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    फार्महाउस से एक्ट्रेस का परिवार अचानक हुआ लापता:एक साल बाद खुदाई में सड़ते मिले 6 कंकाल, आतंकी ब्लास्ट से हुआ हत्याकांड का खुलासा

    5 days ago

    एक्ट्रेस लैला खान अपने परिवार के साथ छुट्टियां मनाने इगतपुरी फार्महाउस गई थीं। लेकिन फिर अचानक वो और उनका पूरा परिवार लापता हो गया। एक साल की तलाश के बाद खुदाई हुई तो उनके कंकाल ठीक उसी जगह मिले, जहां से वो लापता हुए थे। बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के केस-1 के पार्ट-1 में पढ़िए एक्ट्रेस लैला खान और उनके परिवार की गुमशुदगी, हत्या और तलाश की कहानी- मुंबई से 150 किलोमीटर दूर वो इगतपुरी फार्महाउस…. फरवरी 2011 की बात है, छुट्टी मनाने पूरा परिवार साथ जा रहा था। हंसी-खेल का माहौल था, सबने फार्महाउस में होने वाले मनोरंजन, गानों और कुछ न कुछ करने का पहले से मन बना रखा था। घर के 7 लोग, लैला, लैला की मां सेलिना, बहनें जारा, आफरीन (अजमीना), कजिन रेशमा और भाई इमरान और सौतेले पिता परवेज टाक 2 गाड़ियों में भरकर फार्महाउस के लिए रवाना हुए। लैला की मां सेलिना बेहद मॉडर्न थीं। उन्होंने खुद को ऐसे मैंटेन कर रखा था कि वो लैला की मां कम बड़ी बहन ज्यादा लगती थीं। उनका असली नाम वैसे तो अथिया पटेल था, लेकिन मॉडर्नाइजेशन के दौर में उन्होंने नाम बदलकर सेलिना कर लिया। पहली शादी उनकी नादिर पटेल से हुई, जिससे उन्हें एक बेटी लैला हुई। मुंबई जैसे बड़े शहर में जब नादिर पटेल के लिए गुजारा करना मुश्किल हुआ, तो वो नौकरी की तलाश में साउथ अफ्रीका चले गए। जल्द ही ठीक-ठाक नौकरी मिली और नादिर वहीं बस गए। सेलिना, मुंबई में बेटी लैला के साथ अकेले ही रहीं। हर महीने की शुरुआत में नादिर उन्हें खर्चा दे देते थे। ईद-दीवाली में नादिर मुंबई आते थे और एक-दो दिन ठहर कर लौट जाते। 1988 के आसपास की बात है, जब पति की गैरमौजूदगी में सेलिना की नजदीकियां मुंबई की मीरा रोड में रहनेवाले आसिफ शेख से बढ़ने लगीं। आसिफ भी तलाकशुदा थे और अकेले रहते थे। अकेलेपन से थक चुकीं सेलिना ने बिना पहले पति को तलाक दिए ही आसिफ शेख से दूसरी शादी कर ली। इस शादी से उन्हें तीन बच्चे जारा, इमरान और आफरीन (अजमीना) हुए। समय के साथ सेलिना और आसिफ में भी मतभेद होने लगे और दोनों ने तलाक ले लिया। कुछ सालों तक अकेले रहने के बाद 2010 में सेलिना ने कश्मीर के परवेज टाक से तीसरी शादी कर ली। परवेज उम्र में सेलिना से काफी छोटे थे, इसके बावजूद उनके रिश्ते पर कोई असर नहीं पड़ा। समय के साथ लैला के परिवार ने परवेज को अपना लिया और वो उनके घर का अहम हिस्सा बन गया। फरवरी 2011 में जब लैला का परिवार इगतपुरी फार्महाउस गया तो परवेज टाक भी उनके साथ थे। फिल्म जिन्नात की आधी शूटिंग हो चुकी थी और लैला छुट्टियों से लौटकर फिल्म पूरी करने वाली थीं। ये बात उन्होंने पहले ही डायरेक्टर-प्रोड्यूसर राकेश सावंत को बता रखी थी। फरवरी 2011 के मिड में फिल्म की शूटिंग शुरू होनी थी। डायरेक्टर राकेश सावंत ने जब डेट्स कन्फर्म करने के लिए लैला को कॉल किया, तो नंबर बंद था। उन्हें लगा नेटवर्क की दिक्कत होगी, लेकिन फिर एक-एक दिन कर हफ्ते बीतने लगे और फिर पूरा महीना बीत गया। राकेश सावंत झल्लाने लगे। शूटिंग टलती जा रही थी। पैसे अटकने लगे थे और बड़े नुकसान की आहट थी। राकेश सावंत के मन में अब एक सवाल उठा- ‘कहीं लैला मेरे पैसे लेकर भाग तो नहीं गई?’ राकेश ने न आव देखा न ताव, वो सीधे लैला के पते पर पहुंचे। राकेश और लैला एक ही सनशाइन बिल्डिंग के फेज-4 में रहते थे, जबकि लैला 6 नंबर पर रहती थीं। उन्हें घर जाना मुनासिब नहीं लगा, तो वो सीधे बिल्डिंग के सेक्रेटरी के पास पहुंचे। उन्हें सेक्रेटरी से कहा- ‘मुझे लैला से मिलना है।’ वो बात पूरी कर पाते तभी पीछे से एक आवाज आई, ‘आप कौन?’ राकेश पलटे तो देखा, लैला के सौतेले पिता आसिफ शेख थे। राकेश लैला के परिवार को करीब से जानते थे और हर सदस्य से परिचित थे। आसिफ शेख करीब आए और झल्लाते हुए कहा- ‘यहां से निकल जाओ।’ राकेश ने अब जरा ठहरकर कहा, ‘उसने मेरी फिल्म साइन की है, मेरे पास कॉन्ट्रैक्ट है?’ जवाब मिला- ‘कोई कॉन्ट्रैक्ट-वॉन्ट्रैक्ट नहीं, निकलो यहां से। वो फॉरेन में है।’ राकेश को ऐसे जवाब की उम्मीद न थी, लेकिन अब उनका गुस्सा, चिंता में बदल गया। वो सीधे बिल्डिंग के ही सामने स्थित ओशिवारा पुलिस स्टेशन पहुंचे। पूरा मामला बताया। कहा- 'लैला मिल नहीं रही, मुझे उसकी मिसिंग कंप्लेंट लिखवानी है।’ पुलिस ने सीधे कहा- ‘क्या आप उसके खून के रिश्ते में हैं। नहीं न। आप शिकायत नहीं लिखवा सकते।’ राकेश लैला को ढूंढने में अड़े थे। उन्होंने फिर कॉन्ट्रैक्ट दिखाया और कहा, ‘मेरे पैसे फंसे हैं।’ उनकी जिद पर पुलिस ने जवाब दिया, ‘ठीक है, हम शिकायत लिख लेते हैं, कुछ अपडेट मिली, तो बताएंगे।’ सिर्फ लैला ही नहीं पूरा परिवार था लापता पुलिस कंप्लेंट हुई तो ये बात उस जमाने के क्राइम रिपोर्टर निशात शमसी तक भी पहुंची, लेकिन कुछ इस ढंग से- ‘जानी-मानी हीरोइन प्रोड्यूसर के पैसे लेकर भाग गई।’ निशात को कहानी में दिलचस्पी हुई। जब उन्होंने रिसर्च शुरू की, तो आम सी लगने वाली ये स्टोरी कुछ बड़ी अनहोनी की तरफ इशारा करने लगी। निशात को मालूम पड़ा कि सिर्फ लैला खान ही नहीं बल्कि उनका पूरा परिवार कई महीनों से लापता है। न परिवार को कहीं देखा गया, न किसी की उनसे बात हो रही है। एक रिपोर्टर के लिए मामले की तह तक जाना मुश्किल था, तो उन्होंने पुलिस की मदद लेनी चाही। वो भी राकेश की तरह मिसिंग कंप्लेंट करवाने पहुंचे, लेकिन जवाब वही मिला- ‘आप खून के रिश्ते में नहीं हैं।’ निशात ने इस बार लंबा रास्ता अपनाया। उन्होंने लंबी जद्दोजहद से लैला खान के सौतेले पिता आसिफ शेख का नंबर ढूंढा। आसिफ ने खुद तो मदद करने से इनकार कर दिया, लेकिन निशात की जिद पर उन्होंने लैला खान के बायोलॉजिकल पिता नादिर पटेल का नंबर दे दिया। नादिर को कॉल मिलाया, तो उन्होंने लैला का नाम सुनते ही बात करने से इनकार कर दिया। नादिर परिवार को छोड़ चुके थे और अफ्रीका के इथोपिया में नौकरी कर रहे थे। निशात ने जैसे-तैसे बात संभाली और उन्हें बताया कि लैला और उनका परिवार लापता है। उनकी कोई खबर नहीं है। पुलिस जब तक शिकायत नहीं लिखेगी, जब तक को रिश्तेदार आगे न आए। नादिर पटेल मदद तो करना चाहते थे, लेकिन ऐसी तंगी थी कि उनके पास भारत आने तक के पैसे नहीं थे। निशात ने खुद उनके भारत आने का बंदोबस्त करवाया। फिर शुरू हुई लैला खान और उनके परिवार की तलाश मुंबई पुलिस के पास जब ये केस पहुंचा, तो उन्होंने इसकी तरफ बेहद ठंडा रवैया अपनाया। प्रोड्यूसर राकेश सावंत भी पैसे डूबने के डर से बार-बार पुलिस स्टेशन के चक्कर काटते हुए अपडेट ले रहे थे। एक बार तो उन्हें ये कहते हुए केस से दूर रहने को कहा गया कि लैला पाकिस्तानी थीं, वो आतंकवादियों के संपर्क में थीं, दाऊद इब्राहिम के साथ काम करती थीं। राकेश सावंत को बार-बार मामले में पड़ते देख इस केस की जांच से जुड़े पूर्व पुलिस कमिश्नर ने ये तक कह दिया,“तुम केस को क्यों उलझा रहे हो? लैला एक टेररिस्ट है। तुम्हारी बेवकूफी की वजह से राखी सावंत को भी दिक्कत होगी। तुम इस मामले में दखल मत दो।" अब ये कुछ महीने साल में बदल गए। समय के साथ केस ठंडा पड़ गया। राकेश सावंत ने भी मान लिया कि लैला पैसे लेकर भाग गईं। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि ये केस न सिर्फ चर्चा में आया, बल्कि फिल्मी जगत का सबसे भयावह केस बन गया। जून 2012 कश्मीर के किश्तवाड़ में एक आतंकी बम ब्लास्ट हुआ। जांच में सामने आया कि जिस जगह ब्लास्ट हुआ, वहां से कुछ दूरी पर स्थित ओम मेहता रोड की एक दुकान में एक कार मिली। काले रंग की लग्जरी आउटलेंडर कार पर महाराष्ट्र का नंबर (MH02BY7867) था। पड़ोसियों ने एटीएस टीम को बताया कि ये कार करीब 8 महीनों से यही है। न किसी ने इसे निकाला न इस्तेमाल किया। रजिस्ट्रेशन नंबर की जांच की तो सामने आया कि कश्मीर में मिली ये कार लैला खान की मां सेलिना के नाम पर रजिस्टर थी। लैला को पहले ही आतंकवादी कहा जा रहा था, ऐसे में उनकी कार का एक ऐसी जगह मिलना जहां आतंकी बम ब्लास्ट हुआ था, काफी अटपटा था। इससे भी अटपटा ये था कि पूरा परिवार लापता था। सवाल उठना लाजमी था कि क्या आतंकवाद से जुड़ीं लैला खान का इस बम ब्लास्ट में हाथ है, क्या लैला खान सोची-समझी साजिश के तहत परिवार के साथ लापता हुईं। संयोग ये रहा कि जिस समय बम ब्लास्ट हुआ, प्रोड्यूसर राकेश सावंत भी कश्मीर में ही शूटिंग कर रहे थे। एक दिन फारुख अब्दुल्लाह (कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री) ने एक गेट-टुगेदर रखा। कश्मीर के कई बड़े लोग इसमें पहुंचे। तभी एक पुलिस ऑफिसर ने राकेश सावंत को नजदीक बुलाकर पूछा- “क्या आप किसी लैला खान को जानते हैं? वो बॉम्बे में रहती है, राजेश खन्ना के साथ फिल्म कर चुकी है।” राकेश ने झट से कहा, ‘हां, जिस फिल्म की आप बात कर रहे हैं वो मेरी फिल्म है।’ राकेश ने अपनी तरफ से पूरी कहानी बताई और पुलिस ऑफिसर ने अपनी। राकेश को ये सुनते ही अनहोनी का एहसास हुआ। कश्मीर पुलिस की जांच में सामने आया कि जिस दुकान में लैला खान की कार मिली थी, वो परवेज टाक ने 10 महीने पहले किराए पर ली थी। वो हर महीने किराया भरता था, लेकिन आता नहीं था, उसने उस दुकान में सिर्फ कार पार्क कर रखी थी। अब पुलिस को परवेज टाक की तलाश थी। जैसे-जैसे जांच तेज हुई, वैसे-वैसे कई परतें खुलीं। सामने आया कि परवेज लैला के परिवार के साथ इगतपुरी फार्महाउस गया था, इसके बाद से ही परिवार लापता है। लैला के घर की तलाश में परवेज का वोटर आईडी कार्ड भी मिला। कार की जानकारी के लिए लैला खान तक पहुंचना जरूरी थी। क्राइम ब्रांच भी केस की जांच कर रहा था। जून 2012 में मुंबई पुलिस टीम, क्राइम ब्रांच की टीम और फोरेंसिक टीम इगतपुरी फार्महाउस पहुंचीं। घंटों तक छानबीन हुई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। दूसरी तरफ कश्मीर से परवेज टाक के दोस्त की गिरफ्तारी हुई। उसने पुलिस की मदद की और परवेज को ट्रेस करने में मदद की। 