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    ऑपरेशन सिंदूर से लेकर स्वदेशी मिसाइल तक...,  77वें गणतंत्र दिवस पर भारतीय सेना ने उड़ाई पाकिस्तान की नींद

    2 days ago

    भारत ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस पर अपनी सांस्कृतिक विरासत, आर्थिक विकास और सैन्य शक्ति का भव्य प्रदर्शन किया, जिसमें युद्धक विमान, स्वदेश निर्मित मिसाइल और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल किये गए घातक हथियार शामिल थे. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की शोभा बढ़ाई. यह सैन्य प्रदर्शन के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण राजनयिक क्षण भी था.

    वार्षिक सैन्य परेड में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और रक्षा उपकरणों की विविध स्रोतों से प्राप्त सामग्री का प्रदर्शन किया गया, जिसमें अमेरिकी निर्मित सैन्य प्रणालियों के साथ-साथ रूसी मूल की सैन्य प्रणालियां भी प्रदर्शित की गईं. हालांकि इस आयोजन का विषय ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने पर था, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी में स्थित कर्तव्य पथ पर परेड में भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर को भी प्रमुखता मिली.

    यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष ने समारोह की शोभा बढ़ाई

    परेड की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष के साथ पारंपरिक बग्गी पर सवार होकर कर्तव्य पथ पर पहुंचने के बाद हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कई अन्य केंद्रीय मंत्री, देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी, विदेशी राजनयिक और वरिष्ठ अधिकारी इस दौरान कर्तव्य पथ पर मौजूद थे.

    ब्रह्मोस समेत ये मिसाइल आए नजर

    पीएम मोदी ने समारोह के बाद सोशल मीडिया पर कहा, ‘गणतंत्र दिवस की परेड ने भारत के सशक्त सुरक्षा तंत्र को प्रदर्शित किया, जो देश की तैयारी, तकनीकी क्षमता और अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति अडिग प्रतिबद्धता दर्शाता है.’ परेड में प्रदर्शित प्रमुख हथियार प्रणालियों में ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल और आकाश हथियार प्रणाली, रॉकेट लॉन्चर प्रणाली 'सूर्यास्त्र', मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन, धनुष तोप और दिव्यास्त्र शामिल था.

    परेड की शुरुआत से पहले, राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत का सर्वोच्च शांति काल वीरता पुरस्कार अशोक चक्र ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को प्रदान किया. शुभांशु शुक्ला ने पिछले साल जून में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पहुंचकर इतिहास रच दिया था और वे इस प्रतिष्ठित उपलब्धि को हासिल करने वाले पहले भारतीय बने थे.

    भारत की सांस्कृतिक विविधता को दिखाया गया

    लगभग 100 कलाकारों ने ‘विविधता में एकता’ की थीम पर आधारित प्रस्तुति के माध्यम से परेड की शुरुआत की. इस प्रस्तुति में विभिन्न संगीत वाद्ययंत्रों का भव्य प्रदर्शन किया गया, जिसने देश की एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को दर्शाया. परेड का नेतृत्व परेड कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने किया जो दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग हैं.

    ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हथियारों को दुनिया ने देखा

    मई की शुरुआत में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना द्वारा तैनात प्रमुख वेपन सिस्टम की रेप्लिका को प्रदर्शित करने वाली त्रि-सेवा झांकी एक प्रमुख आकर्षण रही. ब्रह्मोस और एस-400 जैसी हथियार प्रणालियों के उपयोग के साथ ऑपरेशन सिंदूर के संचालन को दर्शाने वाले, एक कांच के आवरण वाले इंटीग्रेटेड ऑपरेशन सेंटर ने कर्तव्य पथ पर खूब तालियां बटोरीं.

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिये दुश्मन पर घातक वार किया गया था, आकाश मिसाइल प्रणाली और एस-400 ने पाकिस्तान के साथ 7-10 मई के संघर्ष के दौरान सुरक्षा कवच प्रदान किया था. पहली बार, परेड में भारतीय सेना के चरणबद्ध 'बैटल ऐरे फॉर्मेट' का प्रदर्शन किया गया, जिसमें एक हवाई घटक भी शामिल था. 61 कैवलरी युद्धक पोशाक में थी.

    सलामी मंच पर दिखा टी-90 भीष्म टैंक, अपाचे हेलीकॉप्टर

    इसके बाद ‘हाई मोबिलिटी रिकॉन्सेंस व्हीकल’ आया. हवाई सहायता प्रदान करने के लिए स्वदेशी ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और इसका सशस्त्र संस्करण, रुद्र, प्रहार फॉर्मेशन में, युद्ध के मैदान को आकार देने का कौशल प्रदर्शन कर रहा था. इसके बाद लड़ाकू दस्ते में टी-90 भीष्म और मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन के साथ ही अपाचे एएच-64E और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टरों के हवाई समर्थन के साथ सलामी मंच पर दिखा. इसके अलावा नाग मिसाइल सिस्टम (ट्रैक्ड) एमके-2 के साथ बीएमपी-दो इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल भी झांकी में दिखाई दिए.

    इसके बाद स्पेशल फोर्सेस का एक दस्ता आया, जिसमें अजयकेतु ऑल-टेरेन व्हीकल, रंध्वाज रग्ड टेरेन टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम और ध्वंस्क लाइट स्ट्राइक व्हीकल शामिल थे. उनके बाद रोबोटिक डॉग, मानव रहित जमीनी वाहन (यूजीवी) और चार स्वायत्त मानव रहित जमीनी वाहन आए. भारत की नई पीढ़ी के ड्रोन को प्रदर्शित किया गया, जो शक्तिबाण और दिव्यास्त्र थे. ये विशेष वाहनों पर रखे गए थे.

    यूरोपीय यूनियन की सैन्य टुकड़ी परेड में शामिल

    नवगठित भैरव बटालियन के दस्ते ने भी परेड में ध्यान आकर्षित किया. यह बटालियन एक विशेष हमलावर इन्फैंट्री यूनिट है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक इन्फैंट्री और विशेष बलों की क्षमताओं के बीच सेतु बनाना है. यूरोपीय यूनियन की एक सैन्य टुकड़ी भी परेड में शामिल थी. इसने सैन्य स्टाफ का झंडा और समूह के नौसैनिक अभियान, ऑपरेशन अटलांटा और एस्पाइड्स के झंडे भी थे. यूरोप के बाहर इस तरह के आयोजन में यूरोपीय संघ की यह पहली भागीदारी थी.

    भारतीय नौसेना के दस्ते में 144 युवा कर्मी शामिल थे, जिनका नेतृत्व लेफ्टिनेंट करण नाग्याल ने दल कमांडर के रूप में किया. लेफ्टिनेंट पवन कुमार गांडी, लेफ्टिनेंट प्रीति कुमारी और लेफ्टिनेंट वरुण द्रेवेरिया प्लाटून कमांडर के रूप में इसमें शामिल थे.

    नौसेना की झांकी में क्या रहा खास?

    इसके बाद नौसेना की झांकी थी, जिसमें 'एक मजबूत राष्ट्र के लिए मजबूत नौसेना' विषय का एक स्पष्ट चित्रण प्रस्तुत किया गया. इसमें 5वीं शताब्दी के एक जहाज को दर्शाया गया, जिसे अब आईएनएसवी कौंडिन्य के रूप में फिर से तैयार किया गया है. झांकी में मुख्य स्वदेशी सैन्य प्रणालियों का चित्रण प्रस्तुत किया गया. इनमें एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत और उदयागिरि शामिल थे. नाविका सागर परिक्रमा-दो अभियान के हिस्से के रूप में आईएनएसवी तारिणी के परिभ्रमण मार्ग का चित्रण किया गया.

    नौसेना कर्मियों के अलावा, सी कैडेट्स कोर के युवा कैडेट भी परेड में शामिल हुए, जो मुंबई में युवाओं को बुनियादी समुद्री कौशल सिखाने वाला एक गैर-सरकारी संगठन है. ये कैडेट झांकी के साथ मार्च करते हुए दिखाई दिए.

    राफेल सहित इन फाइटर जेट्स ने फ्लाई-पास्ट किया

    भारतीय वायुसेना की टुकड़ी में चार अधिकारी और 144 वायुसैनिक शामिल थे. इसके कमांडर स्क्वाड्रन लीडर जगदीश कुमार थे, स्क्वाड्रन लीडर निकिता चौधरी, फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रखर चंद्राकर और फ्लाइट लेफ्टिनेंट दिनेश सुपरन्यूमररी ऑफिसर के रूप में थे.

    मार्चिंग दस्ते के साथ दो राफेल जेट, दो मिग-29, दो सुखोई-30 और एक जगुआर विमान द्वारा 'स्पीयरहेड' फॉर्मेशन में एक रोमांचक फ्लाई-पास्ट किया गया, जो ‘सिंदूर फॉर्मेशन’ का प्रतीक था.

    रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने अपनी हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल एलआर-एएसएचएम का प्रदर्शन किया. यह स्थिर और गतिशील लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है और इसे विभिन्न पेलोड ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है. यह अपनी तरह की पहली मिसाइल है जिसमें स्वदेशी एवियोनिक्स सिस्टम और हाई एक्यूरेसी सेंसर पैकेज हैं.

    परेड में कुल 30 झांकियां शामिल

    परेड में कुल 30 झांकियां थीं. इनमें 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की और 13 विभिन्न मंत्रालयों, विभागों की थी. झांकियों के जरिए राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने और विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती आत्मनिर्भरता से देश की तेज़ प्रगति का अनूठा दृश्य प्रस्तुत किया गया. 'डेयरडेविल्स' की एक संयुक्त टीम में शामिल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और सशस्त्र सीमा बल के मोटरसाइकिल चालकों ने अपने करतबों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.

    29 एयरक्राफ्ट ने हवा में दिखाई भारत की ताकत

    परेड के सबसे उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षित आयोजनों में से एक, हवाई उड़ान प्रदर्शन में कुल 29 विमानों ने भाग लिया. इन विमानों में 16 लड़ाकू जेट, चार परिवहन विमान और नौ हेलीकॉप्टर शामिल थे. इनमें राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिग-29 और जगुआर विमान शामिल थे. साथ ही सी-130 और सी-295 जैसे रणनीतिक विमान और भारतीय नौसेना के पी-8आई विमान भी मौजूद थे. परेड में अर्जन, वजरंग, वरुण और विजय फॉर्मेशन शामिल थे.

    परेड देखने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 10,000 विशेष अतिथि आमंत्रित किए गए थे. इस साल परेड के लिए निर्धारित स्थानों का नाम देश भर में बहने वाली नदियों के नाम पर रखा गया था- ब्यास, ब्रह्मपुत्र, चंबल, चेनाब, गंडक, गंगा, घाघरा, गोदावरी, सिंधु, झेलम, कावेरी, कोसी, कृष्णा, महानदी, नर्मदा, पेन्नार, पेरियार, रावी, सोन, सतलुज, तीस्ता, वैगई और यमुना.

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