने में सिर्फ स्वाद नहीं, भावनाएं भी होती हैं

    5 days ago

    अरुबा के आलीशान रेस्टोरेंट में सजी थाली हो या किसी पांच सितारा होटल का मेन्यू, विशाल जेठवा हर व्यंजन का जायका पूरे दिल से लेते हैं। उनकी प्लेट रंग-बिरंगे फ्लेवर से भरी रहती है, लेकिन दिल के किसी कोने में आज भी देसी स्वाद की खुशबू बसती है। स्टार बनने के बाद भी विशाल का दिल बिल्कुल जमीन से जुड़ा हुआ है, और यही बात उनके खाने की पसंद में भी साफ झलकती है। फिल्म ‘होमबाउंड’ से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके विशाल आज भले ही ग्लोबल मंच पर छा गए हों, लेकिन खाने के मामले में उनका दिल आज भी मां के हाथ के खाने पर ही आकर टिकता है। विशाल मानते हैं कि देसी खाने में सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि भावनाएं भी होती हैं। शूटिंग के लंबे और थकाने वाले शेड्यूल के बाद जब घर का खाना नसीब होता है, तो वह उनके लिए किसी जश्न से कम नहीं होता। स्टार की थाली के इस एपिसोड के लिए हमने विशाल जेठवा से अरुबा रेस्टोरेंट में मुलाकात की और उनके फेवरेट फूड के बारे में जाना। अरुबा, मुंबई के जुहू बीच के पास एक नया रेस्टोरेंट खुला है, जो पूरी तरह इंटरनेशनल स्तर का है। इंटीरियर से लेकर खाने तक सब ग्लोबल स्टाइल का है। ‘रिंगणा बटाटा नु शाक अने भात’ लोकप्रिय गुजराती व्यंजन मेरी मम्मी बहुत अच्छा खाना बनाती हैं। रिंगणा बटाटा नु शाक अने भात गुजराती एक लोकप्रिय व्यंजन है। इसका मतलब बैंगन और आलू की सब्जी चावल होता है। यह मुझे खाने में बहुत पसंद है। यह गुजराती शाक मसालेदार बैंगन और आलू से बनता है, जो अक्सर स्टफ्ड या ग्रेवी स्टाइल में तैयार किया जाता है। इसे चावल या रोटी के साथ परोसा जाता है। इसके अलावा मुझे शिमला मिर्च में आलू की स्टफिंग भरकर रोटी और चाय के साथ खाना भी कमाल का लगता है। 'तेल मरचु अने रोटली' बड़ी मजेदार चीज होती है एक और मजेदार चीज है तेल मरचु अने रोटली। पहले की बनी रोटी पर तेल, मिर्च पाउडर और नमक लगाकर खाओ, तो स्वाद अलग ही आता है। इसमें ताजी रोटी नहीं चाहिए। दोपहर की रोटी शाम को या फिर शाम की रोटी अगली सुबह खा सकते हैं। रसगुल्ला और रसमलाई भी मेरे फेवरेट हैं। विदेश यात्रा से वापस आते ही दूसरे दिन मम्मी द्वारा बनाई सारी चीजें खाने का बहुत मन करता है। हमारे गुजरातियों में थेपला बहुत फेवरेट डिश है हमारे गुजरातियों में थेपला बहुत फेवरेट डिश है। यह मेथी, बेसन, गेहूं के आटे, दही और मसालों से बनी पतली, मसालेदार रोटी जैसी डिश होती है। हर गुज्जू, चाहे कोई भी हो, किसी भी स्तर का हो, जब वह कहीं ट्रैवल करता है तो अपने साथ थेपला लेकर जरूर जाता है। थेपला का पूरा स्टॉक भरकर ले जाता हूं मेरी फिल्म ‘होमबाउंड’ के लिए जितने भी इंटरनेशनल इवेंट्स हुए हैं, मैं खुद थेपला लेकर जाता था। घर में जो भी हों मम्मी, नानी, मौसी