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    'पाकिस्तान के पास बचा है सिर्फ ये आखिरी रास्ता...', बलूचिस्तान के पूर्व CM की शहबाज सरकार को चेतावनी

    2 days ago

    पाकिस्तान की सरकार और सेना चाहें बलूचिस्तान में चल रहे सशस्त्र विद्रोह पर कुछ भी अनाप शनाप बयान दे. उसे भारत से जोड़े, लेकिन बलूचिस्तान प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री, 2024 में चुने गए सांसद और बलूचिस्तान नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रमुख सरदार अख्तर मेंगल ने बीते सोमवार (9 फरवरी, 2026) को कहा कि बलूचिस्तान में खून खराबा रोकने के लिए अब सिर्फ एक ही विकल्प बचा है- 'बलूचिस्तान की आजादी.' उन्होंने कहा, 'अब चीजें हाथ से बहुत आगे निकल चुकी हैं और बलूचिस्तान और पाकिस्तान एक साथ नहीं रह सकते हैं, हां एक पड़ोसी के रूप में शांत रहने की संभावना जरूर है.'

    9 फरवरी को लाहौर में आयोजित आसमा जहांगीर कांफ्रेंस में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के राजनैतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह की मौजूदगी में अख्तर मेंगल ने कागज दिखाते हुए बताया कि किस तरह से बलूचिस्तान के पाकिस्तान में विलय के दौरान मोहम्मद अली जिन्ना ने बलूचिस्तान की अवाम के साथ वादे किए थे लेकिन आज 70 साल के बाद उन वादों को पूरा नहीं किया बल्कि लोगों को घरों से उठाया गया और मारा गया.

    बलूचिस्तान के हालात पर जानकारी देते हुए बलूचिस्तान नेशनलिस्ट पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री सरदार अख्तर मेंगल ने जानकारी दी कि 31 जनवरी को जब बलूच लड़ाकों ने एक साथ बलूचिस्तान के कई शहरों में स्थित सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया था तब आम लोग घरों से बाहर निकल कर उनके साथ सेल्फी ले रहे थे, महिलाएं पुराने कपड़े में लपेट कर उन्हें खाना दे रही थीं क्योंकि बलूचिस्तान की जानता को लगता है की बलूच लड़ाके ही उन्हें जुल्म से बचा सकते हैं. साथ ही जब इन्हीं इलाकों में पाकिस्तानी सेना जाती है तो लोग घर में छिप जाते हैं.

    इसके बाद सरदार अख्तर मेंगल ने कहा कि बांग्लादेश की आजादी से पहले जिस तरह से पाकिस्तान की पंजाबी हुकूमत में इस बात को मान लिया था की 'यहाँ हम सही, वहां तुम सही', अब यही बात बलूचिस्तान में खून खराबा रोकने के लिए मानने की जरूरत है. सोमवार को इस बयान के बाद कल मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री सरदार अख्तर मेंगल ने सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद पाकिस्तानी संसद के स्पीकर ने सरदार अख्तर मेंगल का इस्तीफा स्वीकार कर लिया.

    बलूचिस्तान में विद्रोह और गृहयुद्ध का इतिहास बेहद पुराना है और इस समय बलूचिस्तान में विद्रोह का पांचवा चरण चल रहा है जो साल 2000 में शुरू हुआ था. बलूचिस्तान में पहला हथियारबंद विद्रोह साल 1947 में ही बलूचिस्तान को पाकिस्तान में शामिल करने पर ही शुरू हो गया था, फिर दूसरा विद्रोह बलूचिस्तान के कलात इलाके की स्वत्ता छीने जाने पर हुआ.

    तीसरा साल 1962 में बलूचिस्तान में सेना की छावनी बनने पर हुआ, चौथा विद्रोह 1973 से 1977 तक चला जब पाकिस्तान के तत्कालीन तानाशाह जुल्फीकार अली भुट्टो ने बलूचिस्तान की नेशनल अवामी पार्टी की सरकार को बर्खास्त कर दिया था. पांचवां विद्रोह साल 2000 में शुरू हुआ जब परवेज मुशर्रफ ने पहले बिना बलूच जनता की सहमति के ग्वादर पोर्ट का काम शुरू किया और फिर 2006 में नवाब बुगती की हत्या के बाद इसने हथियारबंद विद्रोह का रूप ले लिया. इसके बाद बलूच लिबरेशन आर्मी, बलूच लिबरेशन फ्रंट और बलूच रिपब्लिकन आर्मी जैसे संगठन बने जिन्हें पाकिस्तान ने टेरेरिस्ट ग्रुप घोषित किया हुआ है.

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