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    ड्राई आयरन से कितना अलग होता है स्टीम आयरन, किसमें ज्यादा खर्च होती है बिजली?

    1 week ago

    Dry Iron Vs Steam Iron: कपड़े प्रेस करना रोज का काम है. कुछ लोग बाहर कपड़े प्रेस करवाते हैं. तो ज्यादातर लोग यह काम घर में ही कर लेते हैं. लेकिन बाजार में मौजूद अलग-अलग तरह के आयरन लोगों को कन्फ्यूज कर देते हैं. सबसे आम सवाल यही होता है कि ड्राई आयरन और स्टीम आयरन में असली फर्क क्या है और बिजली किसमें ज्यादा लगती है. देखने में दोनों लगभग एक जैसे लगते हैं. 

    लेकिन काम करने का तरीका और नतीजे काफी हद तक अलग होते हैं. ड्राई आयरन सालों से घरों में इस्तेमाल हो रहा है. जबकि स्टीम आयरन ने कपड़े प्रेस करने को ज्यादा आसान और तेज बना दिया है. अगर आप नया आयरन लेने की सोच रहे हैं तो इनमें से कौन ज्यादा बिजली खाता है यह जानना जरूरी है.  

    ड्राई आयरन कैसे काम करता है?

    ड्राई आयरन सबसे बेसिक किस्म का आयरन होता है. इसमें सिर्फ एक ही काम होता है गर्म प्लेट के दबाव से कपड़ों की सिलवटें हटाना. इसमें पानी डालने या भाप बनाने का कोई सिस्टम नहीं होता. तापमान कंट्रोल नॉब से आप कॉटन, सिल्क या सिंथेटिक कपड़ों के हिसाब से गर्मी सेट करते हैं. ड्राई आयरन हल्का होता है जल्दी गर्म हो जाता है और आमतौर पर सस्ता भी पड़ता है. 

    हल्के कपड़े या रोज़मर्रा की प्रेसिंग के लिए यह पूरी तरह काफी होता है. लेकिन जिन कपड़ों में बहुत गहरी सिलवटें होती हैं, जैसे मोटी जींस, कॉटन की चादर या पर्दे, उनमें कई बार बार-बार प्रेस करनी पड़ती है. यानी काम हो जाता है, लेकिन मेहनत थोड़ी ज्यादा लगती है.

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    स्टीम आयरन कितना अलग है?

    स्टीम आयरन में पानी की टंकी होती है. यह गर्म होकर भाप बनाता है, जो कपड़े के रेशों को नरम कर देती है. इसी वजह से गहरी सिलवटें भी एक या दो स्ट्रोक में निकल जाती हैं. आप इसे ड्राई मोड में भी चला सकते हैं और स्टीम मोड में भी. भारी कपड़े, स्कूल यूनिफॉर्म, जींस, पर्दे या सूट प्रेस करने में यह ज्यादा असरदार माना जाता है. जहां तक बिजली की बात है, तो स्टीम आयरन आमतौर पर ड्राई आयरन से थोड़ा ज्यादा पावर का होता है क्योंकि इसमें पानी गर्म करने का सिस्टम भी चलता है. हालांकि समय कम लगता है.

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    बिजली किसमें ज्यादा खर्च होती है?

    ड्राई आयरन और स्टीम आयरन में अगर बिजली खपत की बात की जाए तो दोनों में ही ज्यादा फर्क नहीं होता. बिजली के हिसाब से खपत की बात करें तो स्टीम आयरन 1 घंटे में ज्यादा यूनिट लेता है लेकिन वह काम जल्दी करता है. इतनी देर में ड्राई आयरन पावर काम लगा लेकिन वह स्लो कम करेगा. यानी दोनों में ज्यादा अंतर नहीं है. एक कम वक्त में ज्यादा खपत करके जल्दी काम कर देगा. तो दूसरा ज्यादा देर में काम करेगा लेकिन खपत भी लगभग बराबर करेगा.

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