Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    dailyadda
    dailyadda

    Periods After Delivery: बच्चे की डिलीवरी के कितने दिन तक पीरियड्स न आना नॉर्मल, कब डॉक्टर से मिलना होता है जरूरी?

    6 days ago

    How Long Is It Normal To Miss Periods After Delivery: प्रेग्नेंसी और प्रसव का अनुभव महिला शरीर में कई बड़े बदलाव लेकर आता है. ऐसे में नई मां बनी महिलाओं के मन में सबसे आम सवाल होता है कि "डिलीवरी के बाद पीरियड्स कब वापस आते हैं?". इसका जवाब हर महिला के लिए अलग हो सकता है. आमतौर पर पीरियड्स 6 हफ्ते से लेकर एक साल या उससे भी ज्यादा समय में लौट सकते हैं. यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि महिला ब्रेस्टफीडिंग करा रही है या नहीं, हार्मोनल स्थिति कैसी है और शरीर की रिकवरी कितनी जल्दी हो रही है.

    2023 के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के मुताबिक, भारत में करीब 65 प्रतिशत महिलाओं को डिलीवरी के 6 महीने के भीतर पहला पीरियड आ जाता है. हालांकि, जो महिलाएं पूरी तरह से ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं, उनमें पीरियड्स 18 महीने तक भी टल सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि डॉक्टर इस पूरे मामले को लेकर क्या कहते हैं. 

    डिलीवरी के बाद पीरियड्स लौटने को प्रभावित करने वाले कारण

    दिलशाद गार्डन स्थित मेटरनिटी क्लीनिक की गाइनकॉलजिस्ट डॉक्टर नीतू सिंह बताती हैं कि "प्रसव के बाद पीरियड्स का लौटना कई बातों पर निर्भर करता है. इनमें सबसे अहम भूमिका स्तनपान की होती है. ब्रेस्टफीडिंग के दौरान शरीर में प्रोलैक्टिन नामक हार्मोन बनता है, जो दूध बनने में मदद करता है और ओव्यूलेशन को दबा देता है. यही वजह है कि जो महिलाएं दिन-रात नियमित रूप से और पूरी तरह ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं, उनमें पीरियड्स देर से आते हैं." उनके अनुसार, यह शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो अगली गर्भावस्था के बीच अंतर बनाए रखने में मदद करती है. डिलीवरी के बाद पीरियड्स काफी दर्दभरे हो सकते हैं, अगर ज्यादा दिक्कत हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

    पीरियड्स दोबारा नियमित करने में कैसे मदद करें?

    डिलीवरी के बाद शरीर को दोबारा संतुलन में आने के लिए सही देखभाल की जरूरत होती है. इसमें सबसे पहले पोषण और पानी की भूमिका बेहद अहम है. संतुलित और पौष्टिक आहार हार्मोनल बैलेंस बनाए रखने और शरीर की रिकवरी में मदद करता है. आयरन से भरपूर चीजें जैसे हरी सब्जियां, दालें और प्रोटीन युक्त भोजन डिलीवरी के दौरान हुए खून की कमी को पूरा करने में सहायक होते हैं. वहीं, मछली, अलसी और अखरोट जैसे ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ सूजन कम करने और शरीर को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि इससे शरीर की सभी प्रक्रियाएं बेहतर ढंग से काम करती हैं.

    एक्सरसाइज भी होती है मददगार

    इसके साथ ही हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि भी फायदेमंद होती है. रोजाना टहलना या हल्का व्यायाम ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है, तनाव कम करता है और मूड को भी ठीक रखता है. पोस्टनेटल योग और हल्की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज शरीर की लचीलापन वापस लाने में मदद करती हैं, जिससे हार्मोनल संतुलन सुधरता है और पीरियड्स धीरे-धीरे सामान्य होने लगते हैं.

    ये भी पढ़ें: गर्दन चटकाने की आदत कहीं स्ट्रोक का खतरा तो नहीं, फिजिशियन ने बताया- कब बढ़ जाती है यह परेशानी?

    Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

    Click here to Read More
    Previous Article
    Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी पर कामदेव और रति की पूजा क्यों, वजह जानकर चौंक जाएंगे
    Next Article
    Clove Water Benefits: रात में सोने से पहले जरूर पिएं लौंग का पानी, गहरी नींद लाने में करेगा मदद

    Related हेल्थ Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment