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    ईरान पर हमले के लिए नेतन्याहू ने US को उकसाया, ट्रंप का किया ब्रेनवॉश? चौंकाने वाली रिपोर्ट

    4 days ago

    मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल मिलकर लगातार ईरान पर हमला कर रहा, जिसके जवाब में तेहरान खाड़ी देशों में स्थित यूएस मिलिट्री बेस पर मिसाइलें दाग रहा है. बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि ईरान पर हमला इसलिए किया क्योंकि तेहरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू कर दिया था और वह कुछ ही महीनों में परमाणु हथियार प्राप्त कर लेता. ऐसे में बड़ा सवाल ये भी है कि ईरान से ज्यादा दिक्कत इजरायल को थी या अमेरिका को. कहीं ऐसा तो नहीं कि नेतन्याहू ने ट्रंप का ब्रेनवॉश कर दिया और उन्हें ईरान से युद्ध करने के लिए उकसा दिया?

    अमेरिका ने ईरान पर क्यों किया हमला?

    जंग के चौथे दिन अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा, 'यूएस इस जंग में इसलिए गया क्योंकि इजरायल पहले ही हमला करने का तय कर चुका था. इसका बदला लेने के लिए ईरान उस क्षेत्र में अमेरिका के ठिकानों पर हमला कर सकता था. यही कारण है कि अमेरिका ने ईरान पर पहले अटैक कर दिया.'

    यानी अमेरिका ने खुद माना कि ईरान युद्ध में इजरायल का साथ देने अलावा उसके पास कोई ऑप्शन नहीं था. इसके बाद अब अमेरिका में ट्रंप की फजीहत हो रही है. वहां कहा जा रहा है कि नेतन्याहू के उकसावे पर यूएस ने ईरान पर अटैक कर दिया और अब ट्रंप अपने फैसले को सही साबित करने के लिए झूठ फैला रहे हैं. अमेरिकी सांसद मार्क वॉर्नर ने कहा, 'ईरान की ओर से अमेरिका पर कोई खतरा नहीं था. खतरा सिर्फ इजरायल को था. अगर हम इजरायल पर खतरे को ही अमेरिका पर खतरे के बराबर मान लें तो हम एक बिल्कुल गलत रास्ते पर जा रहे है.' 

    क्या नेतन्याहू ने ट्रंप को जंग के लिए उकसाया?

    एक्सपर्ट्स के मुताबिक इजरायल ने अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता को बार-बार बाधित किया. नेतन्याहू ने ही ट्रंप को ईरान में रिजीम चेंज के लिए उकसाया. उन्होंने ही ट्रंप के दिमाग में भरा कि ईरान दोनों देशों के लिए खतरा है. युद्ध के दौरान भी नेतन्याहू अमेरिका और ट्रंप को भड़काने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. नेतन्याहू ने कहा, '47 सालों से ईरान अमेरिका मुर्दाबाद के नारे लगा रहा है. उन्होंने अमेरिकी दूतावासों पर बमबारी की. ईरान ने दो बार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या करने की कोशिश की.'

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस जंग को लेकर कहा कि हमने चार से पांच सप्ताह का अनुमान लगाया था, लेकिन हमारे पास इससे कहीं अधिक समय तक युद्ध को खींचने की क्षमता है. नेतन्याहू ने कई बार ट्रंप को ये यकीन दिलाया कि अगर आप खामेनेई को मार डालेंगे तो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएंगे. वे ट्रंप को ये विश्वास दिलाने में कामयाब रहे कि अगर वे ईरान पर हमला करते हैं तो ऐसा करने वाले वे यूएस के पहले राष्ट्रपति हो जाएंगे.

    क्या वाकई ईरान से अमेरिका को कोई खतरा था?

    ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अमेरिका तक पहुंचने वाली लॉन्ग-रेंज मिसाइलें बना सकता था. अमेरिकी विभाग DIA की 2025 रिपोर्ट कहती है कि ईरान 2035 तक ही ऐसी मिसाइल डेवलप कर सकता है. ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान न्यूक्लियर प्रोग्राम को रिबिल्ड कर रहा था और कुछ दिनों में बम बना सकता था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) रिपोर्ट्स कहती हैं कि ईरान ने 2015 में डील के बाद न्यूक्लियर वेपन डेवलपमेंट रोक दिया था.

    ट्रंप का दावा है कि अगर अमेरिका, ईरान पर अटैक नहीं करता तो ईरान अटैक कर देता, लेकिन खुद पेंटागन ने अमेरिकी संसद को बताया कि तेहरान, अमेरिका पर पहले हमला करने वाला नहीं था. यानी ट्रंप के दावों को तो खुद अमेरिकी इंटेलिजेंस रिपोर्ट सपोर्ट नहीं करती है.

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