या फिर मेरी दीदी सब बनाकर भेज देती है। जब भी बाहर कहीं निकलता हूं, तो पूरा स्टॉक भरकर ले जाता हूं। अगर कहीं कुछ खाने को नहीं मिलता था तो आचार, मिर्ची के साथ थेपला खा लेता था। मैं अपनी पूरी टीम को भी खिलाता हूं। सुबह-सुबह सबका फोन थेपला के लिए आ जाता था। ईशान खट्टर को ढेफली बहुत पसंद है, वह उसे डफली बोलता है। ढेफली खाने से पेट थोड़ी देर भरा रहता है। यह हल्का मीठा होता है, इसलिए ईशान खूब खाता है। जान्हवी कपूर को भी देसी खाना बहुत पसंद है जान्हवी कपूर अपने दूसरे प्रोजेकट की शूटिंग में व्यस्त थीं तो वो हमारे साथ हमारे साथ ज्यादा इंटरनेशनल ट्रैवल नहीं कर पाईं। जान्हवी की परवरिश जिस माहौल में हुई है, उसे देखते हुए मुझे लगता था कि शायद उसे मिडल क्लास चीजें पसंद न हों। लेकिन भाई, बिल्कुल उल्टा है। उसे ऐसी बातें करने में, जोक मारने में, ऐसा खाना खाने में बहुत मजा आता है। लेकिन वह अपनी डाइट पर बहुत ध्यान देती है। जैसे जब भी हम जाते हैं, तो दूसरे दिन इवेंट्स होते हैं, कहीं दिखना होता है। इसलिए वह अपनी डाइट को कंट्रोल रखती है। विदेशी डिश समझ में नहीं आता है विदेश में अक्सर मुझे खाने का डिश समझ में नहीं आता है। वहां अगर किसी रेस्टोरेंट में ईशान और जान्हवी के साथ जाते थे तो वो खुद सामने से कहते थे कि "विशाल, तेरे लिए इंडियन चीज ऑर्डर कर दूं, पता है तुझे यही चाहिए।" करण जौहर के साथ जब भी कभी लंच-डिनर करने का मौका मिला तो सिर्फ उनकी बातें सुनता पसंद करता था। गांव में बैठकर खाने का अलग ही मजा है गुज्जू को सिंपल देसी खाना पसंद है। आलू की सब्जी को लसनिया पोटेड़ा कहते हैं। इसके साथ भाकरी या रोटी खाते हैं। गांव में बैठकर खाने का इसका अलग मजा है। सब्जी को चूरा-चूरा करके भाकरी में मिक्स कर लो। साथ में ताजा दूध या छाछ, उसकी खुशबू ही अलग है। शाम को भजन बज रहे हों, दोस्त-परिवार बैठे हों। दादी-नानी-मम्मी साड़ी पहने हों। भैंसें आसपास हों। ऐसे माहौल में खाने का स्वाद कहीं और नहीं मिलता। मेरी दीदी मकई की रोटी और आलू की सब्जी बहुत अच्छी बनाती हैं। दीदी दाल-चावल भी कमाल का बनाती हैं। हम लोग प्रॉपर यही सारी चीजें खाते हैं। मतलब बिल्कुल टिपिकल गुज्जू इंडियन फैमिली वाला खाना। स्ट्रीट फूड भी मेरा फेवरेट घर की सारी चीजें तो हेल्दी होती हैं। घर के खाने के अलावा बाहर की चीजों में मुझे पाव भाजी बहुत पसंद है। पाव भाजी और तवा पुलाव खाना अच्छा लगता है। साउथ इंडियन फूड भी पसंद है। स्ट्रीट फूड तो बहुत ज्यादा पसंद है। रास्ते में कभी-कभी मैसूर मसाला डोसा खाने जाता हूं। प्रोटीन और नॉनवेज को लेकर मिथ लोगों के अंदर बहुत बड़ा मिथ है की प्रोटीन सिर्फ नॉनवेज में ही होता है। मैं इस बात को नहीं मानता हूं, लेकिन हर व्यक्ति की अपनी मान्यताएं हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से शाकाहारी हूं