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    सरकारी स्कूल का खाना खाने के बाद 20 छात्राओं को फूड पॉइजनिंग, अस्पताल में मची चीख-पुकार

    2 days ago

    तेलंगाना के मंचेरियल जिले के बेल्लमपल्ली शहर स्थित एक सरकारी एससी बालिका गुरुकुल में खाना खाने के बाद शुक्रवार की रात को 20 छात्राओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से बेल्लमपल्ली सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया. इस घटना को फूड पॉइजनिंग का मामला बताया जा रहा है, जिसने एक बार फिर राज्य के आवासीय शिक्षण संस्थानों में खाद्य सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है और अभिभावकों में गहरा रोष है.

    जैसे ही यह खबर फैली, अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई. हमने खुद देखा कि कैसे मासूम बच्चियों को तकलीफ से छटपटाते हुए इलाज के लिए लाया गया. जानकारी के मुताबिक, रात के खाने में चावल या दाल में मिलावट होने का शक जताया जा रहा है. खाना खाने के कुछ ही देर बाद छात्राओं को उल्टी और तेज पेट दर्द की शिकायत शुरू हो गई. 

    'सभी की हालत अब स्थिर'
    गुरुकुल प्रबंधन ने शुरू में स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन जैसे-जैसे बीमार छात्राओं की संख्या बढ़ी, उन्हें सभी को एम्बुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया. डॉक्टरों ने बताया कि सभी की हालत अब स्थिर है और उन्हें आपातकालीन उपचार दिया जा रहा है.

    तेलंगाना से कई मामले आए सामने
    यह कोई एक घटना नहीं है, बल्कि एक बड़ी व्यवस्थागत विफलता की ओर इशारा करती है. पिछले कुछ महीनों में तेलंगाना के जगतियाल, सूर्यापेट और खम्मम जिलों के गुरुकुलों से लगातार फूड पॉइजनिंग की खबरें सामने आ रही हैं. हाल ही में जगतियाल में एक छात्रा की मृत्यु तक हो चुकी है, जिसके बाद सरकार ने सख्त कार्रवाई के आदेश और निरीक्षण के वादे किए थे लेकिन बेल्लमपल्ली की यह घटना साबित करती है कि जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं बदला है. रसोईघरों में सफाई व्यवस्था, राशन की गुणवत्ता और मेस मैनेजरों पर निगरानी करने में सिस्टम पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है.

    गुरुकुल वे संस्थान होते हैं जहां गरीब परिवारों के बच्चे उज्ज्वल भविष्य की आशा लेकर आते हैं, न कि बीमारियां लेकर. अब सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक यह लापरवाही चलती रहेगी? जिम्मेदार अधिकारियों को इस लापरवाही पर तत्काल संज्ञान लेना होगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी, ताकि किसी भी मासूम की जान को खतरा न हो.

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