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बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के लैला खान हत्याकांड के पार्ट-1 में अब तक आपने पढ़ा कि कैसे लैला खान छुट्टी मनाने फार्महाउस गईं और अचानक लापता हो गईं। जांच में सामने आया कि सिर्फ लैला ही नहीं, उनके परिवार के 6 और लोग लापता हैं। एक साल तक लैला की कोई खबर नहीं मिली और फिर कश्मीर में एक बम ब्लास्ट हुआ, उस जगह के पास ही लैला की मां के नाम पर रजिस्टर्ड कार मिली। जांच में एक्ट्रेस लैला खान के सौतेले पिता परवेज टाक की गिरफ्तारी हुई। परवेज जांच टीम को फार्महाउस ले गया, जहां एक-एक कर 6 कंकाल बरामद किए गए। इनमें परिवार के पालतू कुत्ते का भी कंकाल था। लैला खान हत्याकांड, पार्ट- 2 में जानिए कैसे और क्यों हुआ परिवार के 6 लोगों का कत्ल…. 10 जुलाई 2012 को परवेज टाक को सदर्न मुंबई किला कोर्ट में पेश कर क्राइम ब्रांच ने कस्टडी ली। मामला गंभीर था, तो जांच टीम सख्ती करने से नहीं चूकी। हाथ-पैर बांधकर परवेज टाक को तबीयत से पीटा गया, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर फार्महाउस से कंकाल निकाले गए। इससे पहले ही उसने फरवरी 2011 की रात की पूरी कहानी सुना दी थी। परवेज कश्मीर का रहने वाला था। देखने में सुंदर और आम कद-काठी का था। उसने कश्मीर में एक चुनाव लड़ा, जिसमें खूब पैसे लगे, लेकिन वो चुनाव हार गया। कर्जा बढ़ गया तो वो गुजारे के लिए दिल्ली आकर काम ढूंढने लगा। यहीं उसकी मुलाकात लैला की मां सेलिना से हुई। सेलिना देखने में सुंदर थीं और रहन-सहन भी काफी ग्लैमरस था। दोनों की पहले दोस्ती हुई और फिर अच्छी बातचीत होने लगी। सेलिना ने परवेज को बताया था कि उनकी बेटी हीरोइन है। परवेज को लगा कि अगर वो सेलिना के संपर्क में रहा तो उसे भी फिल्मों में काम मिल सकता है। जब एक रोज परवेज ने सेलिना से कहा कि वो फिल्मों में काम करना चाहता है तो जवाब मिला कि इस काम के 25 लाख लगेंगे। परवेज ने किसी तरह 12 लाख जुटा कर सेलिना को दिए और कुछ समय बाद मुंबई पहुंच गया। समय के साथ सेलिना और परवेज में नजदीकियां बढ़ने लगीं और दोनों ने 2010 में शादी कर ली। परवेज अब सेलिना के घर में ही उनके बच्चों के साथ रहने लगा। परिवार ने उसे अपना लिया। दिन गुजरने लगे और परवेज को ये अंदाजा लगाने में देर नहीं लगी कि सेलिना ने पैसों के लिए उसे फिल्मों में काम दिलवाने का झूठा झांसा दिया था। पैसे वापस मांगने पर उसके सेलिना से झगड़े बढ़ने लगे। लैला और उसके भाई-बहनों का भी रवैया उसके लिए बिगड़ने लगा। परवेज से शादी के बावजूद सेलिना पहले पति नादिर पटेल और दूसरे पति आसिफ शेख से मिला करती थीं। इसके अलावा भी उनका कई पुरुषों से मिलना-जुलना था। 2010 के आखिर में सेलिना, परवेज को मुंबई में अकेले छोड़कर परिवार के साथ अफ्रीका चली गईं। कुछ महीने वहां रहने के बाद वो दुबई गईं। परवेज मुंबई में अकेला था, उसके पास कोई खास पैसे नहीं थे, बमुश्किल उसका गुजारा हुआ। सेलिना ने उसका पासपोर्ट भी छिपा दिया, जिससे वो भाग न सके। 3 महीने बाद सब मुंबई लौटे, परवेज अब भी घर पर ही था। कुछ दिनों बाद उसे पता चला कि सेलिना मुंबई की अपनी सारी प्रॉपर्टी बेचकर बच्चों के साथ दुबई शिफ्ट हो रही हैं। उनका परवेज को साथ ले जाने का कोई प्लान नहीं था। प्रॉपर्टी बेचने के लिए वो दूसरे पति आसिफ शेख की मदद ले रही थीं। परवेज के लिए मुंबई में कुछ नहीं था, उसके 12 लाख डूब चुके थे और कश्मीर लौटने का सवाल ही नहीं था। तभी उसने एक प्लान बनाया। प्लान था, बेइज्जती का बदला लेना और प्रॉपर्टी पर कब्जा। उसने पूरे परिवार को खत्म करने की साजिश रची। मुंबई जैसे शोर-शराबे वाले शहर में पूरे परिवार को अकेले मार पाना मुश्किल होता, तो उसने साजिश के लिए इगतपुरी फार्महाउस चुना। वो जानता था कि लैला का परिवार अक्सर छुट्टियां मनाने वहीं जाता था। एक रोज उसने सेलिना से कहा कि इगतपुरी वाले फार्महाउस में एक वॉचमैन रख लेना चाहिए। खाली पड़े फार्महाउस की देख-रेख भी हो जाएगी और वहां का सामान भी सुरक्षित रहेगा। सेलिना ने साफ इनकार कर दिया। उनके लिए ये फिजूल खर्च था। कई दिनों तक वो यही दोहराता रहा और आखिरकार सेलिना मान गईं। वॉचमैन रखने की जिम्मेदारी परवेज ने अपने कंधों पर ली। ये उसके लिए सुनहरा मौका था। उसने वॉचमैन के नाम पर कश्मीर से अपने दोस्त साकिर हुसैन मानी को बुलाया, जो इस साजिश में उसकी मदद करने वाला था। 8 फरवरी 2011 सभी फार्महाउस पहुंचे। लैला, लैला की मां सेलिना, बहन अजमीना (आफरीन), जारा, भाई इमरान और कजिन रेशमा। पालतू कुत्ता भी साथ था। सभी ने मिलकर डिनर किया और फिर बच्चे सोने के लिए नीचे वाले कमरों में चले गए, जबकि परवेज और सेलिना पहली मंजिल के कमरे में रुके। देर रात हो चुकी थी, लेकिन परवेज के अंदर एक हलचल थी। वो बार-बार झांकते हुए सबके सोने की तसल्ली करता रहा। उस समय सेलिना जाग रही थीं। परवेज ने तुरंत दोस्त साकिर मानी को बुला लिया। पूरे फार्महाउस में सन्नाटा था, आसपास कोई न था। तभी उसने मौका पाते ही सेलिना के सिर पर लोहे की रॉड से जोरदार हमला किया। पहले हमले के बाद सेलिना चीख पड़ीं और फर्श पर गिर पड़ीं। परवेज ने एक और हमला किया। सेलिना की चीख, ग्राउंड फ्लोर के कमरों तक पहुंची, लैला जाग रही थीं, वो भागते हुए सीढ़ियों से ऊपर बढ़ीं। देखा मां फर्श पर खून से लथपथ पड़ी कराह रही थीं और परवेज के हाथ में हथियार था। लैला कुछ समझ पातीं, उससे पहले ही परवेज ने एक-एक कर उन पर कई हमले कर दिए। चीखें सुनकर पहली मंजिल पर जैसे-जैसे भाई-बहन पहुंचे, वैसे-वैसे परवेज एक-एक कर सबको मारता चला गया। उन 5 महिलाओं में इमरान ही इकलौता लड़का था, लेकिन वो भी दो हट्टे-कट्टे आदमियों के सामने कब तक टिक पाता। उसे भी मार दिया गया। सभी फर्श पर तड़प रहे थे, खून बहता चला जा रहा था, लेकिन परवेज को अब भी तसल्ली नहीं हुई। उसने रॉड उठाई और सबके सिर पर लगातार तब तक मारता रहा, जब तक उनकी सांसें रुक नहीं गईं। अब बारी थी लाशों को ठिकाने लगाने की। इसका इंतजाम वो महीनेभर पहले सेलिना से ही करवा चुका था। परवेज ने सेलिना से कहा था कि वो फार्महाउस में एक स्विमिंग पूल बनवाना चाहता है। उन्होंने इनकार किया, लेकिन उसने जिद कर पैसे ले लिए। एक जेसीबी बुलवाई और जनवरी में ही फार्महाउस के पीछे एक बड़ा गड्ढा खुदवा लिया। परवेज और साकिर ने पहले इमरान, जारा और रेशमा की लाशों को गड्ढे में डाला, फिर खून से सने गद्दे ढक दिए। थोड़ी मिट्टी डाली और बची हुई लैला, सेलिना और आफरीन और कुत्ते की लाशों को उनके ऊपर रखा। हड़बड़ाहट इस कदर थी कि परवेज ने लाशों से गहने तक नहीं हटाए। एक साल बाद जब कंकाल मिले तो लैला के गले की चेन, सेलिना के कंगन, आफरीन की अंगूठी जस की तस थी। दोनों ने फार्महाउस से हर कीमती सामान उठाया और पूरे फार्महाउस में आग लगा दी। एक कार को साकिर लेकर निकला और दूसरी कार से परवेज कश्मीर आया। जिसे उसने किश्तवाड़ में किराए की दुकान लेकर पार्क कर दिया। गुजारे के लिए वो दिहाड़ी का काम करने लगा। 14 साल बाद कोर्ट ने दी सजा-ए-मौत 2011 में हुई लैला खान और परिवार की हत्या का केस 13 सालों तक चला। आखिरकार 24 मई 2024 को मुंबई सत्र न्यायालय ने परवेज टाक को परिवार के 6 लोगों की हत्या का दोषी मानते हुए फांसी की सजा, सबूत मिटाने के आरोप में 10 साल के कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस माना। ये अपनी तरह का मामला था, जिसमें कोई चश्मदीद नहीं था। हत्याकांड में परवेज टाक का साथ देने वाला साकिर मानी कभी पकड़ा नहीं गया। जेल में परवेज टाक से हुई थी एजाज खान की मुलाकात एक्टर एजाज खान, लैला की छोटी बहन के दोस्त थे। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में एजाज ने कहा, 'लैला से मेरी सीधी दोस्ती नहीं थी, लेकिन उसकी छोटी बहन आफरीन और जारा मेरी बहुत अच्छी दोस्त थीं। मेरा उनके घर आना-जाना लगा रहता था। पहले हम अक्सर फोन पर बात करते थे, लेकिन अचानक एक दिन उसका फोन बंद आने लगा। मैंने इधर-उधर लोगों से पूछा, लेकिन किसी को कुछ पता नहीं था। मुझे लगा कि शायद वो लोग फिर से उमराह, मक्का-मदीना या ईरान गए होंगे, इसलिए संपर्क नहीं हो पा रहा है, लेकिन जब मुझे न्यूज के जरिए यह पता चला कि लैला और उनका परिवार अब इस दुनिया में नहीं है, तो मैं अंदर से पूरी तरह टूट गया। लैला, उसकी बहनें, भाई कोई भी ऐसी मौत डिजर्व नहीं करता था। बहुत कम उम्र थी, सब मेहनती, होशियार और खूबसूरत थे।' 'पहली बार मेरी परवेज टाक से लैला के घर पर मुलाकात हुई थी और दूसरी बार मुंबई के आर्थर रोड जेल में। मैं कुछ दिन जेल में था। एक दिन मुझे किसी ने कहा कि कोई आपसे मिलने आया है। मैंने पूछा कौन? उसने कहा- "वही, जो गैंग मर्डर करके आया है।" मैं समझ गया। परवेज टाक लंगड़ाते हुए आया। उसके दोनों पैर किसी बीमारी से सड़ चुके थे। मैंने उससे पूछा- "तूने ऐसा क्यों किया?" तो उसने कहा- "मैंने कुछ नहीं किया।" उसी वक्त उसकी बीवी और बच्चे भी उससे मिलने आए थे। मैंने उसकी तरफ इशारा करके कहा- "अगर इनके साथ ऐसा हो, तो तुझे कैसा लगेगा?" उसी जेल में वो सड़-सड़ कर मर रहा है।’ कई स्कैंडल के नाम रही लैला खान की जिंदगी फिल्म डायरेक्टर राकेश सावंत ने हमसे लैला खान की कंट्रोवर्शियल जिंदगी पर बात की। उन्होंने कहा- मेरी फिल्म वफा के रिलीज होने के 3-4 महीने बाद की बात है। ओशिवारा में ‘समर्थ वैभव’ नाम की बिल्डिंग है, उसके नीचे एक व्हाइट लामा कैफे है। लैला ने मुझे फोन कर वहां आने को कहा। मैं वहां गया तो देखा कि लैला, उसकी मां, उसका बॉयफ्रेंड (जो एक बिल्डर का बेटा था) और दुबई से आया मेरा ही एक दोस्त, सब एक टेबल पर बैठे थे। उस टेबल पर बंदूक रखी हुई थी। मैं देखकर डर गया। दुबई वाले दोस्त ने मुझे बताया, “देख राकेश, लैला ने मुझसे 5 करोड़ लिए थे। वो मेरे साथ लिव-इन में थी और अब इस लड़के के साथ है। तुम लैला को समझाओ, वरना ये बड़ी मुश्किल में फंस जाएगी।” इस घटना के 1-2 साल बाद लैला हमेशा के लिए लापता हो गई। लैला खान के बारे में- लैला खान का असली नाम रेशमा पटेल था। उनका जन्म 1978 में मुंबई में हुआ था। हालांकि जन्म की असल तारीख क्या है, इस बात का जिक्र कहीं नहीं मिलता। लैला खान की मां का नाम अथिया पटेल था, हालांकि हर कोई उन्हें सेलिना नाम से बुलाता था। लंबे संघर्ष के बाद लैला खान को 2002 की बिग बजट कन्नड़ फिल्म ‘मेकअप’ में काम मिला। 30 नवंबर 2002 को रिलीज हुई फिल्म को क्रिटिक्स की तो सराहना मिली, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई। इस फिल्म से मेकर्स को 75 लाख रुपए का नुकसान हुआ था। इसके बाद लैला खान को भारत के पहले सुपरस्टार रहे राजेश खन्ना की कमबैक फिल्म ‘वफाः ए डेडली लव स्टोरी’ में उनके अपोजिट कास्ट किया गया। फिल्म में लैला खान को एक बेवफा पत्नी के रूप में दिखाया गया था। फिल्म को राखी सावंत के भाई राकेश सावंत ने डायरेक्ट किया था। 19 दिसंबर 2008 को रिलीज हुई फिल्म वफा बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं कर सकी और सी-ग्रेड फिल्म करने के लिए राजेश खन्ना की भी जमकर आलोचना हुई। (नोटः ये खबर लैला खान की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाने वाले डायरेक्टर राकेश सावंत से बातचीत, केस की जांच कर रहे डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस अंबादास पोते के पुराने इंटरव्यू और दैनिक भास्कर की सीनियर रिपोर्टर वर्षा राय की रिसर्च के आधार पर लिखी गई है। ) लेखक- ईफत कुरैशी रिपोर्टर- वर्षा राय ................................................ फार्महाउस गया एक्ट्रेस का परिवार अचानक हुआ लापता: एक साल बाद खुदाई में सड़ते मिले 6 कंकाल, आतंकी बम ब्लास्ट से हुआ हत्याकांड का खुलासा, पार्ट-1 छुट्टी मनाने पूरा परिवार साथ जा रहा था। हंसी-खेल का माहौल था, सबने फार्महाउस में होने वाले मनोरंजन, गानों और कुछ न कुछ करने का पहले से मन बना रखा था। घर के 7 लोग, लैला, लैला की मां सेलिना, बहनें जारा, आफरीन (अजमीना), कजिन रेशमा और भाई इमरान और सौतेले पिता परवेज टाक 2 गाड़ियों में भरकर फार्महाउस के लिए रवाना हुए। पूरी खबर पढ़िए... बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के केस 2 में अगले मंगलवार-बुधवार पढ़िए कहानी नीरज ग्रोवर हत्याकांड की, जिनकी लाश के एक्ट्रेस ने 300 टुकड़े किए गए थे। ............................................................................ एक्ट्रेस के घर से लापता हुए नीरज ग्रोवरः लाश के सामने बनाए गए शारीरिक संबंध, 300 टुकड़े कर थैलियों में ठिकाने लगाई गई लाश, पार्ट-1 मई 2008 की बात है, उस दौर की सबसे मशहूर क्राइम रिपोर्टर जिग्ना वोरा के पास अमरनाथ ग्रोवर का कॉल आया। उन्होंने घबराती हुई आवाज में कहा, 'जिग्ना जी, मैं अमरनाथ बोल रहा हूं, मेरा बच्चा गुम हो गया है, क्या आप इस पर स्टोरी करेंगी।' जिग्ना जो बड़े-बड़े केस पर रिपोर्टिंग करती थीं, उनके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं थी। उन्होंने जवाब दिया, 'सर, ऐसे कई बच्चे गुम हो जाते हैं, लेकिन हम सब पर स्टोरी थोड़ी कर सकते।' अमरनाथ ग्रोवर ने दबाव देकर कहा, 'नहीं, ये केस कुछ अलग है।' पूरी कहानी पढ़िए अगले मंगलवार-बुधवार, बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के केस-2 में।