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    सूतक में सुनेत्रा पवार बनीं डिप्टी सीएम, शास्त्रों से जानें पति की मृत्यु बाद सूतक में पत्नी को क्या नहीं करना चाहिए

    4 days ago

    Sunetra Pawar, Sutak Niaym: हिंदू धर्म में किसी की मृत्यु होने के बाद परिवारजन को 13 दिन तक सूतक का पालन करना होता है लेकिन हाल ही में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को इस गम की घड़ी के बीच खुद उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेनी पड़ी.

    सूतक में राजनीतिक प्रक्रिया निभाने पर शिवसेना ने राजनेताओं पर तीखी टिप्पणी की. शास्त्रों में सूतक का क्या महत्व है, पति की मृत्यु के बाद पत्नी को क्या नियम निभाने पड़ते हैं आइए जानें.

    सूतक क्या है

    सूतक एक प्रकार की अशुद्धि और परहेज़ का समय होता है, जब किसी विशेष घटना के कारण घर-परिवार में धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ, हवन आदि नहीं किए जाते.

    गरुड़ पुराण के अनुसार, जब परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो वहां सूतक यानी पातक लग जाता है. ये अवधि मृत्यु के बाद मानसिक शांति और शोक का समय होता है. सूतक में आमतौर पर दाह संस्कार से 10 से 13 दिनों (तेरहवीं) तक परिवारजन को इसका पालन करना होता है. कुछ जगह 40 दिन तक सूतक मान्य होता है.

    पति की मृत्यु के बाद पत्नी के सूतक नियम

    • पति की मृत्यु के बाद पत्नी को सूतक अवधि में मंदिर जाना, पूजा-पाठ करना, धार्मिक, सामाजिक कार्यक्रम या उत्सव में शामिल होने की मनाही होती है. यह समय परिवार के भीतर सीमित रहकर शोक मनाने का होता है.
    • सूतक की अवधि समाप्त होने तक मृतक की पत्नी घर में भोजन भी नहीं बनाती है. घर के सभी सदस्य साधारण वस्त्र पहनते हैं और भोजन में सादगी बनाए रखते हैं. इस दौरान रंगीन कपड़े पहनने से बचने की सलाह दी जाती है.
    • सूतक में बाहरी लोगों से मिलना-जुलना न करना. घर के अंदर ही रहना, किसी दूसरे के घर नहीं जाने का नियम है. 40 दिन तक ऐसा करने की मनाही होती है.
    • अस्थि विसर्जन, पवित्र नदी में स्नान और ब्राह्मण को भोज कराने के बाद ही पातक समाप्त होता है.

    सूतक में क्या करते हैं

    • सूतक में सादा भोजन करना, जमीन पर सोना, और शोक व्यक्त किया जाता है.
    • घर का शुद्धिकरण (गंगाजल, गौमूत्र छिड़क कर) अनिवार्य होता है.
    • इस दौरान घर में रहकर ही गुरुड़ पुराण का पाठ किया जाता है.
    •  शास्त्रों में इसे इस दृष्टि से भी देखा जाता है कि यह समय आत्म-निरीक्षण, प्रार्थना, और दिवंगत आत्मा के लिए शांति की प्रार्थना का अवसर प्रदान करता है.

    सूतक कब-कब लगता है

    • जन्म के समय – जब किसी घर में बच्चे का जन्म होता है तो एक निश्चित समय तक सूतक माना जाता है
    • मृत्यु के समय – किसी परिजन की मृत्यु होने पर भी सूतक लगता है, जिसे पातक भी कहते हैं.
    • ग्रहण (सूर्य/चंद्र) – सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के समय भी सूतक लगता है.

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    Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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