Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    dailyadda
    dailyadda

    सुप्रीम कोर्ट की BCCI को फटकार:कहा- इतनी ताकत और पैसा कि कभी-कभी पूंछ ही कुत्ते को हिला रही है

    4 days ago

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भारत में क्रिकेट पर BCCI का नियंत्रण अब कानूनन भी मान्यता पा चुका है। यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें मांग की गई थी कि भारतीय क्रिकेट टीम को भारतीय टीम या टीम इंडिया कहने से रोका जाए। गुरुवार की सुनवाई में जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने मौजूदा हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि स्थिति कभी-कभी ऐसी हो जाती है जैसे पूंछ ही कुत्ते को हिला रही हो। उनका इशारा इस बात की ओर था कि क्रिकेट में पैसा और ताकत इतनी ज्यादा हो चुकी है कि यह सवाल उठने लगता है कि असली नियंत्रण आखिर किसके हाथ में है। BCCI सरकारी संस्था नहीं- जस्टिस सूर्यकांत इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच कर रही थी। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि BCCI एक निजी संस्था है, जो तमिलनाडु सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत है। उसका कहना था कि BCCI न तो कोई सरकारी संस्था है और न ही संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत राज्य की श्रेणी में आती है, इसलिए उसे भारतीय क्रिकेट टीम को राष्ट्रीय टीम कहने का अधिकार नहीं होना चाहिए। हालांकि अदालत इस तर्क से सहमत नहीं दिखी। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि मौजूदा समय में BCCI का भारतीय क्रिकेट पर प्रभाव और नियंत्रण न सिर्फ व्यवहारिक रूप से, बल्कि कानूनन भी स्वीकार किया जा चुका है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से BCCI को पूरा समर्थन प्राप्त है, जिससे उसकी भूमिका और भी मजबूत हो जाती है। कोर्ट का समय बर्बाद मत कीजिए सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को फालतू बताते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई और चेतावनी दी कि इस तरह के मामलों में भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आप घर बैठे याचिकाएं ड्राफ्ट कर देते हैं, कोर्ट का समय बर्बाद मत कीजिए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि देश में नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल तक का नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। दिल्ली हाईकोर्ट भी खारिज कर चुका इससे पहले अक्टूबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट भी इसी याचिका को खारिज कर चुका था। उस वक्त कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील रीपक कंसल को कड़ी फटकार लगाई थी। हाईकोर्ट ने सवाल किया था कि क्या आप यह कहना चाहते हैं कि जो टीम दुनिया भर में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है, वह भारत की टीम नहीं है। कोर्ट ने साफ कहा था कि जो टीम अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर रही है, उसे टीम इंडिया कहने पर आपत्ति बेमानी है। दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय ने इस याचिका को कोर्ट के समय की पूरी बर्बादी बताया था। उन्होंने उदाहरण देते हुए पूछा था कि क्या ओलिंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स या हॉकी, फुटबॉल और टेनिस की टीमें सरकार खुद चुनती है, फिर भी वे भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं। BCCI को सरकार से फंड नहीं मिलता याचिका में यह तर्क भी दिया गया था कि खेल मंत्रालय के RTI जवाबों के मुताबिक BCCI को न तो नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन की मान्यता मिली है और न ही सरकार से कोई फंड मिलता है। इसके बावजूद सरकारी मीडिया प्लेटफॉर्म क्रिकेट टीम को टीम इंडिया कहते हैं और मैचों के दौरान भारतीय झंडे जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों का इस्तेमाल होता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट दोनों ने साफ कर दिया कि यह मुद्दा बेकार और गैरजरूरी है, और इसे आगे बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है।
    Click here to Read More
    Previous Article
    ट्रिस्टन स्टब्स और रायन रिकेल्टन वर्ल्ड कप टीम में शामिल:साउथ अफ्रीका ने इंजर्ड डोनोवन फरेरा और डी जॉर्जी को रिप्लेस किया
    Next Article
    बाबर-रिजवान और शाहीन के साथ 100 करोड़ की ठगी:पॉन्जी स्कीम का शिकार हुए, बिजनेसमैन देश छोड़कर भागा; PCB की जांच जारी

    Related खेल Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment