Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    dailyadda
    dailyadda

    Delhi Death Rate: दिल्ली में प्रदूषण छीन रहा सांसें, तीन साल में हुईं मौतों का आंकड़ा देख बैठ जाएगा आपका दिल!

    1 week ago

    दिल्ली की हवा में घुलते जहर का असर अब आंकड़ों में साफ-साफ नजर आने लगा है. साल-दर-साल सांस की बीमारियों से मरने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है.  ये कोई अफवाह नहीं, बल्कि दिल्ली सरकार के आधिकारिक दस्तावेज से निकला कड़वा सच है. अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय की दिल्ली सांख्यिकीय हैंडबुक 2025 में दर्ज वाइटल स्टैटिस्टिक्स के चैप्टर IV में यह डेटा बिल्कुल साफ दिया है कि मेडिकली सर्टिफाइड मौत के ब्रेकडाउन में रेस्पिरेटरी डिजीजेज को अलग कैटेगरी में रखा गया है और पिछले चार साल का ट्रेंड देखकर किसी का भी दिल सहम सकता है.

    जानें कब कितनी हुईं मौतें?

    2024 में सांस की बीमारियों जैसे अस्थमा, ब्रॉन्काइटिस, निमोनिया या फेफड़ों से जुड़ी अन्य समस्याएं से 9,211 मौतें दर्ज हुईं. ये 2023 के 8,801 से करीब 4.7% ज्यादा है, और 2022 के 7,432 से तो 24% ऊपर है. वहीं, सबसे चौंकाने वाला फिगर 2021 का है, उस साल कोविड-19 की दूसरी लहर ने देश में कोहराम मचा दिया था और रेस्पिरेटरी डेथ्स 14,442 तक पहुंच गई थीं. हालांकि, महामारी के बाद थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन अब यह आंकड़ा दोबारा बढ़ रहा है, जो साफ बताता है कि दिल्ली की एयर क्वालिटी और हेल्थ सिस्टम में अब भी बड़ी कमियां हैं.

    क्या बता रहा सरकारी आंकड़ा?

    office of the Chief Registrar (Births & Deaths) की ओर से जारी डेटा MCD, NDMC और अन्य बॉडीज से कलेक्ट किए गए रजिस्ट्रेशन पर आधारित है. कुल मेडिकली सर्टिफाइड डेथ्स में रेस्पिरेटरी का शेयर देखें तो 2024 में ये कुल 90,883 certified deaths का करीब 10% है, जबकि 2021 में ये 14.6% था. हालांकि, कुल मौतों (certified + non-certified) की बात करें तो 2024 में दिल्ली में कुल 1,39,480 मौतें दर्ज हुईं, जिनमें से 85,391 पुरुष, 54,051 महिलाएं और 38 अन्य थे.

    इस वजह से होती हैं सबसे ज्यादा मौतें

    अब जरा दूसरे कारणों से तुलना करें तो तस्वीर और साफ हो जाती है. सर्कुलेटरी डिजीज (जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक) अब भी सबसे बड़ी किलर हैं. 2024 में 21,262 मौतें सर्कुलेटरी डिजीज से हुईं, जो 2023 के 15714 से 35 पर्सेंट ज्यादा थीं. वहीं इंफेक्शन और पैरासाइटिक डिजीज में गिरावट आई है. 2024 में 16,060 मौतों की वजह यही बीमारियां थीं, जबकि 2023 में 20,781 लोगों ने इन बीमारियों के कारण जान गंवाई थी. कैंसर जैसी neoplasms बीमारियों की वजह से 5,960 लोगों की मौत हुई तो डाइजेस्टिव डिजीज के कारण 5,200 और अन्य कारणों से 33,190 लोगों की मौत हुई. कुल मिलाकर, सर्टिफाइड डेथ्स 2024 में 90,883 पहुंच गईं, जो 2023 के 88,628 से ज्यादा हैं. यह ट्रेंड बताता है कि जहां इंफेक्शंस डिजीज पर काबू पाया जा रहा है. वहीं, रेस्पिरेटरी और सर्कुलेटरी प्रॉब्लम्स बढ़ रहे हैं और इसके पीछे पॉल्यूशन, लाइफस्टाइल और एजिंग पॉपुलेशन जैसे फैक्टर भी हो सकते हैं.

    दिल्ली में कैसे हैं हालात?

    दिल्ली में हर साल नवंबर-दिसंबर के दौरान AQI 400-500 पार कर जाता है और PM2.5 जैसे पार्टिकल्स फेफड़ों को चीरते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स काफी समय से इस बारे में चेता रहे हैं कि दिल्ली में क्रॉनिक रेस्पिरेटरी समस्या बढ़ रही हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में. रेस्पिरेटरी मौत पर ये आंकड़े पॉलिसी मेकर्स के लिए wake-up call हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, सरकार को चाहिए कि प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को और मजबूत करें, ग्रीन कॉरिडोर्स बढ़ाए और अस्पताल में रेस्पिरेटरी यूनिट्स को भी अपग्रेड करें. वरना, ये संख्या और ऊपर चढ़ती रहेगी और दिल्लीवासियों की सांसें और छोटी होती जाएंगी.

    यह भी पढ़ें: धूप न मिलने का सीधा असर हड्डियों पर, दिखें ये लक्षण तो रहें सावधान

    Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

    Click here to Read More
    Previous Article
    Winter Finger Swelling: ठंड में क्यों सूज जाती हैं अंगुलियां, क्या है इनका सटीक इलाज?
    Next Article
    Processed Food vs Ultra-Processed Food: प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में कितना फर्क, कौन-सा आपकी सेहत के लिए ज्यादा खतरनाक?

    Related हेल्थ Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment