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    जावेद अख्तर @81, बंटवारे को ऐतिहासिक भूल बताया:आरएसएस की तुलना तालिबान से कर दी थी, बुर्का-घूंघट को व्यक्तिगत पसंद नहीं, ब्रेनवाश का नतीजा कहा

    5 days ago

    जावेद अख्तर, बॉलीवुड के महान गीतकार, पटकथा लेखक और राज्यसभा के पूर्व सदस्य। उनकी धारदार कलम ने 'शोले', 'दीवार', ‘डॉन’, 'मिस्टर इंडिया' जैसी कालजयी फिल्मों को अमर संवाद दिए, तो उनकी बेबाक जुबान ने समाज, धर्मनिरपेक्षता और राजनीति पर ऐसे कड़े प्रहार किए जो सीधे अंतस को भेदते हैं। निडरता उनकी शख्सियत का आभूषण है। जावेद अख्तर ने भारत के विभाजन को ऐतिहासिक भूल बताया था। जिसकी वजह से अनावश्यक दुश्मनी पैदा हो गई। कभी आरएसएस की तुलना तालिबान से की, तो बुर्का और घूंघट को सामाजिक दबाव बताया। सोशल मीडिया, टीवी बहसों और मंचों पर उनके इस तरह के बयान अक्सर तहलका मचाते हैं जो नास्तिकता, धार्मिक कट्टरता, पाकिस्तान, महिलाओं की स्वतंत्रता और कलाकार की सामाजिक जिम्मेदारी जैसे गहन मुद्दों को छूते हैं। आज जावेद अख्तर के 81वें जन्मदिन पर जानिए उनके ऐसे कुछ खास बयान, जिन्होंने राष्ट्रव्यापी बहसें छेड़ दी थीं। भारत में नास्तिक बनना मुश्किल जावेद अख्तर ने बरखा दत्त के पॉडकास्ट में खुलासा किया था कि वे नास्तिक हैं, लेकिन मुस्लिम परिवार से होने के कारण पहचान मुस्लिम ही रह गई। उन्होंने कहा था- मैं मुस्लिम नास्तिक हूं। धर्म नहीं मानता, लेकिन समाजी प्रेशर में नास्तिक बनना मुश्किल है। नास्तिकों की गे लोगों जैसी हालत है। मुस्लिम मुझे अमर नाम देते हैं, हिंदू 'पाकिस्तान जाओ' चिल्लाते हैं। दोनों तरफ से गालियां मिलती हैं। मैं ईद-होली-दिवाली सभी त्योहार मनाता हूं। पाकिस्तान में सेकुलरिज्म लगभग मर चुका है भारत-पाक संबंधों पर एक चर्चा में जावेद अख्तर ने पाकिस्तान की सामाजिक स्थिति पर ये तीखा प्रहार किया। उनका मानना था कि वहां धर्मनिरपेक्षता नाममात्र को रह गई है और कट्टरवाद हावी हो चुका है। पाकिस्तान के कुछ बुद्धिजीवियों ने इसे ओवर-जनरलाइजेशन कहा, लेकिन भारत में ये बयान साहित्यिक सर्कल तक सीमित रहा। जावेद ने उदाहरण देते हुए कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत देखकर साफ है कि सेक्युलरिज्म खतरे में है। नरक और पाकिस्तान में से नरक चुनूंगा 17 मई 2025 को मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत की किताब 'नरकातला स्वर्ग' के विमोचन पर जावेद अख्तर ने पाकिस्तान को नरक से बदतर बताते हुए तीखा बयान दिया था। उन्होंने कहा था- अगर पाकिस्तान और नरक में से चुनना हो तो मैं नरक चुनूंगा। एक पक्ष कहता है तुम काफिर (नास्तिक) हो और नरक में जाओगे। दूसरा पक्ष कहता है जिहादी, पाकिस्तान जाओ। दोनों तरफ से मुझे गाली दी जाती है। भारत का विभाजन गलत था, पाकिस्तान हिंदुस्तान से ही निकला 2023 में लाहौर के फैज फेस्टिवल में जावेद अख्तर ने स्पष्ट कहा कि भारत का विभाजन ऐतिहासिक भूल थी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान हिंदुस्तान का हिस्सा था, जो 1947 में दो देशों में बंट गया। अख्तर ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के लोग मूल रूप से एक ही सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े हैं और विभाजन ने अनावश्यक दुश्मनी पैदा की। इस बयान पर पाकिस्तानी दर्शकों ने तालियां बजाईं, लेकिन भारत-पाक मीडिया में विवाद छा गया। लाउडस्पीकर पर अजान को बंद होना चाहिए 2020 में जावेद अख्तर ने ट्वीट कर कहा था कि भारत में लगभग 50 साल तक लाउडस्पीकर पर अजान हराम थी, बाद में यह हलाल हो गई, लेकिन अब इसकी कोई सीमा नहीं रही। उन्होंने जोर देकर कहा कि अजान ठीक है, पर लाउडस्पीकर दूसरों के लिए असुविधा पैदा करता है, इसलिए इसे बंद कर देना चाहिए। खासकर रमजान के समय उन्होंने अपील की कि मुसलमान खुद ही इसे रोकें। इस बयान पर एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी समेत कई लोगों ने आपत्ति जताई और विवाद छा गया। अख्तर ने ध्वनि प्रदूषण को सामाजिक मुद्दा बताया था। धर्म ने इंसान को डरपोक बनाया है 2024 में इंडियन एक्सप्रेस के एक इवेंट में जावेद अख्तर ने धर्म को 'अंधेरे युग' की उपज कहा था, जो आधुनिक विज्ञान से टकराता है। जावेद अख्तर ने कहा था- धर्म ने इंसान को बेहतर नहीं, बल्कि ज्यादा डरपोक बनाया है। धर्म ने डर को हथियार बनाया है, जो इंसान की प्रगति में बाधा है। जावेद अख्तर ने यह भी कहा था कि वे किसी भी धार्मिक किताब को अंतिम सत्य नहीं मानते हैं। उनका मानना है कि धार्मिक ग्रंथ मानव-रचित हैं, इसलिए इन्हें अंधभक्ति से परे सोचना चाहिए। उर्दू को मुस्लिम भाषा कहना सबसे बड़ी नाइंसाफी जावेद अख्तर ने 2024 में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के एक कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से कहा था कि उर्दू को मुस्लिम भाषा कहना सबसे बड़ी नाइंसाफी है। उन्होंने बताया था कि 200 साल पहले हिंदी-उर्दू एक ही भाषा थीं, ब्रिटिश नीतियों ने इन्हें विभाजित किया। भाषाएं धार्मिक नहीं, बल्कि क्षेत्रीय होती हैं। हिंदी हिंदुओं की नहीं, तो उर्दू मुसलमानों की कैसे हुई। जावेद अख्तर ने मिसाल दी थी कि मध्य पूर्व या उज्बेकिस्तान के मुस्लिम उर्दू नहीं बोलते, लेकिन भारत के कई इलाकों में यह प्रचलित है। उन्होंने उर्दू को हिंदुस्तान की मूल भाषा बताया, जो संस्कृति की देन है, न कि किसी एक धर्म की। प्रेमचंद, निराला जैसे हिंदू लेखकों ने उर्दू को समृद्ध किया। जावेद अख्तर का यह बयान भाषा-धर्म विभेद पर तीखा प्रहार था। भीड़ का फैसला लोकतंत्र के लिए जहर बताया 2019 में गौरक्षा हिंसा और मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर जावेद अख्तर ने टिप्पणी की थी। उन्होंने भीड़ का फैसला लोकतंत्र के लिए जहर बताया था। जावेद अख्तर ने राजनीतिक दलों का नाम लिए बिना कहा था कि कानून हाथ में लेना अराजकता को जन्म देगा। जावेद अख्तर ने लोगों से अपील की थी कि कानून का राज बचाओ, वरना देश बर्बाद हो जाएगा। यह बयान झारखंड और अन्य जगहों की घटनाओं के बाद आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने भी मॉब लिंचिंग पर चिंता जताई थी। कलाकार का काम चाटुकारिता नहीं, समाज से सवाल उठाना है कपिल सिब्बल के यूट्यूब चैनल 'दिल से विद कपिल सिब्बल' के साथ बातचीत के दौरान जावेद अख्तर ने बॉलीवुड में सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों और सरकार की आलोचना न करने वालों को लेकर बात की थी। जावेद अख्तर ने कहा था- कलाकारों का मूल कर्तव्य सत्ता की चाटुकारिता नहीं, बल्कि समाज से सवाल उठाना है। उन्होंने अमेरिकी अभिनेत्री मेरिल स्ट्रीप का उदाहरण दिया, जो खुलकर आलोचना करती हैं, जबकि भारत में एजेंसी छापों का डर हावी है। बुर्का-घूंघट को सामाजिक दबाव बताया SOA लिटरेरी फेस्टिवल 2025 में जावेद अख्तर ने बुर्का-घूंघट को सामाजिक दबाव बताया था। उन्होंने कहा था- ‘’लड़कियां अपना चेहरा क्यों ढंकती हैं? चेहरे में क्या अश्लील है? यह व्यक्तिगत पसंद नहीं, ब्रेनवाश का नतीजा है।" जावेद अख्तर ने घूंघट को भी इसी दबाव से जोड़ा, जो महिलाओं की आजादी छीनता है। इससे पहले भी कई बार जावेद अख्तर बुर्का बैन के साथ घूंघट पर रोक की मांग कर चुके हैं। आरएसएस की तुलना तालिबान से कर दी थी जावेद अख्तर ने 2021 में NDTV पर एक टीवी बहस में आरएसएस की तुलना तालिबान से कर दी थी। जावेद अख्तर ने कहा था- "हिंदू राष्ट्र चाहने वालों और तालिबान की सोच में वैचारिक समानता है।" उन्होंने RSS समर्थकों की कट्टर सोच को तालिबान जैसा बताया, जो धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देती है। इस बयान पर BJP, RSS और शिवसेना भड़क उठे, आरएसएस नेता ने शिकायत दर्ज की, माफी मांगने की मांग की। मुंबई कोर्ट में मानहानि केस चला, जो बाद में सुलझ गया। लैंगिक हिंसा के दोहरे मापदंड पर सवाल उठाया जून 2025 में NDTV क्रिएटर्स मंच पर जावेद अख्तर ने मेघालय हनीमून हत्याकांड और मेरठ ड्रम मर्डर केस पर समाज के गुस्से पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था- "महिलाओं को जिंदा जला दिया जाता था, पति-ससुराल वाले पीटते थे, तब समाज का आक्रोश कहां था? कितना बेशर्म समाज है।" दो महिलाओं की हत्याओं पर सदमा होने पर उन्होंने कटाक्ष किया कि पुरुष अत्याचार पर चुप्पी क्यों? जावेद अख्तर ने प्रेशर कुकर फटने वाली बहुओं का पुराना किस्सा बताया, जो ससुराल का दबाव दर्शाता है। समाज को आईना दिखाते हुए उन्होंने लैंगिक हिंसा पर दोहरा मापदंड उजागर किया। इस्लाम में हराम है फिर भी मुसलमान पीते हैं दिसंबर 2025 में मुफ्ती शमाइल नदवी के साथ 'Does God Exist' डिबेट में जावेद अख्तर ने शराब पर चौंकाने वाले खुलासे किए थे। उन्होंने कहा था- मुसलमानों में शराब पीने का प्रतिशत हिंदुओं से ज्यादा है, जबकि इस्लाम में हराम है। मैं खुद शराब पीता था और शराब के नशे में मैं गंदी भाषा इस्तेमाल करता था, दूसरा इंसान बन जाता था।" जिन्ना पर तंज कसते हुए जावेद अख्तर ने कहा था- "वे शराब पीते थे, सूअर खाते थे, लेकिन कई मुसलमान शराब पीते हैं और सूअर से डरते हैं।" पुरुषवादी सोच वाली अश्लील फिल्मों की आलोचना की अक्टूबर 2025 में अनंतरंग मानसिक स्वास्थ्य सांस्कृतिक महोत्सव के उद्घाटन में जावेद अख्तर ने पुरुषवादी सोच वाली अश्लील फिल्मों की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा कहा था- ‘इस देश में अश्लीलता आसानी से सेंसर से पास हो जाती है, जो पुरुषवादी दृष्टिकोण से महिलाओं को अपमानित करती है। समाज को आईना दिखाने वाली फिल्में रुक जाती हैं।" जावेद अख्तर ने दर्शकों, खासकर पुरुष मानसिकता को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था कि अगर पुरुषों का मानसिक स्वास्थ्य सुधरे तो ऐसी फिल्में न बनेंगी, न चलेंगी। फिल्म समाज की खिड़की है, इसे बंद करने से सच्चाई नहीं छिपती। ________________________ बॉलीवुड से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें.... ऋतिक रोशन @52, डॉक्टर्स ने एक्टर बनने से रोका:फिल्मों के सेट पर झाड़ू लगाई, कमजोरी को अपनी ताकत बनाया, कहलाए बॉलीवुड के ग्रीक गॉड अगर बॉलीवुड में किसी एक्टर से अपनी कमजोरी को ताकत में बदलकर सफलता के शीर्ष पर पहुंचने की प्रेरणा मिलती है, तो वो बॉलीवुड के 'ग्रीक गॉड' कहे जाने वाले ऋतिक रोशन हैं। एक्टर के लिए शब्दों का सही उच्चारण, फिजिकल फिटनेस, डांस और एक्शन की भारी डिमांड रहती है। यही ऋतिक की सबसे बड़ी कमजोरी थी।पूरी खबर पढ़ें....
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