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    'बैड्स ऑफ बॉलीवुड' केस: दिल्ली हाई कोर्ट ने समीर वानखेड़े की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया

    3 days ago

    दिल्ली हाई कोर्ट ने IRS ऑफिसर समीर वानखेड़े के उस मुकदमे पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने नेटफ्लिक्स सीरीज़ "बैड्स ऑफ़ बॉलीवुड" में अपने कथित तौर पर मानहानि करने का आरोप लगाया था. दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि इस कोर्ट के पास शिकायत पर सुनवाई करने का अधिकार नहीं है.

    दिल्ली हाई कोर्ट ने शिकायत को वापस कर दिया ताकि उसे सही अधिकार क्षेत्र वाली अदालत के सामने पेश किया जा सके.

    पुरुषेंद्र कौरव की सिंगल बेंच ने आदेश दिया कि केस को उस कोर्ट में भेजा जाए, जो इस तरह के मामले को सुनने की सही अधिकारिता रखता हो. यह केस वापस सही कोर्ट में दाखिल किया जाना चाहिए.

    वानखेड़े ने आरोप लगाया है कि वेब सीरीज 'द बैड्स ऑफ बॉलीवुड' में उनके खिलाफ जानबूझकर गलत और अपमानजनक कंटेंट दिखाया गया. उनका कहना है कि इस वेब सीरीज ने न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और सम्मान को नुकसान पहुंचाया, बल्कि उनके परिवार पर भी असर डाला है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की इमेज को इस सीरीज में नकारात्मक तरीके से दिखाया गया, जिससे आम लोगों का कानून और सरकारी एजेंसियों पर भरोसा कमजोर हुआ.

    वानखेड़े ने अदालत से मांग की थी कि उन्हें स्थायी आदेश और मुआवजा दिया जाए. इसके तहत रेड चिलीज एंटरटेनमेंट, नेटफ्लिक्स, ट्विटर (अब एक्स कॉर्प), गूगल, फेसबुक और अन्य संबंधित पक्ष शामिल हैं. उनका कहना था कि इस वेब सीरीज ने जानबूझकर उनके खिलाफ पक्षपाती और अपमानजनक कंटेंट दिखाया है.

    समीर वानखेड़े और आर्यन खान केस अभी बॉम्बे हाई कोर्ट और विशेष एनडीपीएस कोर्ट में लंबित है. शिकायत में उन्होंने सीरीज के एक सीन का भी हवाला दिया. इसमें एक किरदार 'सत्यमेव जयते' कहता है और उसके तुरंत बाद अश्लील इशारा करता है. शिकायतकर्ता के अनुसार, यह न केवल उनके लिए अपमानजनक है, बल्कि यह राष्ट्रीय प्रतीक और इस स्लोगन का अपमान भी है. इस तरह की हरकत भारतीय कानून के तहत अपराध मानी जाती है.

    वानखेड़े ने अदालत से 2 करोड़ रुपए मुआवजे की भी मांग की. उन्होंने बताया कि यह रकम टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल को कैंसर मरीजों के इलाज के लिए दी जाएगी.

    दिल्ली हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 2 दिसंबर 2025 को फैसला सुरक्षित रखा था. अब कोर्ट ने मामले को सही अधिकार वाली अदालत में भेज दिया है. इस फैसले के बाद यह मामला आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए संबंधित कोर्ट में जाएगा.

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