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    China On Venezuela: वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के बाद चीन भयंकर परेशान! क्या है सैटेलाइट, तेल और टेक्नोलॉजी का कनेक्शन

    1 week ago

    वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वैश्विक स्तर पर हलचल मची हुई है. इस बीच चीन को काफी टेंशन हो गई है. वजह साफ है वेनेजुएला में चीन का राजनीतिक, तकनीकी और आर्थिक निवेश बेहद गहरा है. मादुरो के सत्ता से हटते ही आशंका है कि अमेरिका को उन संवेदनशील चीनी ठिकानों तक पहुंच मिल सकती है, जिन्हें बीजिंग वर्षों से सहेजता आया है.

    अमेरिका की ओर से मादुरो को उनकी पत्नी समेत गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क की अदालत में पेश किया जाना सिर्फ वेनेजुएला की राजनीति तक सीमित नहीं है. यह सीधे तौर पर अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता से जुड़ता है. चीन को डर है कि अगर वेनेजुएला में अमेरिका समर्थक सरकार बनती है तो वहां मौजूद चीनी सैन्य-संबंधित तकनीक, सैटेलाइट स्टेशन और डिजिटल नेटवर्क अमेरिका के नियंत्रण या निगरानी में आ सकते हैं. बीजिंग के लिए यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि लैटिन अमेरिका में वेनेजुएला चीन का सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार रहा है.

    चीनी सैटेलाइट ट्रैकिंग स्टेशन सबसे बड़ा खतरा

    चीन ने वेनेजुएला में कुछ बेहद संवेदनशील सैटेलाइट ट्रैकिंग और ग्राउंड स्टेशन स्थापित किए हैं, जो अब खतरे की जद में हैं. इसमें एल सोम्ब्रेरो और ल्यूपा ट्रैकिंग स्टेशन शामिल है. इसके अलावा कैप्टन मैनुअल रियोस एयरबेस पर स्थित एल सोम्ब्रेरो ट्रैकिंग स्टेशन शामिल है. बोलिवर राज्य के ल्यूपा में इसका बैकअप स्टेशन है. ये स्टेशन चीन के लिए बेहद अहम हैं क्योंकि ये VRSS-2 सैटेलाइट (2017 में लॉन्च) के लिए टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड ऑपरेशन संभालते हैं. VRSS-2 एक Citizen Earth Paragraph सैटेलाइट है, लेकिन इसके डेटा का उपयोग सुरक्षा और रणनीतिक विश्लेषण में भी हो सकता है. इन्हें चाइना ग्रेट वॉल इंडस्ट्री कॉपोरेशन ने बनाया है. चीन को आशंका है कि इन स्टेशनों तक अमेरिका की पहुंच उसकी सैटेलाइट क्षमताओं और निगरानी नेटवर्क को नुकसान पहुंच सकता है.

    रडार और एयर डिफेंस सिस्टम भी जोखिम में

    वेनेजुएला में चीन ने एडवांस रडार सिस्टम और एयर डिफेंस टेक्नोलॉजी स्थापित की है, जो कथित तौर पर पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को भी ट्रैक करने में सक्षम है. अगर ये सिस्टम अमेरिका के हाथ लगते हैं तो चीन की सैन्य तकनीकी बढ़त को गंभीर झटका लग सकता है.

    तेल के कारोबार में चीन की गहरी पैठ

    चीन वेनेजुएला का सबसे बड़ा विदेशी निवेशक और तेल के शीर्ष खरीदारों में से एक है. 2014 के चाइना नेशनल पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के अनुसार China National Petroleum Corporation (CNPC) ने पुराने तेल क्षेत्रों को आधुनिक बनाया है. उन्होंने आधुनिक ड्रिलिंग रिग, वॉटरफ्लडिंग सिस्टम और रिफाइनरी अपग्रेड किए. इस वजह से कुछ क्षेत्रों में तेल उत्पादन 8 गुना तक बढ़ा है. अब अगर नई सरकार अमेरिकी प्रभाव में आती है तो चीनी कंपनियों के कॉन्ट्रैक्ट रद्द हो सकते हैं. प्रतिबंध या जब्ती की कार्रवाई हो सकती है. यह चीन के ऊर्जा सुरक्षा हितों के लिए बड़ा झटका होगा.

    टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क पर भी संकट

    चीन ने वेनेजुएला में डिजिटल और टेलीकम्युनिकेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया है. 4G नेटवर्क के लिए Huawei और ZTE ने काफी काम किया है. इसके अलावा मोबाइल फोन असेंबली, साइबर सिक्योरिटी सिस्टम पर खासा जोर दिया है. Huawei 1999 से वेनेजुएला में सक्रिय है. चीन को डर है कि अमेरिकी दबाव में Huawei और ZTE पर प्रतिबंध लग सकते हैं. नेटवर्क डेटा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर अमेरिकी निगरानी बढ़ सकती है.

    ये भी पढ़ें: वेनेजुएला से 50 मिलियन बैरल तेल सीधा पहुंचेगा US, ट्रंप का बड़ा ऐलान, जानें क्या है असली मकसद?

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