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कम उम्र में गंजेपन जैसी पर्सनल चुनौतियों और करियर के कई उतार-चढ़ाव झेलने के बावजूद अक्षय खन्ना ने कभी खुद पर भरोसा नहीं खोया। सुपरस्टार बनने का उनका सपना भले पूरी तरह साकार न हो पाया हो, लेकिन उन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग के दम पर इंडस्ट्री में एक अलग और मजबूत पहचान जरूर बनाई। 90 के दशक में ‘बॉर्डर’ और ‘ताल’ जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। अक्षय खन्ना ने हमेशा ग्लैमर से ज्यादा अपने किरदारों और कंटेंट को महत्व दिया, यही वजह है कि उनका करियर भले ही पारंपरिक सुपरस्टार जैसा न रहा हो, लेकिन उनकी एक्टिंग को हमेशा सराहा गया। उन्होंने अलग-अलग तरह के रोल्स चुनकर यह साबित किया कि वे हर किरदार में खुद को ढाल सकते हैं। हाल ही में फिल्म ‘धुरंधर’ में उनके शानदार प्रदर्शन ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि वे आज भी अभिनय के मामले में किसी से कम नहीं हैं। उनकी गहराई, स्क्रीन प्रेजेंस और किरदार में पूरी तरह डूब जाने की कला उन्हें खास बनाती है। अक्षय खन्ना उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं, जो कम दिखाई देते हैं, लेकिन जब भी पर्दे पर आते हैं, अपनी छाप छोड़ जाते हैं और साबित करते हैं कि असली खिलाड़ी वही होते हैं, जो वक्त के साथ खुद को साबित करते रहें। आज की सक्सेस स्टोरी में आइए जानते हैं अक्षय खन्ना के करियर और निजी जीवन से जुड़ी कुछ और बातें.. ‘हिमालय पुत्र’ से ‘ताल’ तक अक्षय का सफर अक्षय खन्ना ने 1997 में फिल्म ‘हिमालय पुत्र’ से अपने करियर की आधिकारिक शुरुआत की, जिसे उनके पिता विनोद खन्ना ने प्रोड्यूस किया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास खड़खड़ाहट नहीं पैदा कर पाई, लेकिन इस दौर में उनका नाम जुड़ा रहा उन उभरते युवा अभिनेताओं की लिस्ट में, जिन्हें पिछली पीढ़ी के स्टार्स ने अपने बच्चों के तौर पर नहीं, बल्कि अभिनय की क्षमता के आधार पर देखा। उसी साल रिलीज हुई ‘बॉर्डर’ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अक्षय खन्ना सिर्फ स्टार किड नहीं, बल्कि एक अलग स्टाइल और इंटेंसिटी लेकर आए अभिनेता हैं। जे.पी. दत्ता की इस मल्टीस्टारर फिल्म में उनकी डिलीवरी ने न केवल क्रिटिक्स का ध्यान खींचा, बल्कि यह फिल्म उनके करियर की एक ऑल‑टाइम ब्लॉकबस्टर बन गई। 1999 में सुभाष घई की फिल्म 'ताल' ने उनके लुक, स्टाइल और भावनात्मक गहराई को नई ऊंचाई दी। फिल्म में उनका रोमांटिक किरदार दर्शकों को खासा पसंद आया। यह आज भी उनकी यादगार रोमांटिक फिल्मों में शुमार है। फ्लॉप फिल्मों से जूझता करियर सफल शुरुआत के बावजूद 2000 के दशक की शुरुआत अक्षय खन्ना के लिए चुनौतीपूर्ण रही। ‘आ अब लौट चलें’ जैसी फिल्मों में काम करने के बावजूद वे लगातार हिट फिल्में नहीं दे पाए। उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकीं, जिससे उनका करियर अस्थिर हो गया। इस दौर में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाने की कोशिश की, लेकिन लगातार सफल फिल्मों की कमी के कारण वे टॉप स्टार्स की रेस में पीछे रह गए। गंजेपन और असफलता ने तोड़ा आत्मविश्वास अक्षय खन्ना के करियर का सबसे कठिन दौर वह भी था जब उन्हें कम उम्र में ही गंजेपन का सामना करना पड़ा। मिड-डे को दिए इंटरव्यू में अक्षय खन्ना ने कहा था। मेरे साथ ये बहुत कम उम्र में होने लगा था। उस समय मुझे ऐसा लगता था जैसे किसी पियानो बजाने वाले का हाथ कट गया हो। एक एक्टर के लिए ये वैसा ही है, क्योंकि आपकी शक्ल-सूरत बहुत मायने रखती है। जब आप इस सच्चाई को स्वीकार कर लेते हैं, तब ये आपको कम परेशान करता