12 जून को आखिरकार कश्मीर बॉर्डर से परवेज टाक को गिरफ्तार कर लिया गया। वो पाकिस्तान भागने की फिराक में था। परवेज को कई सवालों के जवाब देने थे। पहला सवाल- उसका कश्मीर में हुए बम ब्लास्ट से क्या लेना-देना है। दूसरा सबसे अहम सवाल- लैला खान और उनका परिवार कहां हैं। कश्मीर में हुए बम ब्लास्ट के मामले में परवेज टाक का कोई लेना-देना नहीं था। लेकिन लैला खान के बारे में वो काफी कुछ जानता था। उसने पुलिस को एक अटपटा बयान दिया। पहले उसने कहा, लैला दुबई भाग गई। फिर सख्ती होने पर उसने कहा- लैला के परिवार की एक साल पहले गोली मारकर हत्या कर दी गई। ये सच था। लैला वाकई अब इस दुनिया में नहीं थीं, लेकिन परवेज ने मुकम्मल सच नहीं बताया था। अगले दिन क्राइम ब्रांच, मुंबई पुलिस और फोरेंसिक टीम उसकी निशानदेही पर उसी फार्महाउस पहुंचीं। परवेज आगे की तरफ चल रहा था और सभी टीम उसके पीछे-पीछे। परवेज फार्महाउस के अंदर आया, चारों तरफ नजरें घुमाईं, कुछ देर ठहरा और फिर पीछे की तरफ से बाहर आया। इस बार वो घबराया हुआ था। उसने धीरे से एक हाथ उठाया और उंगली से जमीन की तरफ इशारा किया। इशारा मिलते ही पुलिस ने खुदाई शुरू की। एक घंटे बीते, 2 और फिर 3। कुछ नहीं मिला। पुलिस 15 फुट तक खोद चुकी थी, जून की गर्मी में सभी पसीने से तरबतर थे। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस अंबादास पोते भी गड्ढे में उतर आए और टीम को खुदाई करते रहने के लिए कहा। अचानक उनकी नजर एक अटपटी चीज पर पड़ी। जमीन में न जाने कितनी चीजें दफन होती हैं, लेकिन वो नजारा कुछ अलग था। नजदीक आकर गौर किया तो वो उंगली या अंगूठे की हड्डी थी। कुछ देर की खामोशी के बाद हलचल तेज हो गई। अब सभी ने औजार रख दिए और हाथों से मिट्टी हटाना शुरू कर दिया। वो कोई उंगली या अंगूठा नहीं बल्कि पूरा कंकाल था। खुदाई तेज हुई और 3 कंकाल निकले। हड्डियों में मांस का कतरा तक नहीं था, बस कुछ कपड़ों के चीथड़े थे।। किसी कंकाल के गले में चेन थी तो किसी हड्डीनुमा कलाई में कंगन था। उनके नीचे फटे-चीथड़े गद्दे भी थे। जैसे ही उन गद्दों को उठाया गया, पुलिस के सामने 3 और कंकाल थे। एक कंकाल के निचले हिस्से में जींस थीं, जो डिकंपोज नहीं हुई थी। उसमें किलर ब्रांड का लोगो था, मानों वो कंकाल किसी लड़के का हो। पास में एक जानवर का भी कंकाल था। कंकालों की हालत इतनी बदतर थी कि उन्हें थैलियों में भरकर फोरेंसिक एग्जामिनेशन के लिए भेजा गया। परवेज नहीं बैठा, एक-टक खुदाई देखता रहा। जब सारे कंकाल निकले तो उसने इशारे में रुक जाने को कहा। बस इतने ही कंकाल थे। लेकिन वो कंकाल किसके थे। क्या वो लैला खान और परिवार के थे। क्या लैला खान का परिवार हत्याएं कर भाग निकला। इन सभी सवालों के जवाब जानिए कल बुधवार, 21 जनवरी को, बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के लैला खान हत्याकांड के पार्ट-2 में। जमीन खोदकर निकाले गए एक्ट्रेस के परिवार के 6 कंकाल: एक साल पहले कुत्ते के साथ दफनाया, कातिल तसल्ली होने तक सिर कुचलता रहा (नोटः ये खबर लैला खान की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाने वाले डायरेक्टर राकेश सावंत से बातचीत, केस की जांच कर रहे डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस अंबादास पोते के पुराने इंटरव्यू और दैनिक भास्कर की सीनियर रिपोर्टर वर्षा राय की रिसर्च के आधार पर लिखी गई है। ) लेखक- ईफत कुरैशी रिपोर्टर- वर्षा राय
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