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    कितनी होती है बीएमसी के पार्षद की सैलरी, क्या-क्या मिलती हैं सुविधाएं?

    1 week ago

    महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को मिली बड़ी जीत के बाद एक बार फिर बृहन्मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी चर्चा में है. बीएमसी को एशिया की सबसे बड़ी नगर निगमों में गिना जाता है. करोड़ों की आबादी वाले मुंबई जैसे महानगर को सुचारू रूप से चलाने में इस नगर निगम की भूमिका बेहद अहम होती है. पानी, सड़क, सफाई, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी बीएमसी के कंधों पर होती है. इस पूरे सिस्टम की सबसे मजबूत कड़ी होते हैं नगर निगम के पार्षद, जो सीधे जनता से जुड़े रहते हैं और उनके मुद्दों को आगे रखते हैं.

    बीएमसी पार्षदों को मिलने वाला मानदेय समय के साथ बदला गया है. साल 2017 से पहले पार्षदों को सिर्फ 10 हजार रुपये प्रति माह मिलते थे. उस समय भी यह रकम उनके काम और जिम्मेदारियों के मुकाबले काफी कम मानी जाती थी. पार्षदों को रोज अपने वार्ड में जाना होता है, लोगों की शिकायतें सुननी होती हैं, अधिकारियों से मिलना होता है और कई बैठकों में शामिल होना पड़ता है. इसके अलावा कई बार उन्हें जनता के बीच अपनी जेब से भी खर्च करना पड़ता है.

    मानदेय में बढ़ोतरी
     
    महंगाई बढ़ने और काम का बोझ लगातार बढ़ने के कारण जुलाई 2017 में बीएमसी ने पार्षदों के मानदेय में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया. इसके बाद पार्षदों का मासिक मानदेय बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया. यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि पार्षद बिना आर्थिक दबाव के अपने काम पर ध्यान दे सकें.

    हालांकि यह मान लेना गलत होगा कि हर पार्षद को हर महीने तय तौर पर एक जैसी रकम मिलती है. बीएमसी पार्षदों की कुल आय पूरी तरह फिक्स नहीं होती. उनकी आमदनी कई बातों पर निर्भर करती है. इसमें सबसे अहम है बैठकों में उनकी मौजूदगी. नगर निगम की आम सभा, स्थायी समिति और दूसरी समितियों की बैठकों में शामिल होने पर पार्षदों को अतिरिक्त भत्ता मिलता है.

    जो पार्षद नियमित रूप से बैठकों में हिस्सा लेते हैं और समितियों में सक्रिय रहते हैं, उनकी कुल मासिक आय थोड़ी बढ़ जाती है. वहीं जो पार्षद कम सक्रिय रहते हैं या बैठकों में कम जाते हैं, उन्हें उतनी अतिरिक्त राशि नहीं मिल पाती. इसी वजह से हर पार्षद की कमाई अलग-अलग हो सकती है.

    मिलती हैं कई सुविधाएं

    सैलरी के अलावा बीएमसी पार्षदों को कई जरूरी सुविधाएं भी दी जाती हैं, ताकि वे अपने वार्ड के विकास कार्य सही तरीके से कर सकें. हर पार्षद को वार्ड विकास के लिए एक तय फंड दिया जाता है. इस फंड का इस्तेमाल सड़क बनाने, नालियों की सफाई, स्ट्रीट लाइट लगाने, पानी की सप्लाई सुधारने, पार्क और शौचालय जैसे कामों में किया जाता है.

    यह फंड हर वार्ड के लिए एक जैसा नहीं होता. मुंबई के कुछ वार्ड बहुत बड़े और घनी आबादी वाले होते हैं, जबकि कुछ वार्ड अपेक्षाकृत छोटे होते हैं. इसी आधार पर वार्ड की जरूरतों को देखते हुए फंड तय किया जाता है. पार्षद इस फंड के जरिए अपने इलाके में छोटे-बड़े विकास कार्य करवा सकते हैं.

    इसके अलावा पार्षदों को बैठक भत्ता और यात्रा भत्ता भी दिया जाता है. नगर निगम मुख्यालय और वार्ड के बीच आने-जाने के लिए यह भत्ता मिलता है. इससे पार्षदों के निजी खर्च में थोड़ी राहत मिलती है. कई बार खास बैठकों, सरकारी कार्यक्रमों और निरीक्षण के लिए अलग से भत्ता भी दिया जाता है.

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