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    'भीख मांगते हुए शर्म से झुक जाता है सिर...' बातों-बातों में ये क्या कह गए शहबाज, खोल दी पाकिस्तान की पोल

    5 days ago

    Pakistan: पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति किसी से छिपी नहीं है. कर्ज के सहारे पाकिस्तान की इकोनॉमी जैसे-तैसे चल रही है. पाकिस्तान का विदेशी कर्ज बीते 12 सालों में उछलकर दोगुना हो चुका है. इसके अलावा, पाकिस्तान लगातार अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के सामने भी झोली फैलाता रहा है. एशियन डेवलपमेंट बैंक का भी पाकिस्तान पर कर्ज है. पाकिस्तान भले ही बड़ी-बड़ी डींगे हांकता हो, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है. खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसका खुलासा किया है. 

    शहबाज का आया चौंकानेवाला बयान

    शहबाज ने बताया कि किस तरह से बार-बार दूसरों के आगे हाथ फैलाने के लिए उन्हें और आसिम मुनीर को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है. शहबाज ने कहा है, "जब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और मैं दुनिया भर में पैसे के लिए भीख मांगते घूमते हैं, तो हमें शर्म आती है. लोन लेना हमारे आत्म-सम्मान पर बहुत बड़ा बोझ है. शर्म से हमारे सिर झुक जाते हैं. वे हमसे जो कुछ भी करवाना चाहते हैं, हम उनमें से कई बातों के लिए मना नहीं कर सकते..."  शहबाज का यह बयान एक ऐसे समय पर आया है, जब पाकिस्तान अपनी अपनी इकोनॉमिक ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के साथ बातचीत कर रहा है. 

    PAK PM ने और क्या कहा?

    शहबाज ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने सेंट्रल बैंक और वित्त मंत्रालय को पूंजी तक पहुंच को बेहतर बनाकर इंडस्ट्रियल ग्रोथ को सपोर्ट करने का निर्देश दिया है. शरीफ ने शुक्रवार को कहा, "गवर्नर को बिजनेस लीडर्स की बात सुननी होगी और बड़े फैसले लेने होंगे." पाकिस्तान को हाल ही में IMF से उसके चल रहे लोन प्रोग्राम और एक अलग क्लाइमेट से जुड़े फाइनेंसिंग प्लान के तहत 1.2 बिलियन डॉलर मिले हैं. इस फंडिंग से पाकिस्तान को कर्ज चुकाने और अपने विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में मदद मिली है.

    पाकिस्तान की इकोनॉमी का हाल

    पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने इस हफ्ते अनुमान लगाया कि दिसंबर तक उसका विदेशी मुद्रा भंडार 20 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो जाएगा - जो एक रिकॉर्ड होगा. हालांकि, इस प्रोग्राम के लिए पाकिस्तान को सख्त मॉनेटरी पॉलिसी बनाए रखने और खर्च पर लगाम लगाने की जरूरत है. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने इस हफ्ते यह कहते हुए अप्रत्याशित रूप से ब्याज दर को 10.5 परसेंट पर स्थिर रखा कि महंगाई बढ़ सकती है, जबकि जून में खत्म होने वाले फाइनेंशियल ईयर में GDP 3.75-4.75 परसेंट बढ़ने का अनुमान लगाया है.

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