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    Budget 2026: देश में बनाई जाएंगी 1000 से ज्यादा इंडियन क्लिनिकल ट्रायल साइट्स, दवाओं के विकास में आएगी तेजी

    6 days ago

    Budget 2026: भारत के हेल्थ केयर और फार्मास्यूटिकल इकोसिस्टम को बदलने के लिए एक बड़े कदम के तहत केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए यह घोषणा की है कि सरकार 1000 से ज्यादा मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का एक बड़ा नेटवर्क स्थापित करेगी. यह कदम भारत को एक ग्लोबल बायोफार्मास्युटिकल हब के रूप में स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है.

    देशभर में रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर 

    फिलहाल भारत में ज्यादातर क्लिनिकल ट्रायल मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में है. इस नई पहल का मकसद देशभर में रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर को फैलाना है. इससे दवा विकास तेज और विश्व स्तर पर कॉम्पिटेटिव बन पाएगा. 

    बायोफार्मा शक्ति मिशन 

    इस बदलाव के केंद्र में बायोफार्मा शक्ति मिशन की शुरुआत है. इसके लिए अगले 5 सालों में कुल ₹10,000 करोड़ का बजट रखा गया है. यह मिशन बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने के लिए डिजाइन किया गया है. इस मिशन के तहत कैंसर, ऑटोइम्यून बीमारियों पर पुरानी बीमारियों के इलाज के लिए तेजी से एडवांस्ड दवाओं को बनाया जाएगा. इस मिशन के तहत सरकार रिसर्च, क्लिनिकल ट्रायल, मैन्युफैक्चरिंग का रेगुलेशन को कवर करने वाला एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम बनाने की योजना बना रही है. 

    एक क्लिनिकल ट्रायल नेटवर्क 

    बायोफार्मा शक्ति के तहत सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक है 1000 से ज्यादा मान्यता प्राप्त भारतीय क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का निर्माण. यह साइट्स सिर्फ मेट्रो शहरों तक ही सीमित नहीं रहेंगी बल्कि राज्यों और क्षेत्रों में भी इनका विस्तार किया जाएगा. इससे दवा और वैक्सीन का विकास तेज होगा, क्लिनिकल ट्रायल की लागत कम होगी और साथ ही वैश्विक फार्मास्युटिकल कंपनियों को भारत में ट्रायल करने के लिए आकर्षित किया जा सकेगा.

    फार्मास्युटिकल शिक्षा और अनुसंधान का विस्तार 

    बजट में लंबी अवधि की क्षमता निर्माण पर भी ध्यान दिया गया है. सरकार 3 नए नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च स्थापित करेगी और साथ मौजूद संस्थानों को अपग्रेड करेगी.

    हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा 

    रिसर्च के अलावा बजट में हेल्थ केयर डिलीवरी और ग्लोबल पहुंच पर भी काफी ज्यादा जोर दिया गया है. सरकार पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत राज्यों के साथ मिलकर पांच रीजनल मेडिकल सेंटर स्थापित करने की योजना बना रही है. इसके अलावा भारत की किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली हेल्थ केयर सीमाओं का लाभ उठाते हुए देश को एक ग्लोबल मेडिकल टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में भी बढ़ावा देने के लिए हील इन इंडिया पहल की शुरुआत की गई है.

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