है। लेकिन उससे पहले जो अनुभव होता है, वो बहुत मुश्किल होता है। जैसे आप सुबह उठें, अखबार देखें और महसूस करें कि मुझे कुछ भी साफ नहीं दिख रहा, मैं इसे पढ़ नहीं पा रहा हूं। मुझे चश्मे की जरूरत है। आप सोचते हैं कि अचानक क्या हो गया, मेरी आंखें काम क्यों नहीं कर रहीं? मान लीजिए आप एक खिलाड़ी हैं, क्रिकेटर या फुटबॉलर और आपको पता चले कि आपके घुटने की सर्जरी होगी। ये दिल तोड़ने वाला होता है, क्योंकि इससे आपके करियर के एक-दो साल चले जाते हैं। मेरे लिए प्रीमैच्योर बाल्डिंग कुछ वैसा ही था। ‘दिल चाहता है’ बनीं करियर की टर्निंग पॉइंट अक्षय खन्ना की सबसे बड़ी ताकत हमेशा उनकी अभिनय क्षमता रही है। 2001 में आई फिल्म ‘दिल चाहता है’ उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। फिल्म में ‘सिड’ के किरदार में उनके संयमित और गहराई भरे अभिनय ने दर्शकों और समीक्षकों दोनों का दिल जीत लिया। इसके अलावा अक्षय ने ‘हमराज’, ‘हंगामा’ और ‘दीवानगी’ जैसी फिल्मों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इन फिल्मों ने उन्हें एक वर्सेटाइल अभिनेता के रूप में स्थापित किया, हालांकि व्यावसायिक रूप से वे लगातार सुपरहिट फिल्मों की कतार नहीं लगा सके, और उन्हें बॉलीवुड में सुपरस्टार का दर्जा नहीं मिल पाया। इस पर खुद अक्षय खन्ना का नजरिया काफी साफ और व्यावहारिक रहा है। सुपरस्टार बनने के लिए बड़ी और कल्ट फिल्मों की जरूरत अक्षय कहते हैं- किसी कलाकार का सुपरस्टार बनना सिर्फ उसकी एक्टिंग या मेहनत पर निर्भर नहीं करता, बल्कि सही समय पर सही फिल्म मिलना बेहद जरूरी होता है। उनके मुताबिक- आपको सुपरस्टार बनाने का काम फिल्में करती हैं। जब तक आपके पास ‘गदर: एक प्रेम कथा’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ और ‘हम आपके हैं कौन’ जैसी बड़ी और कल्ट फिल्में नहीं होतीं, तब तक उस स्तर तक पहुंचना मुश्किल है। सुपरस्टार बनना खुद के हाथ में नहीं होता है अक्षय ने यह भी माना कि एक कलाकार के हाथ में बहुत सीमित चीजें होती हैं। वह सिर्फ अपनी तरफ से पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ काम कर सकता है, लेकिन किसे कौन-सी फिल्म मिलेगी, यह काफी हद तक किस्मत और मौके पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा- आप सिर्फ कोशिश कर सकते हैं। अगर आपके नसीब में वैसी फिल्में हैं, तो वो आपको मिलेंगी, नहीं तो नहीं। अपने करियर को लेकर अक्षय खन्ना किसी तरह की कड़वाहट नहीं रखते। उनका मानना है कि उन्हें जो भी काम मिला, उसमें उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की है और आगे भी वह बेहतर काम करने की उम्मीद रखते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह अब पहले से ज्यादा परिपक्व हो चुके हैं और भविष्य में और मजबूत किरदारों के साथ दर्शकों के सामने आना चाहते हैं। 'तारे जमीन पर’ अमोल गुप्ते ने अक्षय खन्ना के लिए लिखी थी फिल्म ‘तारे जमीन पर’ में अक्षय खन्ना काम करने वाले थे। लेकिन फिल्म आखिरकार आमिर खान के हाथ चली गई। मिड-डे से बातचीत के दौरान अक्षय खन्ना ने बताया था कि फिल्म के लेखक‑निर्देशक अमोल गुप्ते ने उन्हें स्क्रिप्ट सुनाने का प्रयास किया, लेकिन आमिर ने इसे पहले सुन लिया और फिल्म करने का फैसला कर लिया। अक्षय खन्ना ने बताया कि 'तारे जमीन पर' के लिए लेखक अमोल गुप्ते चाहते थे कि वे खुद उनके साथ फिल्म करें। उन्होंने आमिर से संपर्क किया क्योंकि वे आमिर के दोस्त थे। कहा, "मैं वास्तव में अक्षय को यह कहानी सुनाना चाहता हूं। मैं उन्हें नहीं जानता, लेकिन तुमने अभी उनके साथ 'दिल चाहता है' में काम किया है। क्या तुम उनसे फोन पर कह सकते हो कि मैं उन्हें एक स्क्रिप्ट