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    प्रेग्नेंसी में पहले महीने से डिलीवरी तक कैसी होनी चाहिए डाइट, एक्सपर्ट से जानें

    1 week ago

    प्रेग्नेंसी हर महिला की लाइफ का बहुत खास और इमोशनल समय होता है. जब किसी महिला को यह पता चलता है कि वह मां बनने वाली है, तो उसकी लाइफ में कई तरह के बदलाव शुरू हो जाते हैं. इस दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, खान-पान की जरूरतें बदल जाती हैं और सेहत का खास ध्यान रखना जरूरी हो जाता है. प्रेग्नेंसी के दौरान सही डाइट लेना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि मां जो भी खाती है उसका सीधा असर बच्चे की ग्रोथ पर पड़ता है इसलिए प्रेग्नेंसी के पहले महीने से लेकर डिलीवरी तक संतुलित और पौष्टिक डाइट लेना बेहद जरूरी है. सही डाइट से मां स्वस्थ रहती है और बच्चे की ग्रोथ भी सही तरीके से होता है. तो आइए जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में पहले महीने से डिलीवरी तक डाइट कैसी होनी चाहिए. 

    प्रेग्नेंसी के दौरान सही डाइट क्यों जरूरी है

    प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर को सामान्य दिनों से ज्यादा पोषण की जरूरत होती है. विशेषज्ञों के अनुसार, एक प्रेग्नेंट महिला को रोजाना लगभग 300 अतिरिक्त कैलोरी की जरूरत होती है. यह एक्स्ट्रा एनर्जी बच्चे की ग्रोथ, मां के स्वास्थ्य और शरीर में हो रहे बदलावों को संभालने के लिए जरूरी होती है. अगर प्रेग्नेंट महिला सही मात्रा में पोषक तत्व नहीं लेती है, तो इससे बच्चे की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है और मां को भी कमजोरी, एनीमिया और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान संतुलित और पौष्टिक डाइट लेना बहुत जरूरी होता है. 

    प्रेग्नेंसी में पहले महीने से डिलीवरी तक डाइट कैसी होनी चाहिए

    1. 1–3 महीना की डाइट - प्रेग्नेंसी में मां और बच्चे दोनों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित और पौष्टिक डाइट बहुत जरूरी होती है. प्रेग्नेंसी के 9 महीनों में शरीर की जरूरतें बदलती रहती हैं, इसलिए हर महीने सही पोषण लेना जरूरी है. जिसमें पहली तिमाही यानी 1–3 महीना बच्चे के दिमाग और रीढ़ की हड्डी का विकास शुरू होता है, इसलिए फोलिक एसिड और आयरन बहुत जरूरी होते हैं. ऐसे में हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल और अंकुरित अनाज, दूध, दही और पनीर, फल, सूखे मेवे या नारियल पानी लें. 

    2. 4–6 महीना की डाइट - दूसरी तिमाही यानी 4–6 महीना में बच्चे की हड्डियों और शरीर का तेजी से विकास होता है, इसलिए कैल्शियम और प्रोटीन की जरूरत बढ़ जाती है. इस समय दूध, दही, पनीर, दाल, राजमा, चना, अंडे , सोयाबीन, हरी सब्जियां, फल और सलाद लें. 

    3. 7–9 महीना की डाइट - तीसरी तिमाही में बच्चे का वजन बढ़ता है और शरीर पूरी तरह विकसित होता है, इसलिए एनर्जी और आयरन की जरूरत ज्यादा होती है. ऐसे में आयरन वाली चीजें (पालक, चुकंदर, खजूर), प्रोटीन (दाल, पनीर, अंडे), कैल्शियम (दूध, दही), फल और फाइबर वाली चीजें खाएं. 

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    प्रेग्नेंसी में किन चीजों से बचना चाहिए

    1. कच्चा या अधपका खाना - कच्चे अंडे, अधपका मांस और मछली में बैक्टीरिया हो सकते हैं जो संक्रमण का कारण बन सकते हैं.

    2. ज्यादा कैफीन - ज्यादा मात्रा में चाय, कॉफी और एनर्जी ड्रिंक पीना प्रेग्रेंसी में नुकसानदायक हो सकता है

    3. शराब - शराब बच्चे के विकास पर बुरा असर डाल सकती है और जन्म दोष का खतरा बढ़ा सकती है. 

    4. जंक फूड - पिज्जा, बर्गर, चिप्स और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड से बचना चाहिए क्योंकि इनमें पोषण कम और फैट ज्यादा होता है.

    5. बिना धोए फल और सब्जियां - इनमें बैक्टीरिया हो सकते हैं, इसलिए हमेशा इन्हें अच्छी तरह धोकर ही खाएं.

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    Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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