और मेरी एक इच्छा ऐसी है। जो कभी पूरी नहीं होगी। यह एक विवादास्पद विषय है। मैं चाहता हूं कि पूरी दुनिया शाकाहारी हो जाए। मुझे जानवरों से लगाव है और उनकी भी जिंदगी है। पूरी जीवनशैली शाकाहारी होनी चाहिए अगर शाकाहारी होने की इतनी बात करूं और जानवरों की खाल से बनी बेल्ट पहनूं, तो कहीं न कहीं दोगलापन लगता है। वीगन या शाकाहारी होना सिर्फ खाने की बात नहीं, बल्कि पूरी जीवनशैली है। फिर भी, मैं कोशिश करूंगा कि कभी न कभी पूरी तरह शाकाहारी जीवन जीऊं। मेरा फेवरेट जानवर है हाथी, खासकर बेबी हाथी के वीडियो देखना बहुत अच्छा लगता है। छोटा हाथी डरकर मम्मी के पीछे छुप जाता है, कितना क्यूट लगता है। घर पर कुत्ता भी है, जो बहुत पसंद है। रोल के हिसाब से अपना डाइट फॉलो करता हूं मैं अपने रोल के हिसाब से डाइट फॉलो करता हूं, लेकिन कभी-कभी थोड़ा अनहेल्दी तरीके से भी कर लेता हूं।फिल्म होमबाउंड के लिए मेरा वजन 6-7 किलो कम करना था। लगा कि 6 किलो काफी होगा, ताकि ऑन-स्क्रीन अच्छा लगूं। लेकिन मैंने ज्यादा ही कम कर लिया। खुद पर ज्यादा कठोर हो गया। उससे पहले UK में शूटिंग थी। वहां डाइट मैनेज करना मुश्किल लगा, क्योंकि चीजें अलग थीं। इसलिए मैंने खाने में बहुत गैप देना शुरू कर दिया। कभी-कभी अनहेल्दी तरीके से खुद को ज्यादा पुश कर देता हूं, जो गलत है। सिर्फ फल खाकर 6-7 घंटे गुजार देना गलत है अनहेल्दी का मतलब है इतने ज्यादा घंटे तक खाना न खाना, यह आपके शरीर के लिए सही नहीं है। अगर आपको लीन या स्किनी बनना है, तो इसके लिए भी एक सही तरीका होता है। आप ऐसी चीजें खा सकते हैं, जिससे शरीर को कोई नुकसान न हो, पोषण भी अच्छे से मिल जाए और साथ ही वही बॉडी शेप पा सको जो चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं कि खाना ही बंद कर दो। सिर्फ थोड़े से फल खाकर 6-6 घंटे या 7-7 घंटे गुजार दो। मेरे अनुसार यह तरीका गलत है। मैं फलों में सेब और केला अपने मन से खा लेता था। मतलब कुछ भी, मुझे पता था कि फल से ज्यादा वजन नहीं बढ़ेगा। इसलिए फल को अपना सेफ ऑप्शन मानता था। एक-दो मील खाता था, यानी दो मील जरूर खा लेता था। प्रोटीन शेक से वजन बढ़ाता हूं वैसे जब वजन बढ़ना होता है तो मैं मैं पनीर खाता हूं और कुछ शेक पी लेता हूं। शेक में केला, पीनट बटर, प्रोटीन शेक, प्रोटीन पाउडर डाल देता था। दूध या कभी-कभी बादाम का दूध ले लेता हूं। इससे एक अच्छा प्रोटीन शेक बनता है। यह मेरे वजन बढ़ाने में बहुत मदद करता है। जिम के पीछे पागल नहीं रहता हूं मैं जब फ्री होता हूं, तो जिम जाता हूं। लेकिन मैं ऐसा पागल नहीं हूं कि हर रोज बिना न छोड़े जिम करना ही है। मैं मोटिवेशन से चलने वाला व्यक्ति हूं। अगर किसी फिल्म के लिए कहा जाए कि दो-तीन महीने में ऐसी बॉडी बनानी है, तो मैं पूरा समय दे दूंगा। लेकिन अगर हेक्टिक शेड्यूल में भी सुबह दो घंटे निकालने को कहा जाए, तो भाई, मुझे बहुत मुश्किल होगा। उतना डिसिप्लिन मुझमें नहीं है। ‘मर्दानी 2’ के समय हैवी डाइट फॉलो किया फिल्म ‘मर्दानी 2’ के दौरान मेरा डाइट बहुत सख्त और हैवी चल रहा था। कई दिनों में मैंने एक बार 18-18 अंडे भी खाए थे, मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात थी। पनीर, ढेर सारे फल और 3-4 बड़ी रोटियां, फिर सब्जी, दाल-चावल खाता रहता था। दिन में साढ़े तीन से चार प्रोटीन शेक पीता था। रात को दूध पीता था। इस तरह मैंने बहुत हैवी और सही डाइट फॉलो की थी। उस समय मैं ठीक-ठाक वजन बढ़ा पाया। जिंदगी भर मैं हमेशा पतला ही रहा हूं। मेरे लिए वजन बढ़ाना आसान नहीं। मेरा मेटाबॉलिज्म बहुत तेज है। शुरुआती दिनों में सेट्स पर क्वालिटी फूड नहीं मिलता था शुरुआती दिनों में जहां सेट्स पर काम करता था, वहां क्वालिटी फूड नहीं मिलता था। सेट पर अच्छा खाना बहुत जरूरी लगता है, क्योंकि आखिरकार हम खाने के लिए ही तो काम करते हैं। अब हर जगह ऑर्डर कर सकते हैं और सेट का खाना भी बेहतर हो गया है। लेकिन शुरुआत में जहां जाता था, वहां बेसिक क्वालिटी का फूड भी नहीं होता था, जो सबसे जरूरी चीज है। स्ट्रगल के दिनों में भेल खाने का कुछ अलग ही आनंद था मैं पहले ट्रेन और बस से सफर करता था। ऑडिशन देकर घर लौटते समय जाते वक्त कुछ नहीं खाता था। मुझे लगता था कि वापस आने पर ₹5-7 की भेल खाने में मजा आएगा, क्योंकि अब काम पूरा हो गया है। मैं इसे डिजर्व करता हूं। अंधेरी स्टेशन पर सुखी भेल लेता, ट्रेन में बैठकर अकेले गाने सुनते हुए खाता। कोई साथ न होने पर अलग मजा आता था। वो यादें अभी भी ताजा हैं। ---------------------------------------------------------- स्टार की थाली की यह खबर भी पढ़ें... स्टार की थाली विद त्रिधा चौधरी:बोलीं- स्ट्रीट फूड मेरा फेवरेट, 7 दिन कार्ब्स छोड़ने से वजन कम, इंजेक्शन लगाकर पतला होने की जरूरत नहीं वेब सीरीज आश्रम में बबीता का किरदार निभाकर चर्चा में आई एक्ट्रेस त्रिधा चौधरी की हाल ही में कपिल शर्मा के किस किस को प्यार करूं 2 रिलीज हुई है। वेब सीरीज और फिल्मों में अपनी दमदार एक्टिंग से पहचान बना चुकीं त्रिधा ने मुंबई के जुहू स्थित महाराजा भोग रेस्टोरेंट में बैठकर हमारे साथ अपनी पसंदीदा डिशेज, फिटनेस मंत्र और बचपन की यादें शेयर कीं। आज 'स्टार की थाली' में जानिए एक्ट्रेस की पसंदीदा डिशेज और उनकी खाने की रूटीन।पूरी खबर पढ़ें....
    Click here to Read More
    Previous Article
    अनूप जलोटा ने रहमान को दी सलाह:बोले-अगर मुस्लिम होने की वजह से काम नहीं मिल रहा, तो फिर से हिंदू बन जाएं
    Next Article
    जाकिर खान ने लंबा ब्रेक लेने का किया ऐलान:वायरल वीडियो में शो के मंच से बोले- हेल्थ के चलते 3–5 साल का ब्रेक है

    Related मनोरंजन Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment