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    नाथद्वारा में आस्था का नया शिखर! राम नवमी पर गिरिराज पर्वत के शिखर पर विराजे श्रीजी के हनुमान

    1 week ago

    नाथद्वारा (राजसमंद): राजस्थान की पावन धरा और पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय की प्रधान पीठ नाथद्वारा ने एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक उपस्थिति दर्ज कराई है. विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा 'विश्वास स्वरूपम' (369 फीट) के गौरव के बाद, अब यह शहर 131 फीट ऊंची ‘श्री श्रीजी के हनुमानजी’ प्रतिमा के साथ अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक नया अध्याय लिख रहा है.

    राम नवमी के पावन पर्व पर इस भव्य प्रतिमा को आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिया गया. गिरिराज पर्वत की चोटी पर स्थापित यह प्रतिमा न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि आधुनिक स्थापत्य कला और इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना भी है.

    चुनौतियों को चीरकर बनी 'अजेय' संरचना

    करीब 500 फीट ऊंचे गिरिराज पर्वत के शिखर पर इस प्रतिमा का निर्माण करना कोई साधारण कार्य नहीं था. बिना किसी पक्के मोटर मार्ग और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बावजूद, तकनीकी विशेषज्ञों ने इस लक्ष्य को हासिल किया.

    तकनीकी विशिष्टताएं:

    • सामग्री: निर्माण में एम-30 ग्रेड आरसीसी और उच्च गुणवत्ता वाले स्टील स्ट्रक्चर का उपयोग किया गया है.
    • मजबूती: प्रतिमा को स्थायित्व देने के लिए लगभग 115 टन स्टील का इस्तेमाल हुआ है.
    • सुरक्षा: बाहरी आवरण के लिए 40 टन यूवी (UV) प्रतिरोधी फाइबर ग्लास का उपयोग किया गया है, जो इसे कड़ाके की धूप, बारिश और तेज हवाओं जैसे मौसम के थपेड़ों से सुरक्षित रखेगा.
    • समय सीमा: इस विराट परियोजना को पूर्ण करने में कुशल कारीगरों और इंजीनियरों की टीम को लगभग तीन वर्ष का समय लगा.

    सौम्यता और समर्पण का प्रतीक स्वरूप

    आमतौर पर हनुमानजी की प्रतिमाएं गदा लिए हुए या रौद्र रूप में देखी जाती हैं, लेकिन नाथद्वारा की इस प्रतिमा की विशेषता इसकी 'मुद्रा' है. यहाँ हनुमानजी पराक्रम की बजाय विनम्रता और समर्पण के भाव में हाथ जोड़े खड़े हैं.

    सबसे भावुक कर देने वाला पहलू यह है कि हनुमानजी का मुख सीधे श्रीनाथजी मंदिर की ओर है. यह दृश्य सेवक और आराध्य के बीच के अटूट संबंध को दर्शाता है और भक्तों को सेवा और भक्ति का मौन संदेश देता है.

    सहयोग और शिल्पकला का संगम

    इस भव्य स्वप्न को धरातल पर उतारने में महाराष्ट्र के प्रमुख उद्योगपति गिरीश भाई शाह ने मुख्य भूमिका निभाई. उनकी संकल्पना को मूर्त रूप देने का श्रेय प्रसिद्ध शिल्पकार नरेश कुमावत, स्ट्रक्चरल डिजाइनर शरद गुप्ता और उनकी तकनीकी टीम को जाता है. निर्माण कार्य संपन्न होने के पश्चात, इस ऐतिहासिक धरोहर को विधिवत रूप से श्रीनाथजी मंदिर मंडल को सौंप दिया गया है.

    पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

    नाथद्वारा अब शिव और शक्ति (हनुमानजी) के अद्भुत संगम का केंद्र बन गया है. एक ओर 369 फीट ऊंची शिव प्रतिमा और दूसरी ओर 131 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा, यह दोनों स्थल मिलकर राजसमंद जिले को विश्व के सबसे बड़े धार्मिक पर्यटन हब के रूप में स्थापित करेंगे. इससे न केवल स्थानीय पर्यटन को गति मिलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे.

    "यह प्रतिमा मात्र एक पत्थर और कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की इंजीनियरिंग और सनातन संस्कृति की अटूट आस्था का प्रतिबिंब है."

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