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7 जनवरी 2026 को ईरान के आर्मी चीफ मेजर जनरल अमीर हातमी ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि कोई भी विदेशी ताकत ईरान को धमकी नहीं दे सकती और अगर कोई हमला करता है तो उसका 'हाथ काट दिया जाएगा.'
दरअसल बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ पर पोस्ट में लिखा, 'अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को गोली मारकर या हिंसक तरीके से मारता है, तो अमेरिका उन्हें बचाने आएगा. हम तैयार हैं और लोडेड हैं.'
इसके बाद दोनों देशों में तनाव बढ़ गया है. इस बीच दोनों देशों के हथियारों की तुलना ग्लोबल फायरपावर की रिपोर्ट से करते हैं. ग्लोबल फायरपावर दुनिया के 145 देशों की सेनाओं की रैंकिंग करता है और पावर इंडेक्स स्कोर देता है, कम स्कोर का मतलब ज्यादा ताकत.
अमेरिका और ईरान में युद्ध हुआ तो कितने दिन चलेगा?
अमेरिका और ईरान के बीच अगर युद्ध हुआ तो यह घंटों में नहीं बल्कि दिनों, हफ्तों या महीनों तक चल सकता है. ग्लोबल फायरपावर के डेटा से अमेरिका की सेना ईरान से कहीं ज्यादा मजबूत दिखती है, इसलिए अमेरिका जल्दी हावी हो सकता है. लेकिन ईरान की सेना असिमेट्रिक वारफेयर (गुरिल्ला स्टाइल हमले, मिसाइल और प्रॉक्सी ग्रुप्स) में माहिर है, जो युद्ध को लंबा खींच सकती है.
ईरान की सेना असिमेट्रिक वारफेयर में माहिर है.
दोनों देशों की ओवरऑल मिलिट्री रैंकिंग और ताकत कितनी है?
ग्लोबल फायरपावर 2025 की रिपोर्ट में अमेरिका दुनिया की नंबर 1 मिलिट्री पावर है, जिसका पावर इंडेक्स स्कोर 0.0744 है. ईरान 145 देशों में 16वें नंबर पर है और उसका स्कोर 0.3048 है. इसका मतलब अमेरिका की सेना ईरान से काफी आगे है, खासकर टेक्नोलॉजी, बजट और ग्लोबल पहुंच में.
अमेरिका पिछले 10 सालों से टॉप पर है और NATO का फाउंडिंग मेंबर है, जबकि ईरान रूस जैसे देशों से पार्टनरशिप रखता है. अमेरिका की सेना हर क्षेत्र में बैलेंस्ड है, जबकि ईरान लैंड फोर्स और मिसाइल्स पर ज्यादा फोकस करता है.
दोनों देशों की सैन्य ताकत कितनी है?
अमेरिका: 15 करोड़ से ज्यादा मैनपावर है, जिसमें 12.4 करोड़ सर्विस के लिए फिट हैं. हर साल 44.4 लाख लोग मिलिट्री एज पहुंचते हैं. कुल मिलिट्री पर्सनल 21.2 लाख हैं, जिसमें 13.2 लाख एक्टिव, 7.9 लाख रिजर्व और कोई पैरामिलिट्री नहीं है.
ईरान: 4.94 करोड़ से ज्यादा मैनपावर है, जिसमें 4.15 करोड़ सर्विस के लिए फिट हैं. हर साल 14 लाख से ज्याद लोग मिलिट्री एज पहुंचते हैं. कुल मिलिट्री पर्सनल 11.80 लाख हैं, जिसमें 6 लाख से ज्यादा एक्टिव, 3.5 लाख रिजर्व और 2.2 लाख पैरामिलिट्री सैनिक हैं.
अमेरिका की मैनपावर ईरान से 4 गुना ज्यादा है, लेकिन ईरान की पैरामिलिट्री फोर्स इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) असिमेट्रिक हमलों में मजबूत है.
किस देश के पास ज्यादा बजट और खतरनाक हथियार हैं?
अमेरिका का डिफेंस बजट 895 बिलियन डॉलर है, जबकि ईरान का बजट 15.45 बिलियन डॉलर है. वहीं, हथियारों की बात करें तो...
अमेरिका के पास दुनिया की सबसे एडवांस्ड एयरफोर्स
कुल 13,043 एयरक्राफ्ट हैं, जिनमें 9,782 किसी भी समय हमले के लिए तैयार हैं. इसमें 5,843 हेलिकॉप्टर्स और 1,002 अटैक हेलिकॉप्टर्स भी शामिल हैं. अमेरिकी एयरफोर्स दुनिया की सबसे एडवांस्ड है, जिसके पास F-35 फाइटर जेट्स और B-2 बॉम्बर्स हैं.
4,640 टैंक हैं, जिसमें 3,480 हमले के लिए तैयार हैं. 39 हजार से ज्यादा आर्मर्ड व्हीकल्स, 671 सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी और 641 रॉकेट प्रोजेक्टर्स हैं. अमेरिका की आर्मी M1 अब्राम्स जैसे एडवांस्ड टैंक्स पर निर्भर है.
कुल 440 नेवल एसेट्स हैं, जिनका टोटल टनेज 4,168,037 टन है. इसमें 11 एयरक्राफ्ट कैरियर्स, 9 हेलिकॉप्टर कैरियर्स, 81 डिस्ट्रॉयर्स, 26 कोर्वेट्स, 70 सबमरीन और 8 माइन वारफेयर शामिल हैं. अमेरिका की नेवी ग्लोबल है और कैरियर्स से एयर अटैक कर सकती है.
ईरान ड्रोन और मिसाइल में मजबूत
कुल 551 विमान हैं, जिसमें 331 हर वक्त हमले के लिए तैयार हैं. 128 हेलिकॉप्टर्स और 13 अटैक हेलिकॉप्टर्स हैं. ईरान की एयरफोर्स पुरानी है, जिसमें ज्यादातक 1970-80 के अमेरिकी और रूसी विमान शामिल हैं. लेकिन वह ड्रोन और मिसाइल में मजबूत है. हालांकि, अमेरिका 20 गुना आगे है.
कुल 1,713 टैंक, 65,825 आर्मर्ड व्हीकल्स, 392 सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी और 1,517 रॉकेट प्रोजेक्टर्स हैं. ईरान की लैंड फोर्स बड़ी है और मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (MLRS) में मजबूत, लेकिन टेक्नोलॉजी में अमेरिका से पीछे है. अमेरिका की आर्मर्ड व्हीकल्स ईरान से 6 गुना ज्यादा हैं.
कुल 107 नेवल एसेट्स हैं, जिनका टोटल टनेज 2,23,395 टन है. इसमें 7 फ्रिगेट्स, 3 कोर्वेट्स, 25 सबमरीन, 21 ऑफशोर पेट्रोल और 1 माइन वारफेयर हैं. ईरान की नेवी छोटी है लेकिन सबमरीन और फास्ट अटैक क्राफ्ट से गल्फ में खतरा पैदा कर सकती है. अमेरिका यहां पूरी तरह हावी है.
क्या दोनों देशों में परमाणु हमला मुमकिन है?
अमेरिका न्यूक्लियर पावर है. वह नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) का मेंबर है, जिसके पास हजारों न्यूक्लियर वॉरहेड्स हैं. ग्लोबल फायरपावर रिपोर्ट में इसे न्यूक्लियर कैपेबिलिटी के साथ नोट किया गया है. ईरान पर न्यूक्लियर प्रोग्राम का शक है और रिपोर्ट में कहा गया है कि वो इंडिजिनस न्यूक्लियर कैपेबिलिटी पर फोकस करता है, लेकिन ऑफिशियली कोई न्यूक्लियर वेपन बनाने की बात से इनकार करता है.
अगर युद्ध में न्यूक्लियर इस्तेमाल हुआ तो स्थिति बहुत खतरनाक हो सकती है, लेकिन दोनों देश इसे अवॉइड करते हैं. ईरान रूस से पार्टनरशिप रखता है, जबकि अमेरिका NATO का लीडर है.
तो फिर कौन सा देश ज्यादा ताकतवर है?
ग्लोबल फायरपावर के मुताबिक, अमेरिका हर कैटेगरी में ईरान से कहीं ज्यादा ताकतवर है. रैंक 1 बनाम 16 यानी ज्यादा सैनिक, विमान, जहाज, बजट और टेक्नोलॉजी. अमेरिका ग्लोबल वॉर लड़ सकता है, जबकि ईरान रीजनल थ्रेट है. लेकिन हूती और हिजबुल्लाह की मदद से ईरान की मिसाइल्स, ड्रोन और प्रॉक्सी फोर्सेस अमेरिका को नुकसान हो सकता है.
कुल मिलाकर, अमेरिका जीत सकता है लेकिन कीमत ज्यादा होगी. हालांकि, दोनों देशों में जंग की स्थिति बनती नहीं दिख रही है.