सुनाना चाहता हूं?" आमिर ने उनसे कहा कि मैं तब तक किसी स्क्रिप्ट को रेकेमेंड नहीं कर सकता, जब तक मैं खुद उसे न सुन लूं। इसलिए पहले मुझे सुनाओ और अगर यह मुझे पसंद आ गई तो अक्षय को बताऊंगा। आमिर को ये स्क्रिप्ट इतनी पसंद आई कि उन्होंने ही खुद वो फिल्म कर ली ‘तारे जमीन पर’’ 2007 में रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही। आमिर ने फिल्म के निर्देशन और प्रोडक्शन का जिम्मा खुद लिया और साथ ही मुख्य भूमिका भी निभाई। फिल्म ने बच्चों की शिक्षा, उनकी कल्पनाशीलता और माता‑पिता के रिश्तों पर एक नया दृष्टिकोण पेश किया। अक्षय ने बताया कि उन्हें यह अवसर छोड़ने में अफसोस नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड में ऐसे मौके आते-जाते रहते हैं और कभी-कभी चीजे हमारे हाथ से चली जाती हैं। लंबे गैप और इंडस्ट्री से दूरी अक्षय खन्ना उन अभिनेताओं में रहे हैं जो लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते हैं। उनके करियर में कई बार लंबे गैप आए। यहां तक कि एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने लगभग 5-6 साल तक फिल्मों से दूरी बना ली। इस तरह के ब्रेक को लेकर इंडस्ट्री में भी चर्चा रही कि वह अपने तरीके से काम करना पसंद करते हैं। अक्षय खन्ना कहते हैं- मैंने कुछ समय के लिए खुद ही फिल्मों से दूरी बना ली थी। उस वक्त शायद लगा कि ब्रेक लेना ठीक रहेगा, लेकिन बाद में समझ आया कि इंडस्ट्री में अगर आप रुक जाते हैं, तो लोग मान लेते हैं कि आप अब काम नहीं कर रहे। फिर वापसी करना आसान नहीं होता। जब मैं वापस आया, तो मुझे काम मिलने में दिक्कत हुई। फिल्म बनाना भी एक लंबी प्रक्रिया है। अच्छी स्क्रिप्ट मिलना, सही प्रोजेक्ट का इंतजार करना,ये सब समय लेते हैं। इसलिए भले ही मैं ज्यादा काम करना चाहता हूं, लेकिन चीजें अपने समय से ही होती हैं। दमदार वापसी और नई ऊंचाइयां लंबे ब्रेक के बाद अक्षय खन्ना ने 2017 में फिल्म ‘मॉम’ से शानदार वापसी की, जिसमें उनके नेगेटिव किरदार को काफी सराहा गया। इसके बाद ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ और ‘सेक्शन 375’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया। इसके बाद उनके करियर का सबसे मजबूत फेज शुरू हुआ। ‘दृश्यम 2’ में उनका सख्त और प्रभावशाली पुलिस ऑफिसर का किरदार दर्शकों को खूब पसंद आया। वहीं फिल्म ‘छावा’ में औरंगजेब के किरदार में उनकी खूब तारीफ हुई। फिल्म में अक्षय के वनलाइनर, हाव-भाव और प्रॉस्थेटिक मेकअप ने उनके रोल को यादगार बना दिया। वहीं, ‘धुरंधर’ ने अक्षय खन्ना के करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इस फिल्म में गैंगस्टर रहमान डकैत के किरदार में उन्होंने जिस गहराई और निभाया, उसने उन्हें एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया। यह फिल्म उनके करियर की सबसे बड़ी सफलताओं में गिनी जा रही है और दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों से भी उन्हें जबरदस्त सराहना मिली। ______________________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... आदित्य धर की लिखी स्क्रिप्ट्स चुराकर हिट फिल्में बनीं:शूटिंग से पहले कई प्रोजेक्ट बंद हुए, डिस्लेक्सिया बीमारी को हराकर बने बॉलीवुड के धुरंधर
डिस्लेक्सिया जैसी गंभीर बीमारी, पढ़ाई में कमजोरी और बार-बार टूटते सपनों के बावजूद आदित्य धर ने हार नहीं मानी। मुंबई आकर उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया। कभी स्क्रिप्ट चोरी हुईं, तो कभी फिल्में शूटिंग से ठीक पहले बंद हो गईं। कई बार लगा कि अब सफर खत्म हो गया, लेकिन उन्होंने हर बार खुद को संभाला और एक कोशिश और की।पूरी खबर पढ़ें..